छह गंभीर, उपचार प्रतिरोधी और ACPA पॉजिटिव रूमेटॉयड आर्थराइटिस मरीजों में लिम्फोडिप्लीशन के बाद मिव सेल की एक खुराक से बीमारी की गतिविधि में उल्लेखनीय कमी आई; तीन मरीज निगरानी अवधि के अंत तक RA की दवा मुक्त रहे। [1] मिव सेल ने B कोशिकाओं को गहराई से कम किया और ACPA तथा रूमेटॉयड फैक्टर एंटीबॉडी में 90% से अधिक की औसत...
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शोध उत्तर

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: What did the Phase 1 COMPARE trial published in Nature Medicine on August 27, 2026, show about repurposing the fully human CD19-targeting CA. Article summary: The Phase 1 findings are promising but preliminary: after lymphodepleting chemotherapy and one miv-cel infusion, six highly treatment-refractory, ACPA-positive adults reportedly had substantial reductions in RA activity,. Topic tags: general, general web, academic, government, education. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, watermark
COMPARE Phase 1 के नतीजे गंभीर रूमेटॉयड आर्थराइटिस (RA) में CD19 CAR-T सेल थेरेपी के इस्तेमाल की उत्साहजनक, लेकिन शुरुआती तस्वीर पेश करते हैं। इस अध्ययन में छह वयस्कों को शामिल किया गया था। सभी में सक्रिय, ACPA-पॉजिटिव बीमारी थी और कई biologic या targeted उपचारों के बावजूद RA नियंत्रित नहीं हो पाया था।
मरीजों को पहले lymphodepleting chemotherapy दी गई—यानी ऐसी कीमोथेरेपी, जो शरीर की मौजूदा प्रतिरक्षा कोशिकाओं को अस्थायी रूप से कम करती है। इसके बाद mivocabtagene autoleucel, जिसे miv-cel या KYV-101 भी कहा जाता है, की एक बार की infusion दी गई। सभी छह मरीजों में बीमारी की गतिविधि में पर्याप्त कमी देखी गई और निगरानी अवधि के अंत तक तीन मरीज RA की दवाओं से मुक्त थे। 1
यह परिणाम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि ये मरीज सामान्य उपचार से आसानी से नियंत्रित होने वाली बीमारी वाले नहीं थे। फिर भी, छह मरीजों का छोटा, open-label और बिना control group वाला अध्ययन यह साबित नहीं करता कि मिव-सेल बीमारी को हमेशा के लिए ठीक कर देता है, मौजूदा उपचारों से अधिक सुरक्षित है या standard B-cell depletion की जगह लेने के लिए तैयार है।
मिव-सेल एक autologous, fully human CAR-T थेरेपी है, जो CD19 नामक marker वाली B कोशिकाओं को निशाना बनाती है। B कोशिकाएं एंटीबॉडी बनाने और autoimmune बीमारी की प्रक्रिया में भूमिका निभा सकती हैं। इस उपचार का उद्देश्य सामान्य B-cell depletion की तुलना में बीमारी से जुड़ी B कोशिकाओं को अधिक व्यापक रूप से हटाना और फिर प्रतिरक्षा तंत्र को नए सिरे से बनने का अवसर देना है।
अध्ययन में उपचार के बाद रक्त में B कोशिकाओं की संख्या बहुत कम हो गई। जब ये कोशिकाएं दोबारा लौटने लगीं, तो उनमें मुख्य रूप से naïve B cells थीं—ऐसी अपेक्षाकृत शुरुआती कोशिकाएं, जो पहले से परिपक्व autoreactive B-cell repertoire की सीधी बहाली जैसी नहीं दिखतीं। शोधकर्ताओं ने इस पैटर्न को संभावित immune reset के अनुरूप माना: रोगकारी B कोशिकाएं हटें और उनकी जगह कम-विभेदित कोशिकाओं से प्रतिरक्षा तंत्र का पुनर्गठन हो। 3
