रिपोर्ट से पता चलता है कि चीन पेटेंट की संख्या और उत्पादन क्षमता में तेजी से आगे बढ़ रहा है। हालांकि, प्रति-पेटेंट गुणवत्ता के मामले में अमेरिका अब भी बढ़त बनाए हुए है।
LexisNexis की रैंकिंग में चीन की छह ह्यूमनॉइड रोबोट स्टार्टअप्स टॉप 10 में शामिल हुईं। यह संख्या अमेरिका की तीन कंपनियों—Figure AI, Apptronik और Agility Robotics—से दोगुनी है। जर्मनी की Agile Robots ने सूची में शेष स्थान हासिल किया ।
फिर भी इसे हर पैमाने पर चीन की एकतरफा जीत कहना सही नहीं होगा। उपलब्ध विश्लेषण के अनुसार, अमेरिकी पेटेंट औसतन अधिक मजबूत और उच्च गुणवत्ता वाले हैं। यानी चीन के पास पेटेंटों की संख्या अधिक है, जबकि अमेरिका के कई पेटेंट प्रति-पेटेंट प्रभाव और गुणवत्ता में आगे हैं ।
चीन की सबसे बड़ी बढ़त मॉर्फोलॉजी से जुड़े पेटेंटों में दिखाई देती है। मॉर्फोलॉजी का अर्थ रोबोट का भौतिक शरीर—जैसे उसका ढांचा, जोड़ और चलने-फिरने की बनावट—है। इस श्रेणी में चीन के पास दुनिया के कुल पेटेंटों का 73% हिस्सा है ।
रिपोर्ट की सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि शीर्ष पांचों स्थान चीनी कंपनियों ने हासिल किए। कई रिपोर्टों ने इसे “क्लीन स्वीप” बताया ।
शेनझेन की Leju Robot भी टॉप 10 में शामिल रही और कुल रैंकिंग में नौवें स्थान पर आई ।
यह रैंकिंग ऐसे समय आई है जब चीनी कंपनियां ह्यूमनॉइड रोबोटों के निर्माण और शिपमेंट में भी तेज विस्तार कर रही हैं। 2025 में वैश्विक ह्यूमनॉइड रोबोट शिपमेंट का लगभग 90% हिस्सा चीनी कंपनियों का था । इससे चीन को केवल शोध और पेटेंट में ही नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर उत्पादन और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच बनाने में भी बढ़त मिलती है।
हालांकि, पेटेंटों की संख्या अपने आप में यह साबित नहीं करती कि हर कंपनी के रोबोट व्यावसायिक उपयोग में सबसे बेहतर हैं। गुणवत्ता, सॉफ्टवेयर, स्वायत्त निर्णय लेने की क्षमता, लागत और भरोसेमंद उत्पादन—ये सभी कारक आगे की दौड़ तय करेंगे ।
LexisNexis रिपोर्ट जारी होने के उसी दिन, ट्रंप प्रशासन ने “विदेशी प्रतिद्वंद्वी” देशों से नए ह्यूमनॉइड और चौपाया रोबोटों के आयात पर रोक लागू करने की घोषणा की। व्हाइट हाउस ने इन उत्पादों से जुड़े “अस्वीकार्य राष्ट्रीय सुरक्षा जोखिमों” का हवाला दिया ।
इस फैसले का सीधा असर चीनी निर्मित ह्यूमनॉइड रोबोटों पर पड़ता है, क्योंकि इससे उनके लिए अमेरिकी बाजार तक पहुंच लगभग बंद हो जाती है। कई रिपोर्टों के अनुसार, फेडरल कम्युनिकेशंस कमीशन (FCC) ने भी इन रोबोटों के नए आयात पर रोक लगाई है। वॉशिंगटन चीन से ह्यूमनॉइड रोबोट आयात पर और व्यापक पाबंदियों पर भी विचार कर रहा है ।
यह कदम अमेरिका-चीन ह्यूमनॉइड रोबोटिक्स प्रतिस्पर्धा में अब तक की सबसे ठोस नीतिगत प्रतिक्रिया है। चीन पेटेंटों की मात्रा, मॉर्फोलॉजी और उत्पादन पैमाने में आगे है, जबकि अमेरिकी कंपनियां पेटेंट गुणवत्ता और कुछ उन्नत तकनीकी क्षेत्रों में मजबूत बनी हुई हैं ।
आयात प्रतिबंध Fourier, AgiBot और Unitree जैसी कंपनियों की अंतरराष्ट्रीय विस्तार योजनाओं को प्रभावित कर सकते हैं। दूसरी ओर, इससे अमेरिकी कंपनियों को घरेलू बाजार में अधिक जगह मिल सकती है। आने वाले समय में असली मुकाबला केवल यह नहीं होगा कि किस देश के पास ज्यादा पेटेंट हैं, बल्कि यह भी होगा कि कौन सुरक्षित, किफायती और बड़े पैमाने पर उपयोगी रोबोट बना पाता है।