TOI 1752 एक लाल बौने तारे के चारों ओर बना दो पुष्ट ग्रहों वाला सिस्टम है: अंदरूनी TOI 1752 b का आकार पृथ्वी का करीब 1.69 गुना और कक्षीय अवधि लगभग 0.94 दिन है, जबकि बाहरी TOI 1752 c का आकार करीब 2.29 पृथ्वी त्रिज्या और... NASA के TESS उपग्रह ने ग्रहों के पारगमन संकेत खोजे। धरती से किए गए बहुरंगी अवलोकनों, जिनमें टेने...
प्रकाशितकर्ताGPT-5.6 Luna से संपादितGPT Image 1.5 से चित्र बनाए गए
शोध उत्तर

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: What did the Spain-led IAA-CSIC team confirm about the TOI-1752 planetary system 337 light-years away—including how NASA’s TESS satellite an. Article summary: The IAA-CSIC-led work confirmed that TOI-1752 is a two-planet system around an M-dwarf roughly 337 light-years away, with a radically hot inner super-Earth and a cooler outer sub-Neptune. The supplied evidence confirms t. Topic tags: general, government, education, academic, general web. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, watermark
करीब 337 प्रकाश-वर्ष दूर स्थित TOI-1752 सिस्टम अब दो पुष्ट ग्रहों वाला ग्रह-तंत्र है। दोनों ग्रह एक M1V लाल बौने तारे की परिक्रमा करते हैं, लेकिन उनकी परिस्थितियां एक-दूसरे से बिल्कुल अलग हैं। अंदरूनी ग्रह TOI-1752 b बेहद छोटी कक्षा में घूमने वाला, अत्यधिक गर्म सुपर-अर्थ है, जबकि बाहरी ग्रह TOI-1752 c एक बड़ा उप-नेप्च्यून है, जिसकी कक्षा को आशावादी हैबिटेबल ज़ोन से जोड़ा गया है। 9
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हालांकि, ‘हैबिटेबल ज़ोन’ शब्द को लेकर सावधानी जरूरी है। यह केवल उस दूरी की श्रेणी बताता है जहां कुछ खास वायुमंडलीय परिस्थितियों में सतह पर तरल पानी संभव हो सकता है। इससे यह साबित नहीं होता कि ग्रह पर पानी, रहने योग्य सतह या जीवन मौजूद है।
NASA का ट्रांजिटिंग एक्सोप्लैनेट सर्वे सैटेलाइट (TESS) तारों की चमक में आने वाली नियमित, हल्की गिरावटों को खोजता है। ऐसा तब होता है जब कोई ग्रह अपने तारे और पृथ्वी के बीच से गुजरता है। इन संकेतों से ग्रह के उम्मीदवार मिलते हैं, लेकिन वे अपने-आप में अंतिम प्रमाण नहीं होते, क्योंकि ग्रहणशील द्वितारा प्रणालियां भी ऐसा ही संकेत दे सकती हैं।
इसीलिए शोधकर्ताओं ने अंतरिक्ष से मिले TESS डेटा के साथ धरती पर किए गए अवलोकनों को जोड़ा। IAA-CSIC के नेतृत्व वाली टीम ने बहुरंगी ट्रांजिट फोटोमेट्री का इस्तेमाल किया। कैनरी द्वीपसमूह के टीदे वेधशाला स्थित Telescopio Carlos Sánchez पर लगे MuSCAT2 उपकरण से किए गए अवलोकन भी इस फॉलो-अप प्रयास का हिस्सा थे। 1
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इन संयुक्त आंकड़ों ने दोनों संकेतों को ग्रहों के रूप में मान्य करने में मदद की। प्रकाशित अध्ययन में TOI-1752 b और TOI-1752 c को इस लाल बौने तारे के सामने से गुजरने वाले दो छोटे ग्रहों के रूप में प्रस्तुत किया गया है। 13
