12 अगस्त 2026 को Nature में ऑनलाइन प्रकाशित अध्ययन में 0.72 वर्गमीटर के सिंगल जंक्शन पेरोव्स्काइट मॉड्यूल ने 22.0% प्रमाणित फुल एरिया दक्षता और 158.4 वाट का स्थिर आउटपुट दिया। निर्माण प्रक्रिया में 2 मेथॉक्सीएथेनॉल, 1,3 डाइऑक्सोलेन और डाइमिथाइल सल्फॉक्साइड (DMSO) की त्रि विलायक प्रणाली, वैक्यूम असिस्टेड क्रिस्टलीकरण...
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शोध उत्तर

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: What did the Nanjing University team led by Xiao Ke and Hairen Tan, working with Renshine, achieve in their Nature paper published online on. Article summary: The team demonstrated a commercially relevant, meter-scale single-junction perovskite module: a 0.72 m² module certified at 22.0% full-area efficiency and delivering 158.4 W steady-state output. It is a major scale-up re. Topic tags: general, education, general web, academic, user generated. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, water
नानजिंग यूनिवर्सिटी के Xiao Ke और Hairen Tan के नेतृत्व वाली टीम ने Renshine के साथ मिलकर पेरोव्स्काइट सौर तकनीक को छोटे प्रयोगशाला-सेलों से बड़े, मीटर-स्तरीय मॉड्यूल की दिशा में आगे बढ़ाने वाली उपलब्धि दर्ज की है। Nature में 12 अगस्त 2026 को ऑनलाइन प्रकाशित अध्ययन में उनकी लेड-कार्बोक्सिलेट पैसिवेशन रणनीति से 0.72 वर्गमीटर के सिंगल-जंक्शन मॉड्यूल में 22.0% प्रमाणित फुल-एरिया दक्षता और 158.4 वाट का स्थिर-स्थिति आउटपुट हासिल किया गया। 10
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यह परिणाम इसलिए अहम है क्योंकि छोटे क्षेत्रफल वाले सेल में ऊंची दक्षता हासिल करना अपेक्षाकृत आसान होता है, जबकि बड़े मॉड्यूल में पूरी सतह पर एकसमान फिल्म, कम दोष और विश्वसनीय प्रदर्शन बनाए रखना कठिन होता है। हालांकि उपलब्ध स्रोत मुख्य मॉड्यूल परिणामों को स्पष्ट रूप से समर्थन देते हैं, लेकिन क्षेत्रीय उत्पादन, ऐतिहासिक तुलना और हर परिस्थिति में बेहतर टिकाऊपन से जुड़े कुछ व्यापक दावों के लिए पर्याप्त प्राथमिक आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं।
टीम ने शुरुआत एक त्रि-विलायक प्रीकर्सर प्रणाली से की, जिसमें शामिल थे:
इस मिश्रण को वैक्यूम-असिस्टेड क्रिस्टलीकरण प्रक्रिया के साथ इस्तेमाल कर पेरोव्स्काइट फिल्म तैयार की गई। नानजिंग यूनिवर्सिटी के उपलब्ध विवरण के अनुसार, इस प्रक्रिया से फिल्म की सतह पर फॉर्मामिडिनियम आयोडाइड (FAI) से समृद्ध एक सुरक्षात्मक आधार-परत स्वतः बनी। इसके बाद सतह पर लेड-कार्बोक्सिलेट पैसिवेटर लगाया गया। 1