5
जैविक संकेतों ने इस संभावना को कुछ समर्थन दिया। ACPA और rheumatoid factor के विभिन्न isotypes में तेज और उल्लेखनीय कमी आई। रिपोर्ट में autoantibodies की median कमी 90% से अधिक बताई गई, जबकि updated presentation में चार मरीजों में ACPA का स्तर लगातार सामान्य सीमा में रहा। 3
35 हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि ACPA का खत्म होना हर मरीज में स्थायी clinical remission की भविष्यवाणी कर सकता है।
सभी छह मरीजों में RA disease activity कम हुई। उनमें tender और swollen joints की संख्या तथा joint inflammation में कमी देखी गई। 1
36 Updated reports में Week 36 तक 66.6% ACR70 response भी बताई गई, लेकिन यह केवल छह में से चार मरीजों के अनुरूप है। इसलिए इसे पूरे RA population के लिए निश्चित response rate नहीं माना जाना चाहिए।
8
36
तीन मरीज observation period के अंत तक RA की दवाओं से मुक्त थे। 1 एक बार के उपचार से drug-free remission की यह संभावना proof-of-concept के रूप में महत्वपूर्ण है। लेकिन तुलना समूह न होने के कारण यह अलग करना संभव नहीं है कि लाभ lymphodepletion, CAR-T कोशिकाओं, background medication में बदलाव या गंभीर RA की स्वाभाविक उतार-चढ़ाव वाली प्रवृत्ति में से किस वजह से आया।
साथ ही, प्रतिक्रिया सभी मरीजों में समान या स्थायी हो, ऐसा अभी नहीं कहा जा सकता। लंबी निगरानी से पता चलेगा कि कितने मरीजों में बीमारी लौटती है, B-cell recovery का relapse से क्या संबंध है और relapse होने पर दोबारा उपचार सुरक्षित रूप से दिया जा सकता है या नहीं।
छह मरीजों के इस छोटे cohort में शुरुआती safety findings अपेक्षाकृत अनुकूल रहे। सभी में cytokine-release syndrome (CRS) हुआ, लेकिन रिपोर्ट के अनुसार चार मामले Grade 1 और दो Grade 2 के थे—अर्थात घटनाएं हल्की से मध्यम श्रेणी की थीं। 5 शुरुआती आंकड़ों में high-grade CRS या immune-effector-cell-associated neurotoxicity syndrome (ICANS) की रिपोर्ट नहीं हुई।
3
38
ये संकेत आश्वस्त करते हैं, लेकिन निर्णायक नहीं हैं। केवल छह मरीजों में गंभीर CRS न दिखने से बड़े समूह में उसका वास्तविक जोखिम खत्म नहीं हो जाता। इतने छोटे sample में दुर्लभ, लेकिन गंभीर complications का भरोसेमंद आकलन नहीं किया जा सकता।
लंबे समय तक B कोशिकाओं की कमी रहने पर infection risk, immunoglobulin का कम स्तर यानी hypogammaglobulinemia, vaccine response में कमी और अन्य देर से सामने आने वाले प्रभावों की चिंता बनी रहती है। CAR-T अध्ययनों में संक्रमण को उपचार के बाद महत्वपूर्ण चिंता के रूप में रेखांकित किया गया है। 21 इन जोखिमों को समझने के लिए लंबे समय तक immunoglobulin, संक्रमण, B-cell reconstitution और संभावित retreatment की निगरानी जरूरी होगी।
COMPARE के अगले चरण में मिव-सेल की तुलना rituximab से की जाएगी। रिटुक्सिमैब एक स्थापित anti-CD20 B-cell-depleting उपचार है। अध्ययन केवल joint symptoms या disease activity की तुलना नहीं करेगा, बल्कि B कोशिकाओं के depletion की गहराई, वापस लौटने वाली कोशिकाओं की संरचना और इस प्रभाव की अवधि भी देखेगा। 7
