पूर्वी हिंद महासागर में मॉनसून राइज़ समुद्र के भीतर पर्वतों का एक ऐसा समूह है जिसके जीव-जंतुओं के बारे में अब तक बहुत कम जानकारी थी। सिंगापुर के राष्ट्रीय विश्वविद्यालय (NUS) और समुद्री खोज से जुड़ी गैर-लाभकारी संस्था OceanX के संयुक्त अभियान ने यहाँ समुद्र तल का नक्शा बनाया, जीवों को देखा और उनके नमूने जुटाए। यह क्षेत्र की जैव-विविधता की शुरुआती तस्वीर है, अंतिम सूची नहीं।
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क्या मिला—और क्या अभी पता लगना बाकी है?
अभियान ने 6,050 वर्ग किलोमीटर समुद्र तल का नक्शा बनाया और 2,000 से अधिक नमूने शोध के लिए जुटाए। शुरुआती जाँच के अनुसार, कम से कम 20 प्रजातियाँ विज्ञान के लिए नई हो सकती हैं। ‘हो सकती हैं’ यहाँ अहम है: इन्हें अभी औपचारिक रूप से नई प्रजातियों के तौर पर पहचानकर वर्णित नहीं किया गया है।
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शोधकर्ताओं ने समुद्री पर्वतों की ढलानों पर प्रवाल और अन्य निडेरियन जीव देखे, जबकि समुद्र तल पर क्रस्टेशियन जीव भी मिले। समुद्री खीरे के 20 नमूने दिखाते हैं कि पहचान का काम कितना पेचीदा है: चार को प्रजाति के स्तर तक भरोसे के साथ पहचाना जा सका; 10 संभवतः पहले मिल चुकी, लेकिन अब भी अनसुलझी प्रजातियों के हैं; और छह ऐसे जीवों के हो सकते हैं जिन्हें शोधकर्ताओं ने पहले नहीं देखा था। ये छह नमूने छह पुष्ट नई प्रजातियाँ नहीं हैं।
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इतनी गहराई की पड़ताल कैसे हुई?
शोध पोत OceanXplorer पर लगे सोनार ने समुद्र तल का व्यापक नक्शा बनाने में मदद की। पोत की प्रयोगशालाओं में नमूनों का अध्ययन किया गया, जबकि मानव-सवार पनडुब्बियों से शोधकर्ता आवासों को सीधे देख सके। कैमरों, सेंसरों और नमूने लेने के उपकरणों से लैस दूर से संचालित वाहन Chimera 6,000 मीटर से अधिक गहराई तक जाकर जाँच और संग्रह कर सकता था।
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केवल दिखाई देने या पकड़े जा सकने वाले जीवों पर निर्भर रहने के बजाय टीम पानी और तलछट के नमूनों में पर्यावरणीय डीएनए भी जाँच रही है। ये जीवों के छोड़े आनुवंशिक संकेत हैं। शुरुआती विश्लेषण में ऐसे जीवों के संकेत मिले हैं जिनके भौतिक नमूने पोत पर नहीं लाए गए थे। इससे कैमरों और संग्रह से मिली जानकारी का दायरा बढ़ता है।
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इस शुरुआती रिकॉर्ड का क्या उपयोग है?
नक्शे, प्रत्यक्ष अवलोकन, नमूने और डीएनए रिकॉर्ड मिलकर मॉनसून राइज़ के आवासों और जीवों का एक आधारभूत रिकॉर्ड बनाते हैं। भविष्य में दोबारा सर्वेक्षण होने पर वैज्ञानिक इससे तुलना कर पारिस्थितिकी तंत्र में बदलाव खोज सकेंगे। यह जानकारी मछली पकड़ने और क्षेत्र के अन्य उपयोगों पर निर्णय लेने में भी मदद कर सकती है—हालाँकि इससे यह साबित नहीं होता कि कोई विशेष प्रबंधन उपाय पहले ही लागू हो चुका है। संभावित नई प्रजातियों की पुष्टि के लिए आगे विस्तृत जाँच और तुलना ज़रूरी होगी।
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