NASA के एक्सोप्लैनेट आर्काइव के अनुसार TOI-1752 b की त्रिज्या पृथ्वी की लगभग 1.69 गुना है और यह अपने तारे की एक परिक्रमा करीब 0.94 दिन में पूरी करता है। इसे पुष्ट ट्रांजिटिंग ग्रह के रूप में दर्ज किया गया है। 5
इतनी छोटी कक्षा का मतलब है कि यह ग्रह अपने लाल बौने तारे के बेहद करीब है और उसे तीव्र तारकीय विकिरण मिलता है। इसी वजह से अध्ययन और उससे जुड़ी रिपोर्टों में इसे ‘लावा वर्ल्ड’ कहा गया है। 5
13
यह नाम किसी सतह पर पिघली चट्टान का प्रत्यक्ष अवलोकन नहीं है। इसे एक मॉडल-आधारित वर्णन समझना बेहतर है, जो ग्रह के अत्यधिक गर्म और विकिरण-प्रभावित वातावरण की ओर संकेत करता है।
आकार के आधार पर TOI-1752 b को सुपर-अर्थ कहा जाता है, लेकिन इसका यह अर्थ नहीं कि इसकी सतह पृथ्वी जैसी है। यहां ‘सुपर-अर्थ’ मुख्य रूप से पृथ्वी से बड़े, लेकिन नेप्च्यून जैसे ग्रहों से छोटे आकार को दर्शाता है।
TOI-1752 c इस सिस्टम का बाहरी ग्रह है। NASA के अनुसार इसका द्रव्यमान पृथ्वी का 5.86 गुना, त्रिज्या लगभग 0.204 बृहस्पति-त्रिज्या यानी करीब 2.29 पृथ्वी-त्रिज्या, और कक्षीय अवधि 32.7 दिन है। यह अपने तारे से लगभग 0.1614 खगोलीय इकाई दूर है। 2
शोधपत्र में इसकी अधिक सटीक कक्षीय अवधि 32.7144 दिन और त्रिज्या 2.29 पृथ्वी-त्रिज्या बताई गई है, जो NASA के कैटलॉग आंकड़ों से मेल खाती है। 2
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आकार के लिहाज से यह पृथ्वी और नेप्च्यून के बीच आता है। लेकिन केवल त्रिज्या से यह पता नहीं चलता कि इसकी ठोस चट्टानी सतह है, गहरा हाइड्रोजन-समृद्ध वायुमंडलीय आवरण है, उच्च-दाब वाली जल-परतें हैं या कोई दूसरी आंतरिक संरचना।
कुछ समाचार रिपोर्टों में TOI-1752 c को पृथ्वी-जैसा विकिरण पाने वाला और इसका अनुमानित संतुलन तापमान करीब 18–20 डिग्री सेल्सियस बताया गया है। इन आंकड़ों को रिपोर्ट किए गए अनुमान के रूप में देखना चाहिए, न कि पृथ्वी जैसी सतह या रहने योग्य परिस्थितियों के प्रमाण के रूप में। 10
किसी ग्रह को हैबिटेबल ज़ोन में तब रखा जाता है जब उसकी अपने तारे से दूरी, कुछ उपयुक्त वायुमंडलीय मान्यताओं के तहत, सतह पर तरल पानी की अनुमति दे सकती हो।
TOI-1752 c जैसे उप-नेप्च्यून में वायुमंडल और आंतरिक संरचना इस आकलन को और जटिल बनाते हैं। घना गैसीय आवरण ग्रह की सतह पर पृथ्वी से बहुत अलग दबाव और तापमान पैदा कर सकता है, भले ही उसे मिलने वाली तारकीय ऊर्जा पृथ्वी के आसपास हो। बादल, गैसों की संरचना, वायुमंडलीय परिसंचरण और ठोस सतह की मौजूदगी या अनुपस्थिति भी निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।
उपलब्ध शोध रिकॉर्ड में TOI-1752 c पर जीवन या किसी बायोसिग्नेचर का कोई प्रमाण नहीं मिला है। इस ग्रह के वायुमंडल और उसकी रासायनिक संरचना का पता लगाने के लिए आगे के अवलोकन, खासकर ट्रांजिट स्पेक्ट्रोस्कोपी, जरूरी होंगे। इसमें ग्रह के वायुमंडल से मिलने वाले कमजोर संकेत को उसके चमकीले मेजबान तारे के प्रकाश से अलग करने की कोशिश की जाती है।