इस दो-चरणीय डिजाइन में पहला चरण फिल्म की सतह को तैयार करता है, जबकि दूसरा चरण सतह के दोषों को निष्क्रिय करने और पेरोव्स्काइट तथा उससे जुड़ी चार्ज-ट्रांसपोर्ट परतों के बीच इंटरफेस को बेहतर बनाने के लिए है। उपलब्ध रिपोर्टों में इस्तेमाल किए गए लेड-कार्बोक्सिलेट पैसिवेटरों में लेड डाइओलियेट, यानी Pb(OA)₂, का उल्लेख है। 5
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अध्ययन में अलग-अलग आकार के मॉड्यूल के लिए दो प्रमुख परिणाम बताए गए हैं:
0.72 वर्गमीटर वाले मॉड्यूल ने मानक परीक्षण परिस्थितियों में 158.4 वाट का स्थिर-स्थिति विद्युत उत्पादन भी दर्ज किया। 5
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यहां एपर्चर एरिया और फुल एरिया का अंतर समझना जरूरी है। 24.0% का आंकड़ा छोटे मॉड्यूल के सक्रिय एपर्चर क्षेत्र से जुड़ा है, जबकि 22.0% बड़े मॉड्यूल के पूरे क्षेत्रफल पर आधारित है। इसलिए दोनों आंकड़ों को एक ही तरह का माप मानकर सीधे तुलना नहीं करनी चाहिए।
पेरोव्स्काइट फिल्मों में मौजूद सूक्ष्म दोष और रासायनिक रूप से संवेदनशील इंटरफेस चार्ज के पुनर्संयोजन तथा ऊर्जा-हानि का कारण बन सकते हैं। छोटे सेल पर पैसिवेशन की एकसमान परत लगाना आसान है, लेकिन लगभग एक वर्गमीटर की सतह पर यही काम समान गुणवत्ता के साथ करना चुनौतीपूर्ण होता है।
उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, लेड-कार्बोक्सिलेट पैसिवेशन पारंपरिक अमोनियम-आधारित पैसिवेशन से रासायनिक रूप से अलग तरीके से काम करता है। रिपोर्टों में कहा गया है कि यह केवल सतह पर एक सामान्य कोटिंग नहीं बनाता, बल्कि पेरोव्स्काइट सतह के साथ रासायनिक बंध बनाता है। इससे इंटरफेस पर ऊर्जा-स्तरों का बेहतर मेल, चार्ज परिवहन और बड़े मॉड्यूल पर उपचार की एकरूपता सुधरने की बात कही गई है। 15
ये दावे इस बात की संभावित व्याख्या देते हैं कि यह तरीका बड़े क्षेत्रफल तक क्यों बढ़ाया जा सकता है। फिर भी उपलब्ध स्रोतों में अमोनियम-हैलाइड पैसिवेटरों के साथ पूर्ण मात्रात्मक तुलना नहीं दी गई है। नमी, गर्मी, लगातार प्रकाश और थर्मल साइक्लिंग जैसी अलग-अलग परिस्थितियों में क्षरण के विस्तृत आंकड़े भी उपलब्ध सामग्री में अलग से नहीं दिए गए हैं। इसलिए सबसे मजबूत प्रमाण स्वयं मॉड्यूल की दक्षता और विश्वसनीयता-परीक्षणों में प्रदर्शन है, न कि हर तनाव-स्थिति में व्यापक श्रेष्ठता का दावा।
रिपोर्टों के अनुसार, मॉड्यूल ने IEC 61215 और IEC 61730 की पूरी विश्वसनीयता-परीक्षण श्रृंखला पास की। IEC 61215 मॉड्यूल के डिजाइन और दीर्घकालिक प्रदर्शन से जुड़े परीक्षणों के लिए, जबकि IEC 61730 सुरक्षा योग्यताओं के लिए इस्तेमाल होने वाला अंतरराष्ट्रीय मानक है। इन परीक्षणों का पास होना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि परिणाम केवल दक्षता माप तक सीमित नहीं रहते, बल्कि मॉड्यूल की विश्वसनीयता और सुरक्षा को भी संबोधित करते हैं। 1