15
यह तुलना इसलिए उपयोगी है क्योंकि antibody-positive RA में रिटुक्सिमैब पहले से एक प्रासंगिक benchmark है। उपलब्ध पुराने आंकड़ों में seropositive मरीजों—जिनमें ACPA-पॉजिटिव मरीज भी शामिल हैं—ने seronegative मरीजों की तुलना में रिटुक्सिमैब पर आम तौर पर बेहतर प्रतिक्रिया दी है। 29
31
मुख्य सवाल यह होगा कि क्या CD19 को CAR-T कोशिकाओं के जरिए निशाना बनाने से anti-CD20 उपचार की तुलना में अधिक गहरी या अधिक टिकाऊ remission मिलती है। दूसरा सवाल यह है कि क्या मिव-सेल बीमारी से जुड़े autoantibodies को अधिक पूर्ण रूप से घटा सकता है।
अभी ऐसा निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। Trial registry में ACPA seroconversion को outcome के रूप में शामिल किया गया है—इसे Week 16 पर ACPA स्तर 20 mU/ml से कम होने के रूप में परिभाषित किया गया है। 32
भविष्य में ACPA seroconversion उपयोगी biomarker साबित हो सकता है, यदि बड़े अध्ययनों में यह लगातार और विश्वसनीय रूप से clinically meaningful तथा लंबे समय तक टिकने वाले सुधार से जुड़ा मिले। लेकिन छोटे शुरुआती trial में biomarker का बदलना अपने-आप में FDA-स्वीकृत surrogate या accelerated approval का आधार नहीं बनता। इसके लिए व्यापक और confirmatory evidence की जरूरत होगी।
COMPARE Phase 1 ने छह अत्यंत उपचार-प्रतिरोधी, ACPA-पॉजिटिव RA मरीजों में मिव-सेल की एक खुराक के बाद clinical और immunological सुधार का मजबूत शुरुआती संकेत दिया। गहरी B-cell depletion, autoantibody में कमी और naïve B-cell-dominant recovery संभावित immune reset की परिकल्पना से मेल खाते हैं।
लेकिन अभी सबसे महत्वपूर्ण सवाल खुले हैं: लाभ कितने समय तक टिकेगा, क्या मिव-सेल रिटुक्सिमैब से बेहतर है, लंबे समय में प्रतिरक्षा-संबंधी जोखिम कितने हैं और किन मरीजों को सबसे अधिक लाभ होगा। इसलिए यह उपचार आशाजनक जरूर है, पर अभी सिद्ध, curative या standard RA therapy का विकल्प नहीं माना जा सकता।
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छह गंभीर, उपचार प्रतिरोधी और ACPA पॉजिटिव रूमेटॉयड आर्थराइटिस मरीजों में लिम्फोडिप्लीशन के बाद मिव सेल की एक खुराक से बीमारी की गतिविधि में उल्लेखनीय कमी आई; तीन मरीज निगरानी अवधि के अंत तक RA की दवा मुक्त रहे। [1]
छह गंभीर, उपचार प्रतिरोधी और ACPA पॉजिटिव रूमेटॉयड आर्थराइटिस मरीजों में लिम्फोडिप्लीशन के बाद मिव सेल की एक खुराक से बीमारी की गतिविधि में उल्लेखनीय कमी आई; तीन मरीज निगरानी अवधि के अंत तक RA की दवा मुक्त रहे। [1] मिव सेल ने B कोशिकाओं को गहराई से कम किया और ACPA तथा रूमेटॉयड फैक्टर एंटीबॉडी में 90% से अधिक की औसत कमी देखी गई। वापस लौटने वाली B कोशिकाएं मुख्यतः naïve थीं—यह ‘इम्यून रीसेट’ की संभावना से मेल खाता है, लेकिन इसे स्...
अगले चरण में मिव सेल की तुलना रिटुक्सिमैब से की जाएगी, ताकि पता चल सके कि CAR T उपचार अधिक गहरी या लंबे समय तक टिकने वाली प्रतिक्रिया देता है या नहीं और ACPA seroconversion उपयोगी नियामकीय biomarker बन सकता है या नहीं...