TOI-1752 c की तुलना अक्सर K2-18 b से की जा रही है। दोनों लाल बौने तारों की परिक्रमा करने वाले ट्रांजिटिंग उप-नेप्च्यून हैं और दोनों की कक्षीय अवधि लगभग 33 दिन है। NASA एक्सोप्लैनेट आर्काइव के अनुसार K2-18 b की कक्षीय अवधि 32.94 दिन और त्रिज्या करीब 2.37 पृथ्वी-त्रिज्या है। 3
यह तुलना उपयोगी जरूर है, लेकिन दोनों ग्रहों को एक जैसा नहीं माना जा सकता। समान आकार और कक्षीय अवधि का अर्थ यह नहीं कि उनके द्रव्यमान, वायुमंडल, बादल, आंतरिक संरचना या सतही परिस्थितियां भी समान होंगी। TOI-1752 सिस्टम की खासियत यह है कि इसमें एक ही तारे के चारों ओर दो बहुत अलग तरह के ग्रह मौजूद हैं।
TOI-1752 b अपने तारे की परिक्रमा एक दिन से भी कम समय में करता है, जबकि TOI-1752 c को लगभग 33 दिन लगते हैं। एक ही तारे के आसपास मौजूद ये विपरीत ग्रह वैज्ञानिकों को कई अहम सवालों पर काम करने का मौका देते हैं—ग्रह कैसे बनते और अपनी कक्षाओं में पहुंचते हैं, तीव्र तारकीय विकिरण वायुमंडल को कैसे बदलता या छीनता है, और ग्रह की त्रिज्या उसकी आंतरिक संरचना के बारे में क्या संकेत देती है।
यह शोध Monthly Notices of the Royal Astronomical Society में प्रकाशित हुआ है। 12
13 आगे TOI-1752 c के द्रव्यमान और वायुमंडल का अध्ययन विशेष रूप से महत्वपूर्ण होगा। इससे पता चल सकता है कि यह गैस-समृद्ध उप-नेप्च्यून है, पानी से भरपूर दुनिया है या मध्यम आकार के ग्रहों की कोई अन्य श्रेणी। साथ ही यह भी स्पष्ट होगा कि केवल हैबिटेबल ज़ोन में स्थित होने से किसी ग्रह के बारे में वास्तव में कितनी जानकारी हासिल की जा सकती है।
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TOI 1752 एक लाल बौने तारे के चारों ओर बना दो पुष्ट ग्रहों वाला सिस्टम है: अंदरूनी TOI 1752 b का आकार पृथ्वी का करीब 1.69 गुना और कक्षीय अवधि लगभग 0.94 दिन है, जबकि बाहरी TOI 1752 c का आकार करीब 2.29 पृथ्वी त्रिज्या और...
TOI 1752 एक लाल बौने तारे के चारों ओर बना दो पुष्ट ग्रहों वाला सिस्टम है: अंदरूनी TOI 1752 b का आकार पृथ्वी का करीब 1.69 गुना और कक्षीय अवधि लगभग 0.94 दिन है, जबकि बाहरी TOI 1752 c का आकार करीब 2.29 पृथ्वी त्रिज्या और... NASA के TESS उपग्रह ने ग्रहों के पारगमन संकेत खोजे। धरती से किए गए बहुरंगी अवलोकनों, जिनमें टेनेरिफ़ के टीदे वेधशाला में MuSCAT2 का काम भी शामिल है, ने इन संकेतों को ग्रहों के रूप में मान्यता देने में मदद की। [1][11][12]
TOI 1752 c को आशावादी हैबिटेबल ज़ोन से जुड़ा माना गया है, लेकिन इसका अर्थ जीवन, तरल पानी या पृथ्वी जैसी सतह की पुष्टि नहीं है।
TOI 1752 एक लाल बौने तारे के चारों ओर बना दो पुष्ट ग्रहों वाला सिस्टम है: अंदरूनी TOI 1752 b का आकार पृथ्वी का करीब 1.69 गुना और कक्षीय अवधि लगभग 0.94 दिन है, जबकि बाहरी TOI 1752 c का आकार करीब 2.29 पृथ्वी त्रिज्या और... NASA के TESS उपग्रह ने ग्रहों के पारगमन संकेत खोजे। धरती से किए गए बहुरंगी अवलोकनों, जिनमें टेने...