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एक रिपोर्ट में कहा गया है कि अधिकतम-पावर-पॉइंट ट्रैकिंग के 2,200 घंटे बाद मॉड्यूल ने अपनी शुरुआती दक्षता का 96% बनाए रखा। 4 यह टिकाऊपन का उपयोगी संकेतक है, लेकिन उपलब्ध सामग्री में परीक्षण की सभी परिस्थितियां इतनी विस्तार से नहीं दी गई हैं कि इसकी तुलना समान परिस्थितियों में परीक्षण किए गए पारंपरिक सिलिकॉन मॉड्यूल से की जा सके।
कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि बड़े ग्राउंड-माउंटेड प्रदर्शन परीक्षणों में पेरोव्स्काइट मॉड्यूल ने समान स्थान पर लगाए गए क्रिस्टलीय-सिलिकॉन मॉड्यूल की तुलना में प्रति यूनिट क्षमता अधिक बिजली पैदा की। 11
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हालांकि उपलब्ध साक्ष्य उस विस्तृत मार्च–मई 2026 तुलना की पुष्टि नहीं करते जिसमें 1 मेगावाट के पेरोव्स्काइट संयंत्र और 3.5 मेगावाट के सिलिकॉन संयंत्र के उत्पादन का आमना-सामना करने का दावा किया गया है। मासिक प्रति-क्षमता उत्पादन के आंकड़े भी उपलब्ध नहीं हैं। इसी तरह, तापमान और प्रकाश की तीव्रता के साथ किसी कथित लाभ में कितना बदलाव आया, यह भी मात्रात्मक रूप से स्थापित नहीं होता।
इसलिए सावधानीपूर्वक निष्कर्ष यही है कि उपलब्ध स्रोत प्रति-क्षमता फील्ड उत्पादन में पेरोव्स्काइट मॉड्यूल के पक्ष में संकेत देते हैं, लेकिन महीने-दर-महीने तुलना और मौसम संबंधी प्रभावों का पूरा सत्यापन करने के लिए अधिक प्राथमिक आंकड़ों की जरूरत है।
Nature में प्रकाशित यह काम मुख्य रूप से बड़े क्षेत्रफल वाले मॉड्यूल और प्रक्रिया-एकीकरण की उपलब्धि है। इसकी तुलना छोटे सेल, टैंडम डिवाइस या अलग-अलग मॉड्यूल-क्षेत्र पर आधारित हर दक्षता रिकॉर्ड से सीधे नहीं की जा सकती।
उपलब्ध सामग्री टीम के पहले 17.2% दक्षता वाले Science परिणाम के साथ मांगी गई तुलना की पुष्टि नहीं करती। इसी तरह, चीनी विज्ञान अकादमी से जुड़े बताए गए 28.04% प्रमाणित पेरोव्स्काइट–ऑर्गेनिक टैंडम रिकॉर्ड को भी इस साक्ष्य-समूह से स्थापित नहीं किया जा सकता। इसलिए इन दावों को वर्तमान मॉड्यूल परिणाम की महत्ता में शामिल करने के बजाय अपुष्ट मानना अधिक उचित है।
मुख्य उपलब्धि स्पष्ट है: नानजिंग यूनिवर्सिटी और Renshine ने 2-मेथॉक्सीएथेनॉल/1,3-डाइऑक्सोलेन/DMSO आधारित विलायक प्रणाली, वैक्यूम-असिस्टेड क्रिस्टलीकरण और लेड-कार्बोक्सिलेट पैसिवेशन को मिलाकर 0.72 वर्गमीटर का पेरोव्स्काइट मॉड्यूल तैयार किया, जिसकी 22.0% प्रमाणित फुल-एरिया दक्षता और 158.4 वाट का स्थिर आउटपुट था। छोटे मॉड्यूल ने 24.0% प्रमाणित दक्षता हासिल की, जबकि मॉड्यूल ने IEC 61215 और IEC 61730 परीक्षण भी पास किए। 1