छह गंभीर, उपचार प्रतिरोधी और ACPA पॉजिटिव रूमेटॉयड आर्थराइटिस मरीजों में लिम्फोडिप्लीशन के बाद मिव सेल की एक खुराक से बीमारी की गतिविधि में उल्लेखनीय कमी आई; तीन मरीज निगरानी अवधि के अंत तक RA की दवा मुक्त रहे। [1] मिव सेल ने B कोशिकाओं को गहराई से कम किया और ACPA तथा रूमेटॉयड फैक्टर एंटीबॉडी में 90% से अधिक की औसत...
प्रकाशितकर्ताGPT-5.6 Luna से संपादितGPT Image 1.5 से चित्र बनाए गए
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Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: What did the Phase 1 COMPARE trial published in Nature Medicine on August 27, 2026, show about repurposing the fully human CD19-targeting CA. Article summary: The Phase 1 findings are promising but preliminary: after lymphodepleting chemotherapy and one miv-cel infusion, six highly treatment-refractory, ACPA-positive adults reportedly had substantial reductions in RA activity,. Topic tags: general, general web, academic, government, education. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, watermark
COMPARE Phase 1 के नतीजे गंभीर रूमेटॉयड आर्थराइटिस (RA) में CD19 CAR-T सेल थेरेपी के इस्तेमाल की उत्साहजनक, लेकिन शुरुआती तस्वीर पेश करते हैं। इस अध्ययन में छह वयस्कों को शामिल किया गया था। सभी में सक्रिय, ACPA-पॉजिटिव बीमारी थी और कई biologic या targeted उपचारों के बावजूद RA नियंत्रित नहीं हो पाया था।
मरीजों को पहले lymphodepleting chemotherapy दी गई—यानी ऐसी कीमोथेरेपी, जो शरीर की मौजूदा प्रतिरक्षा कोशिकाओं को अस्थायी रूप से कम करती है। इसके बाद mivocabtagene autoleucel, जिसे miv-cel या KYV-101 भी कहा जाता है, की एक बार की infusion दी गई। सभी छह मरीजों में बीमारी की गतिविधि में पर्याप्त कमी देखी गई और निगरानी अवधि के अंत तक तीन मरीज RA की दवाओं से मुक्त थे। 1
यह परिणाम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि ये मरीज सामान्य उपचार से आसानी से नियंत्रित होने वाली बीमारी वाले नहीं थे। फिर भी, छह मरीजों का छोटा, open-label और बिना control group वाला अध्ययन यह साबित नहीं करता कि मिव-सेल बीमारी को हमेशा के लिए ठीक कर देता है, मौजूदा उपचारों से अधिक सुरक्षित है या standard B-cell depletion की जगह लेने के लिए तैयार है।
मिव-सेल एक autologous, fully human CAR-T थेरेपी है, जो CD19 नामक marker वाली B कोशिकाओं को निशाना बनाती है। B कोशिकाएं एंटीबॉडी बनाने और autoimmune बीमारी की प्रक्रिया में भूमिका निभा सकती हैं। इस उपचार का उद्देश्य सामान्य B-cell depletion की तुलना में बीमारी से जुड़ी B कोशिकाओं को अधिक व्यापक रूप से हटाना और फिर प्रतिरक्षा तंत्र को नए सिरे से बनने का अवसर देना है।
अध्ययन में उपचार के बाद रक्त में B कोशिकाओं की संख्या बहुत कम हो गई। जब ये कोशिकाएं दोबारा लौटने लगीं, तो उनमें मुख्य रूप से naïve B cells थीं—ऐसी अपेक्षाकृत शुरुआती कोशिकाएं, जो पहले से परिपक्व autoreactive B-cell repertoire की सीधी बहाली जैसी नहीं दिखतीं। शोधकर्ताओं ने इस पैटर्न को संभावित immune reset के अनुरूप माना: रोगकारी B कोशिकाएं हटें और उनकी जगह कम-विभेदित कोशिकाओं से प्रतिरक्षा तंत्र का पुनर्गठन हो। 3