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करीब 337 प्रकाश-वर्ष दूर स्थित TOI-1752 सिस्टम अब दो पुष्ट ग्रहों वाला ग्रह-तंत्र है। दोनों ग्रह एक M1V लाल बौने तारे की परिक्रमा करते हैं, लेकिन उनकी परिस्थितियां एक-दूसरे से बिल्कुल अलग हैं। अंदरूनी ग्रह TOI-1752 b बेहद छोटी कक्षा में घूमने वाला, अत्यधिक गर्म सुपर-अर्थ है, जबकि बाहरी ग्रह TOI-1752 c एक बड़ा उप-नेप्च्यून है, जिसकी कक्षा को आशावादी हैबिटेबल ज़ोन से जोड़ा गया है। 9
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हालांकि, ‘हैबिटेबल ज़ोन’ शब्द को लेकर सावधानी जरूरी है। यह केवल उस दूरी की श्रेणी बताता है जहां कुछ खास वायुमंडलीय परिस्थितियों में सतह पर तरल पानी संभव हो सकता है। इससे यह साबित नहीं होता कि ग्रह पर पानी, रहने योग्य सतह या जीवन मौजूद है।
NASA का ट्रांजिटिंग एक्सोप्लैनेट सर्वे सैटेलाइट (TESS) तारों की चमक में आने वाली नियमित, हल्की गिरावटों को खोजता है। ऐसा तब होता है जब कोई ग्रह अपने तारे और पृथ्वी के बीच से गुजरता है। इन संकेतों से ग्रह के उम्मीदवार मिलते हैं, लेकिन वे अपने-आप में अंतिम प्रमाण नहीं होते, क्योंकि ग्रहणशील द्वितारा प्रणालियां भी ऐसा ही संकेत दे सकती हैं।
इसीलिए शोधकर्ताओं ने अंतरिक्ष से मिले TESS डेटा के साथ धरती पर किए गए अवलोकनों को जोड़ा। IAA-CSIC के नेतृत्व वाली टीम ने बहुरंगी ट्रांजिट फोटोमेट्री का इस्तेमाल किया। कैनरी द्वीपसमूह के टीदे वेधशाला स्थित Telescopio Carlos Sánchez पर लगे MuSCAT2 उपकरण से किए गए अवलोकन भी इस फॉलो-अप प्रयास का हिस्सा थे। 1
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इन संयुक्त आंकड़ों ने दोनों संकेतों को ग्रहों के रूप में मान्य करने में मदद की। प्रकाशित अध्ययन में TOI-1752 b और TOI-1752 c को इस लाल बौने तारे के सामने से गुजरने वाले दो छोटे ग्रहों के रूप में प्रस्तुत किया गया है। 13
NASA के एक्सोप्लैनेट आर्काइव के अनुसार TOI-1752 b की त्रिज्या पृथ्वी की लगभग 1.69 गुना है और यह अपने तारे की एक परिक्रमा करीब 0.94 दिन में पूरी करता है। इसे पुष्ट ट्रांजिटिंग ग्रह के रूप में दर्ज किया गया है। 5
इतनी छोटी कक्षा का मतलब है कि यह ग्रह अपने लाल बौने तारे के बेहद करीब है और उसे तीव्र तारकीय विकिरण मिलता है। इसी वजह से अध्ययन और उससे जुड़ी रिपोर्टों में इसे ‘लावा वर्ल्ड’ कहा गया है। 5
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यह नाम किसी सतह पर पिघली चट्टान का प्रत्यक्ष अवलोकन नहीं है। इसे एक मॉडल-आधारित वर्णन समझना बेहतर है, जो ग्रह के अत्यधिक गर्म और विकिरण-प्रभावित वातावरण की ओर संकेत करता है।