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यह मीटर-स्केल पेरोव्स्काइट मॉड्यूल के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति है। लेकिन तुलनात्मक क्षरण, फील्ड आउटपुट, तापमान और प्रकाश-तीव्रता के प्रभाव, पुराने रिकॉर्ड तथा टैंडम बेंचमार्क से जुड़े व्यापक निष्कर्षों के लिए पूरा शोध-पत्र या अतिरिक्त प्राथमिक डेटा जरूरी होगा।
Studio Global AI
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12 अगस्त 2026 को Nature में ऑनलाइन प्रकाशित अध्ययन में 0.72 वर्गमीटर के सिंगल जंक्शन पेरोव्स्काइट मॉड्यूल ने 22.0% प्रमाणित फुल एरिया दक्षता और 158.4 वाट का स्थिर आउटपुट दिया।
12 अगस्त 2026 को Nature में ऑनलाइन प्रकाशित अध्ययन में 0.72 वर्गमीटर के सिंगल जंक्शन पेरोव्स्काइट मॉड्यूल ने 22.0% प्रमाणित फुल एरिया दक्षता और 158.4 वाट का स्थिर आउटपुट दिया। निर्माण प्रक्रिया में 2 मेथॉक्सीएथेनॉल, 1,3 डाइऑक्सोलेन और डाइमिथाइल सल्फॉक्साइड (DMSO) की त्रि विलायक प्रणाली, वैक्यूम असिस्टेड क्रिस्टलीकरण और फॉर्मामिडिनियम आयोडाइड समृद्ध सतह का इस्तेमाल हुआ।
छोटे 810 वर्ग सेंटीमीटर मॉड्यूल ने 24.0% प्रमाणित दक्षता हासिल की। एक रिपोर्ट के अनुसार, 2,200 घंटे के अधिकतम पावर पॉइंट ट्रैकिंग परीक्षण के बाद प्रारंभिक दक्षता का 96% बरकरार रहा; हालांकि उपलब्ध सामग्री पूर्ण तुलनात्...
12 अगस्त 2026 को Nature में ऑनलाइन प्रकाशित अध्ययन में 0.72 वर्गमीटर के सिंगल जंक्शन पेरोव्स्काइट मॉड्यूल ने 22.0% प्रमाणित फुल एरिया दक्षता और 158.4 वाट का स्थिर आउटपुट दिया। निर्माण प्रक्रिया में 2 मेथॉक्सीएथेनॉल, 1,3 डाइऑक्सोलेन और डाइमिथाइल सल्फॉक्साइड (DMSO) की त्रि विलायक प्रणाली, वैक्यूम असिस्टेड क्रिस्टलीकरण...
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Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: What did the Nanjing University team led by Xiao Ke and Hairen Tan, working with Renshine, achieve in their Nature paper published online on. Article summary: The team demonstrated a commercially relevant, meter-scale single-junction perovskite module: a 0.72 m² module certified at 22.0% full-area efficiency and delivering 158.4 W steady-state output. It is a major scale-up re. Topic tags: general, education, general web, academic, user generated. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, water
नानजिंग यूनिवर्सिटी के Xiao Ke और Hairen Tan के नेतृत्व वाली टीम ने Renshine के साथ मिलकर पेरोव्स्काइट सौर तकनीक को छोटे प्रयोगशाला-सेलों से बड़े, मीटर-स्तरीय मॉड्यूल की दिशा में आगे बढ़ाने वाली उपलब्धि दर्ज की है। Nature में 12 अगस्त 2026 को ऑनलाइन प्रकाशित अध्ययन में उनकी लेड-कार्बोक्सिलेट पैसिवेशन रणनीति से 0.72 वर्गमीटर के सिंगल-जंक्शन मॉड्यूल में 22.0% प्रमाणित फुल-एरिया दक्षता और 158.4 वाट का स्थिर-स्थिति आउटपुट हासिल किया गया। 10