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जैविक संकेतों ने इस संभावना को कुछ समर्थन दिया। ACPA और rheumatoid factor के विभिन्न isotypes में तेज और उल्लेखनीय कमी आई। रिपोर्ट में autoantibodies की median कमी 90% से अधिक बताई गई, जबकि updated presentation में चार मरीजों में ACPA का स्तर लगातार सामान्य सीमा में रहा। 3
35 हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि ACPA का खत्म होना हर मरीज में स्थायी clinical remission की भविष्यवाणी कर सकता है।
सभी छह मरीजों में RA disease activity कम हुई। उनमें tender और swollen joints की संख्या तथा joint inflammation में कमी देखी गई। 1
36 Updated reports में Week 36 तक 66.6% ACR70 response भी बताई गई, लेकिन यह केवल छह में से चार मरीजों के अनुरूप है। इसलिए इसे पूरे RA population के लिए निश्चित response rate नहीं माना जाना चाहिए।
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तीन मरीज observation period के अंत तक RA की दवाओं से मुक्त थे। 1 एक बार के उपचार से drug-free remission की यह संभावना proof-of-concept के रूप में महत्वपूर्ण है। लेकिन तुलना समूह न होने के कारण यह अलग करना संभव नहीं है कि लाभ lymphodepletion, CAR-T कोशिकाओं, background medication में बदलाव या गंभीर RA की स्वाभाविक उतार-चढ़ाव वाली प्रवृत्ति में से किस वजह से आया।
साथ ही, प्रतिक्रिया सभी मरीजों में समान या स्थायी हो, ऐसा अभी नहीं कहा जा सकता। लंबी निगरानी से पता चलेगा कि कितने मरीजों में बीमारी लौटती है, B-cell recovery का relapse से क्या संबंध है और relapse होने पर दोबारा उपचार सुरक्षित रूप से दिया जा सकता है या नहीं।
छह मरीजों के इस छोटे cohort में शुरुआती safety findings अपेक्षाकृत अनुकूल रहे। सभी में cytokine-release syndrome (CRS) हुआ, लेकिन रिपोर्ट के अनुसार चार मामले Grade 1 और दो Grade 2 के थे—अर्थात घटनाएं हल्की से मध्यम श्रेणी की थीं। 5 शुरुआती आंकड़ों में high-grade CRS या immune-effector-cell-associated neurotoxicity syndrome (ICANS) की रिपोर्ट नहीं हुई।
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ये संकेत आश्वस्त करते हैं, लेकिन निर्णायक नहीं हैं। केवल छह मरीजों में गंभीर CRS न दिखने से बड़े समूह में उसका वास्तविक जोखिम खत्म नहीं हो जाता। इतने छोटे sample में दुर्लभ, लेकिन गंभीर complications का भरोसेमंद आकलन नहीं किया जा सकता।
लंबे समय तक B कोशिकाओं की कमी रहने पर infection risk, immunoglobulin का कम स्तर यानी hypogammaglobulinemia, vaccine response में कमी और अन्य देर से सामने आने वाले प्रभावों की चिंता बनी रहती है। CAR-T अध्ययनों में संक्रमण को उपचार के बाद महत्वपूर्ण चिंता के रूप में रेखांकित किया गया है। 21 इन जोखिमों को समझने के लिए लंबे समय तक immunoglobulin, संक्रमण, B-cell reconstitution और संभावित retreatment की निगरानी जरूरी होगी।
COMPARE के अगले चरण में मिव-सेल की तुलना rituximab से की जाएगी। रिटुक्सिमैब एक स्थापित anti-CD20 B-cell-depleting उपचार है। अध्ययन केवल joint symptoms या disease activity की तुलना नहीं करेगा, बल्कि B कोशिकाओं के depletion की गहराई, वापस लौटने वाली कोशिकाओं की संरचना और इस प्रभाव की अवधि भी देखेगा। 7