आकार के आधार पर TOI-1752 b को सुपर-अर्थ कहा जाता है, लेकिन इसका यह अर्थ नहीं कि इसकी सतह पृथ्वी जैसी है। यहां ‘सुपर-अर्थ’ मुख्य रूप से पृथ्वी से बड़े, लेकिन नेप्च्यून जैसे ग्रहों से छोटे आकार को दर्शाता है।
TOI-1752 c इस सिस्टम का बाहरी ग्रह है। NASA के अनुसार इसका द्रव्यमान पृथ्वी का 5.86 गुना, त्रिज्या लगभग 0.204 बृहस्पति-त्रिज्या यानी करीब 2.29 पृथ्वी-त्रिज्या, और कक्षीय अवधि 32.7 दिन है। यह अपने तारे से लगभग 0.1614 खगोलीय इकाई दूर है। 2
शोधपत्र में इसकी अधिक सटीक कक्षीय अवधि 32.7144 दिन और त्रिज्या 2.29 पृथ्वी-त्रिज्या बताई गई है, जो NASA के कैटलॉग आंकड़ों से मेल खाती है। 2
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आकार के लिहाज से यह पृथ्वी और नेप्च्यून के बीच आता है। लेकिन केवल त्रिज्या से यह पता नहीं चलता कि इसकी ठोस चट्टानी सतह है, गहरा हाइड्रोजन-समृद्ध वायुमंडलीय आवरण है, उच्च-दाब वाली जल-परतें हैं या कोई दूसरी आंतरिक संरचना।
कुछ समाचार रिपोर्टों में TOI-1752 c को पृथ्वी-जैसा विकिरण पाने वाला और इसका अनुमानित संतुलन तापमान करीब 18–20 डिग्री सेल्सियस बताया गया है। इन आंकड़ों को रिपोर्ट किए गए अनुमान के रूप में देखना चाहिए, न कि पृथ्वी जैसी सतह या रहने योग्य परिस्थितियों के प्रमाण के रूप में। 10
किसी ग्रह को हैबिटेबल ज़ोन में तब रखा जाता है जब उसकी अपने तारे से दूरी, कुछ उपयुक्त वायुमंडलीय मान्यताओं के तहत, सतह पर तरल पानी की अनुमति दे सकती हो।
TOI-1752 c जैसे उप-नेप्च्यून में वायुमंडल और आंतरिक संरचना इस आकलन को और जटिल बनाते हैं। घना गैसीय आवरण ग्रह की सतह पर पृथ्वी से बहुत अलग दबाव और तापमान पैदा कर सकता है, भले ही उसे मिलने वाली तारकीय ऊर्जा पृथ्वी के आसपास हो। बादल, गैसों की संरचना, वायुमंडलीय परिसंचरण और ठोस सतह की मौजूदगी या अनुपस्थिति भी निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।
उपलब्ध शोध रिकॉर्ड में TOI-1752 c पर जीवन या किसी बायोसिग्नेचर का कोई प्रमाण नहीं मिला है। इस ग्रह के वायुमंडल और उसकी रासायनिक संरचना का पता लगाने के लिए आगे के अवलोकन, खासकर ट्रांजिट स्पेक्ट्रोस्कोपी, जरूरी होंगे। इसमें ग्रह के वायुमंडल से मिलने वाले कमजोर संकेत को उसके चमकीले मेजबान तारे के प्रकाश से अलग करने की कोशिश की जाती है।