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यह परिणाम इसलिए अहम है क्योंकि छोटे क्षेत्रफल वाले सेल में ऊंची दक्षता हासिल करना अपेक्षाकृत आसान होता है, जबकि बड़े मॉड्यूल में पूरी सतह पर एकसमान फिल्म, कम दोष और विश्वसनीय प्रदर्शन बनाए रखना कठिन होता है। हालांकि उपलब्ध स्रोत मुख्य मॉड्यूल परिणामों को स्पष्ट रूप से समर्थन देते हैं, लेकिन क्षेत्रीय उत्पादन, ऐतिहासिक तुलना और हर परिस्थिति में बेहतर टिकाऊपन से जुड़े कुछ व्यापक दावों के लिए पर्याप्त प्राथमिक आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं।
टीम ने शुरुआत एक त्रि-विलायक प्रीकर्सर प्रणाली से की, जिसमें शामिल थे:
इस मिश्रण को वैक्यूम-असिस्टेड क्रिस्टलीकरण प्रक्रिया के साथ इस्तेमाल कर पेरोव्स्काइट फिल्म तैयार की गई। नानजिंग यूनिवर्सिटी के उपलब्ध विवरण के अनुसार, इस प्रक्रिया से फिल्म की सतह पर फॉर्मामिडिनियम आयोडाइड (FAI) से समृद्ध एक सुरक्षात्मक आधार-परत स्वतः बनी। इसके बाद सतह पर लेड-कार्बोक्सिलेट पैसिवेटर लगाया गया। 1
इस दो-चरणीय डिजाइन में पहला चरण फिल्म की सतह को तैयार करता है, जबकि दूसरा चरण सतह के दोषों को निष्क्रिय करने और पेरोव्स्काइट तथा उससे जुड़ी चार्ज-ट्रांसपोर्ट परतों के बीच इंटरफेस को बेहतर बनाने के लिए है। उपलब्ध रिपोर्टों में इस्तेमाल किए गए लेड-कार्बोक्सिलेट पैसिवेटरों में लेड डाइओलियेट, यानी Pb(OA)₂, का उल्लेख है। 5
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अध्ययन में अलग-अलग आकार के मॉड्यूल के लिए दो प्रमुख परिणाम बताए गए हैं:
0.72 वर्गमीटर वाले मॉड्यूल ने मानक परीक्षण परिस्थितियों में 158.4 वाट का स्थिर-स्थिति विद्युत उत्पादन भी दर्ज किया। 5
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यहां एपर्चर एरिया और फुल एरिया का अंतर समझना जरूरी है। 24.0% का आंकड़ा छोटे मॉड्यूल के सक्रिय एपर्चर क्षेत्र से जुड़ा है, जबकि 22.0% बड़े मॉड्यूल के पूरे क्षेत्रफल पर आधारित है। इसलिए दोनों आंकड़ों को एक ही तरह का माप मानकर सीधे तुलना नहीं करनी चाहिए।
पेरोव्स्काइट फिल्मों में मौजूद सूक्ष्म दोष और रासायनिक रूप से संवेदनशील इंटरफेस चार्ज के पुनर्संयोजन तथा ऊर्जा-हानि का कारण बन सकते हैं। छोटे सेल पर पैसिवेशन की एकसमान परत लगाना आसान है, लेकिन लगभग एक वर्गमीटर की सतह पर यही काम समान गुणवत्ता के साथ करना चुनौतीपूर्ण होता है।
उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, लेड-कार्बोक्सिलेट पैसिवेशन पारंपरिक अमोनियम-आधारित पैसिवेशन से रासायनिक रूप से अलग तरीके से काम करता है। रिपोर्टों में कहा गया है कि यह केवल सतह पर एक सामान्य कोटिंग नहीं बनाता, बल्कि पेरोव्स्काइट सतह के साथ रासायनिक बंध बनाता है। इससे इंटरफेस पर ऊर्जा-स्तरों का बेहतर मेल, चार्ज परिवहन और बड़े मॉड्यूल पर उपचार की एकरूपता सुधरने की बात कही गई है। 15
ये दावे इस बात की संभावित व्याख्या देते हैं कि यह तरीका बड़े क्षेत्रफल तक क्यों बढ़ाया जा सकता है। फिर भी उपलब्ध स्रोतों में अमोनियम-हैलाइड पैसिवेटरों के साथ पूर्ण मात्रात्मक तुलना नहीं दी गई है। नमी, गर्मी, लगातार प्रकाश और थर्मल साइक्लिंग जैसी अलग-अलग परिस्थितियों में क्षरण के विस्तृत आंकड़े भी उपलब्ध सामग्री में अलग से नहीं दिए गए हैं। इसलिए सबसे मजबूत प्रमाण स्वयं मॉड्यूल की दक्षता और विश्वसनीयता-परीक्षणों में प्रदर्शन है, न कि हर तनाव-स्थिति में व्यापक श्रेष्ठता का दावा।
रिपोर्टों के अनुसार, मॉड्यूल ने IEC 61215 और IEC 61730 की पूरी विश्वसनीयता-परीक्षण श्रृंखला पास की। IEC 61215 मॉड्यूल के डिजाइन और दीर्घकालिक प्रदर्शन से जुड़े परीक्षणों के लिए, जबकि IEC 61730 सुरक्षा योग्यताओं के लिए इस्तेमाल होने वाला अंतरराष्ट्रीय मानक है। इन परीक्षणों का पास होना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि परिणाम केवल दक्षता माप तक सीमित नहीं रहते, बल्कि मॉड्यूल की विश्वसनीयता और सुरक्षा को भी संबोधित करते हैं। 1
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एक रिपोर्ट में कहा गया है कि अधिकतम-पावर-पॉइंट ट्रैकिंग के 2,200 घंटे बाद मॉड्यूल ने अपनी शुरुआती दक्षता का 96% बनाए रखा। 4 यह टिकाऊपन का उपयोगी संकेतक है, लेकिन उपलब्ध सामग्री में परीक्षण की सभी परिस्थितियां इतनी विस्तार से नहीं दी गई हैं कि इसकी तुलना समान परिस्थितियों में परीक्षण किए गए पारंपरिक सिलिकॉन मॉड्यूल से की जा सके।
कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि बड़े ग्राउंड-माउंटेड प्रदर्शन परीक्षणों में पेरोव्स्काइट मॉड्यूल ने समान स्थान पर लगाए गए क्रिस्टलीय-सिलिकॉन मॉड्यूल की तुलना में प्रति यूनिट क्षमता अधिक बिजली पैदा की। 11
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हालांकि उपलब्ध साक्ष्य उस विस्तृत मार्च–मई 2026 तुलना की पुष्टि नहीं करते जिसमें 1 मेगावाट के पेरोव्स्काइट संयंत्र और 3.5 मेगावाट के सिलिकॉन संयंत्र के उत्पादन का आमना-सामना करने का दावा किया गया है। मासिक प्रति-क्षमता उत्पादन के आंकड़े भी उपलब्ध नहीं हैं। इसी तरह, तापमान और प्रकाश की तीव्रता के साथ किसी कथित लाभ में कितना बदलाव आया, यह भी मात्रात्मक रूप से स्थापित नहीं होता।