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यह तुलना इसलिए उपयोगी है क्योंकि antibody-positive RA में रिटुक्सिमैब पहले से एक प्रासंगिक benchmark है। उपलब्ध पुराने आंकड़ों में seropositive मरीजों—जिनमें ACPA-पॉजिटिव मरीज भी शामिल हैं—ने seronegative मरीजों की तुलना में रिटुक्सिमैब पर आम तौर पर बेहतर प्रतिक्रिया दी है। 29
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मुख्य सवाल यह होगा कि क्या CD19 को CAR-T कोशिकाओं के जरिए निशाना बनाने से anti-CD20 उपचार की तुलना में अधिक गहरी या अधिक टिकाऊ remission मिलती है। दूसरा सवाल यह है कि क्या मिव-सेल बीमारी से जुड़े autoantibodies को अधिक पूर्ण रूप से घटा सकता है।
अभी ऐसा निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। Trial registry में ACPA seroconversion को outcome के रूप में शामिल किया गया है—इसे Week 16 पर ACPA स्तर 20 mU/ml से कम होने के रूप में परिभाषित किया गया है। 32
भविष्य में ACPA seroconversion उपयोगी biomarker साबित हो सकता है, यदि बड़े अध्ययनों में यह लगातार और विश्वसनीय रूप से clinically meaningful तथा लंबे समय तक टिकने वाले सुधार से जुड़ा मिले। लेकिन छोटे शुरुआती trial में biomarker का बदलना अपने-आप में FDA-स्वीकृत surrogate या accelerated approval का आधार नहीं बनता। इसके लिए व्यापक और confirmatory evidence की जरूरत होगी।
COMPARE Phase 1 ने छह अत्यंत उपचार-प्रतिरोधी, ACPA-पॉजिटिव RA मरीजों में मिव-सेल की एक खुराक के बाद clinical और immunological सुधार का मजबूत शुरुआती संकेत दिया। गहरी B-cell depletion, autoantibody में कमी और naïve B-cell-dominant recovery संभावित immune reset की परिकल्पना से मेल खाते हैं।
लेकिन अभी सबसे महत्वपूर्ण सवाल खुले हैं: लाभ कितने समय तक टिकेगा, क्या मिव-सेल रिटुक्सिमैब से बेहतर है, लंबे समय में प्रतिरक्षा-संबंधी जोखिम कितने हैं और किन मरीजों को सबसे अधिक लाभ होगा। इसलिए यह उपचार आशाजनक जरूर है, पर अभी सिद्ध, curative या standard RA therapy का विकल्प नहीं माना जा सकता।
Studio Global AI
इस पृष्ठ में एक स्रोत-समर्थित उत्तर शामिल है जिसे आप Studio Global के अंदर जारी रख सकते हैं।
छह गंभीर, उपचार प्रतिरोधी और ACPA पॉजिटिव रूमेटॉयड आर्थराइटिस मरीजों में लिम्फोडिप्लीशन के बाद मिव सेल की एक खुराक से बीमारी की गतिविधि में उल्लेखनीय कमी आई; तीन मरीज निगरानी अवधि के अंत तक RA की दवा मुक्त रहे। [1]
छह गंभीर, उपचार प्रतिरोधी और ACPA पॉजिटिव रूमेटॉयड आर्थराइटिस मरीजों में लिम्फोडिप्लीशन के बाद मिव सेल की एक खुराक से बीमारी की गतिविधि में उल्लेखनीय कमी आई; तीन मरीज निगरानी अवधि के अंत तक RA की दवा मुक्त रहे। [1] मिव सेल ने B कोशिकाओं को गहराई से कम किया और ACPA तथा रूमेटॉयड फैक्टर एंटीबॉडी में 90% से अधिक की औसत कमी देखी गई। वापस लौटने वाली B कोशिकाएं मुख्यतः naïve थीं—यह ‘इम्यून रीसेट’ की संभावना से मेल खाता है, लेकिन इसे स्...
अगले चरण में मिव सेल की तुलना रिटुक्सिमैब से की जाएगी, ताकि पता चल सके कि CAR T उपचार अधिक गहरी या लंबे समय तक टिकने वाली प्रतिक्रिया देता है या नहीं और ACPA seroconversion उपयोगी नियामकीय biomarker बन सकता है या नहीं...