TOI-1752 c की तुलना अक्सर K2-18 b से की जा रही है। दोनों लाल बौने तारों की परिक्रमा करने वाले ट्रांजिटिंग उप-नेप्च्यून हैं और दोनों की कक्षीय अवधि लगभग 33 दिन है। NASA एक्सोप्लैनेट आर्काइव के अनुसार K2-18 b की कक्षीय अवधि 32.94 दिन और त्रिज्या करीब 2.37 पृथ्वी-त्रिज्या है। 3
यह तुलना उपयोगी जरूर है, लेकिन दोनों ग्रहों को एक जैसा नहीं माना जा सकता। समान आकार और कक्षीय अवधि का अर्थ यह नहीं कि उनके द्रव्यमान, वायुमंडल, बादल, आंतरिक संरचना या सतही परिस्थितियां भी समान होंगी। TOI-1752 सिस्टम की खासियत यह है कि इसमें एक ही तारे के चारों ओर दो बहुत अलग तरह के ग्रह मौजूद हैं।
TOI-1752 b अपने तारे की परिक्रमा एक दिन से भी कम समय में करता है, जबकि TOI-1752 c को लगभग 33 दिन लगते हैं। एक ही तारे के आसपास मौजूद ये विपरीत ग्रह वैज्ञानिकों को कई अहम सवालों पर काम करने का मौका देते हैं—ग्रह कैसे बनते और अपनी कक्षाओं में पहुंचते हैं, तीव्र तारकीय विकिरण वायुमंडल को कैसे बदलता या छीनता है, और ग्रह की त्रिज्या उसकी आंतरिक संरचना के बारे में क्या संकेत देती है।
यह शोध Monthly Notices of the Royal Astronomical Society में प्रकाशित हुआ है। 12
13 आगे TOI-1752 c के द्रव्यमान और वायुमंडल का अध्ययन विशेष रूप से महत्वपूर्ण होगा। इससे पता चल सकता है कि यह गैस-समृद्ध उप-नेप्च्यून है, पानी से भरपूर दुनिया है या मध्यम आकार के ग्रहों की कोई अन्य श्रेणी। साथ ही यह भी स्पष्ट होगा कि केवल हैबिटेबल ज़ोन में स्थित होने से किसी ग्रह के बारे में वास्तव में कितनी जानकारी हासिल की जा सकती है।
Studio Global AI
इस पृष्ठ में एक स्रोत-समर्थित उत्तर शामिल है जिसे आप Studio Global के अंदर जारी रख सकते हैं।
TOI 1752 एक लाल बौने तारे के चारों ओर बना दो पुष्ट ग्रहों वाला सिस्टम है: अंदरूनी TOI 1752 b का आकार पृथ्वी का करीब 1.69 गुना और कक्षीय अवधि लगभग 0.94 दिन है, जबकि बाहरी TOI 1752 c का आकार करीब 2.29 पृथ्वी त्रिज्या और...
TOI 1752 एक लाल बौने तारे के चारों ओर बना दो पुष्ट ग्रहों वाला सिस्टम है: अंदरूनी TOI 1752 b का आकार पृथ्वी का करीब 1.69 गुना और कक्षीय अवधि लगभग 0.94 दिन है, जबकि बाहरी TOI 1752 c का आकार करीब 2.29 पृथ्वी त्रिज्या और... NASA के TESS उपग्रह ने ग्रहों के पारगमन संकेत खोजे। धरती से किए गए बहुरंगी अवलोकनों, जिनमें टेनेरिफ़ के टीदे वेधशाला में MuSCAT2 का काम भी शामिल है, ने इन संकेतों को ग्रहों के रूप में मान्यता देने में मदद की। [1][11][12]
TOI 1752 c को आशावादी हैबिटेबल ज़ोन से जुड़ा माना गया है, लेकिन इसका अर्थ जीवन, तरल पानी या पृथ्वी जैसी सतह की पुष्टि नहीं है।