इसलिए सावधानीपूर्वक निष्कर्ष यही है कि उपलब्ध स्रोत प्रति-क्षमता फील्ड उत्पादन में पेरोव्स्काइट मॉड्यूल के पक्ष में संकेत देते हैं, लेकिन महीने-दर-महीने तुलना और मौसम संबंधी प्रभावों का पूरा सत्यापन करने के लिए अधिक प्राथमिक आंकड़ों की जरूरत है।
Nature में प्रकाशित यह काम मुख्य रूप से बड़े क्षेत्रफल वाले मॉड्यूल और प्रक्रिया-एकीकरण की उपलब्धि है। इसकी तुलना छोटे सेल, टैंडम डिवाइस या अलग-अलग मॉड्यूल-क्षेत्र पर आधारित हर दक्षता रिकॉर्ड से सीधे नहीं की जा सकती।
उपलब्ध सामग्री टीम के पहले 17.2% दक्षता वाले Science परिणाम के साथ मांगी गई तुलना की पुष्टि नहीं करती। इसी तरह, चीनी विज्ञान अकादमी से जुड़े बताए गए 28.04% प्रमाणित पेरोव्स्काइट–ऑर्गेनिक टैंडम रिकॉर्ड को भी इस साक्ष्य-समूह से स्थापित नहीं किया जा सकता। इसलिए इन दावों को वर्तमान मॉड्यूल परिणाम की महत्ता में शामिल करने के बजाय अपुष्ट मानना अधिक उचित है।
मुख्य उपलब्धि स्पष्ट है: नानजिंग यूनिवर्सिटी और Renshine ने 2-मेथॉक्सीएथेनॉल/1,3-डाइऑक्सोलेन/DMSO आधारित विलायक प्रणाली, वैक्यूम-असिस्टेड क्रिस्टलीकरण और लेड-कार्बोक्सिलेट पैसिवेशन को मिलाकर 0.72 वर्गमीटर का पेरोव्स्काइट मॉड्यूल तैयार किया, जिसकी 22.0% प्रमाणित फुल-एरिया दक्षता और 158.4 वाट का स्थिर आउटपुट था। छोटे मॉड्यूल ने 24.0% प्रमाणित दक्षता हासिल की, जबकि मॉड्यूल ने IEC 61215 और IEC 61730 परीक्षण भी पास किए। 1
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यह मीटर-स्केल पेरोव्स्काइट मॉड्यूल के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति है। लेकिन तुलनात्मक क्षरण, फील्ड आउटपुट, तापमान और प्रकाश-तीव्रता के प्रभाव, पुराने रिकॉर्ड तथा टैंडम बेंचमार्क से जुड़े व्यापक निष्कर्षों के लिए पूरा शोध-पत्र या अतिरिक्त प्राथमिक डेटा जरूरी होगा।
Studio Global AI
इस पृष्ठ में एक स्रोत-समर्थित उत्तर शामिल है जिसे आप Studio Global के अंदर जारी रख सकते हैं।
12 अगस्त 2026 को Nature में ऑनलाइन प्रकाशित अध्ययन में 0.72 वर्गमीटर के सिंगल जंक्शन पेरोव्स्काइट मॉड्यूल ने 22.0% प्रमाणित फुल एरिया दक्षता और 158.4 वाट का स्थिर आउटपुट दिया।
12 अगस्त 2026 को Nature में ऑनलाइन प्रकाशित अध्ययन में 0.72 वर्गमीटर के सिंगल जंक्शन पेरोव्स्काइट मॉड्यूल ने 22.0% प्रमाणित फुल एरिया दक्षता और 158.4 वाट का स्थिर आउटपुट दिया। निर्माण प्रक्रिया में 2 मेथॉक्सीएथेनॉल, 1,3 डाइऑक्सोलेन और डाइमिथाइल सल्फॉक्साइड (DMSO) की त्रि विलायक प्रणाली, वैक्यूम असिस्टेड क्रिस्टलीकरण और फॉर्मामिडिनियम आयोडाइड समृद्ध सतह का इस्तेमाल हुआ।
छोटे 810 वर्ग सेंटीमीटर मॉड्यूल ने 24.0% प्रमाणित दक्षता हासिल की। एक रिपोर्ट के अनुसार, 2,200 घंटे के अधिकतम पावर पॉइंट ट्रैकिंग परीक्षण के बाद प्रारंभिक दक्षता का 96% बरकरार रहा; हालांकि उपलब्ध सामग्री पूर्ण तुलनात्...