ISW के अनुसार मार्च 2026 से रूस का शुद्ध क्षेत्रीय लाभ लगभग शून्य रहा और यूक्रेन ने रणनीतिक तथा परिचालन स्तर पर पहल को लगातार चुनौती दी। [3] कुप्यांस्क, ओलेक्सांद्रिव्का और लायमन में यूक्रेनी जवाबी हमलों ने रूस की योजनाओं को बाधित किया, लेकिन लड़ाई और यूक्रेनी नागरिकों व बुनियादी ढांचे पर रूसी हमले जारी रहे। [3]
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शोध उत्तर

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: What did the Institute for the Study of War’s September 12, 2026 assessment—published September 13—conclude about Ukraine’s battlefield mome. Article summary: ISW’s assessment argued that Ukraine had achieved a meaningful, sustained contest for battlefield initiative—rather than merely conducting isolated local counterattacks—blunting Russia’s offensive momentum and making Mos. Topic tags: general, general web. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, watermarks, charts with fake numbers, clic
इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर (ISW) के 12 सितंबर 2026 के आकलन में युद्धक्षेत्र की रफ्तार में एक अहम बदलाव बताया गया। संस्था के मुताबिक, यूक्रेनी बलों ने 2025 के अंत से 2026 तक रणनीतिक और परिचालन—दोनों स्तरों पर रूस की पहल को चुनौती दी। मार्च 2026 से रूस के शुद्ध क्षेत्रीय लाभ लगभग शून्य रहे। ISW ने इसे अगस्त 2024 के कुर्स्क आक्रामक अभियान के बाद पहला ऐसा निरंतर बदलाव कहा। 3
इसका अर्थ यह नहीं है कि युद्ध समाप्ति के करीब है। रूस कई मोर्चों पर हमलावर गतिविधियां जारी रखे हुए था और यूक्रेनी नागरिकों तथा बुनियादी ढांचे पर उसके हमले भी चलते रहे।
ISW के निष्कर्ष में इसका मतलब सिर्फ कुछ स्थानीय लड़ाइयां जीतना नहीं है। आकलन के अनुसार कुप्यांस्क, ओलेक्सांद्रिव्का और लायमन दिशाओं में यूक्रेनी जवाबी कार्रवाइयों ने रूसी सेना को प्रतिक्रिया देने पर मजबूर किया, उसकी बढ़त के व्यावहारिक असर को सीमित किया और व्यापक परिचालन योजनाओं को जटिल बनाया। 3
ISW ने इन अभियानों को द्निप्रोपेत्रोव्स्क ओब्लास्त की ओर रूसी धकेल को रोकने और कुप्यांस्क के पास खोया क्षेत्र वापस लेने का श्रेय दिया। संस्था की पहले की रिपोर्टिंग में कहा गया था कि अगस्त में ही यूक्रेनी बलों ने जवाबी अभियानों में कम-से-कम 129.81 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र मुक्त कराया। 4
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व्यापक अनुमान में ISW ने यूक्रेनी जवाबी हमलों से वापस लिए गए क्षेत्र को लगभग 150 से 250 वर्ग किलोमीटर बताया। रूस ने कोस्त्यांतिनिव्का के पास तथा स्लोवियांस्क और क्रामातोर्स्क के पूर्व में सीमित बढ़त बनाई, लेकिन ISW के अनुसार यह डोनेत्स्क की मजबूत रक्षात्मक रेखा—जिसे रिपोर्ट में “फोर्ट्रेस बेल्ट” कहा गया—के विरुद्ध निर्णायक प्रगति नहीं थी। 3
लायमन के आसपास की लड़ाई इसलिए महत्वपूर्ण थी क्योंकि यहां रूस के अभियान का संबंध फोर्ट्रेस बेल्ट को बड़े घेरे में लेने की योजना से था। ISW के आकलन के अनुसार यूक्रेनी जवाबी हमलों ने लायमन के उत्तर में रूसी उभार को समाप्त कर दिया, रूसी बलों को झेरेबेत्स नदी की ओर पीछे धकेला और उस योजना के उत्तरी हिस्से को बाधित किया। 3
हालांकि सामरिक स्तर पर स्थिति पूरी तरह निर्विवाद नहीं थी। ISW ने कहा कि रूसी स्रोत स्वयं उस उभार की स्थिति पर असहमत थे। फिर भी, एक रूसी सैन्य ब्लॉगर ने दावा किया कि व्यापक मोर्चे पर यूक्रेनी जवाबी हमलों ने रूसी बलों को लायमन के उत्तर में रक्षात्मक मुद्रा में पहुंचा दिया। 2
ISW ने रूसी आक्रामक अभियानों को बनाए रखने या बढ़ाने में मानवबल को बढ़ती बाधा बताया। उसके अनुसार रूसी जनरलों ने कथित तौर पर अतिरिक्त 8 लाख कर्मियों की मांग की थी, जबकि रोजाना करीब 1,000 से 1,200 लोगों की बताई गई भर्ती दर रूसी हताहतों की दर से कम थी। आकलन में यह भी कहा गया कि रूसी हताहतों में करीब 60 प्रतिशत युद्ध में मारे गए लोग थे। 3
औपचारिक लामबंदी की सार्वजनिक घोषणा न होने पर भी ISW का निष्कर्ष था कि रूस के सामने नए रंगरूटों को प्रशिक्षित करने, हथियार और साजो-सामान देने, संगठित करने तथा प्रभावी लड़ाकू इकाइयों में शामिल करने की व्यावहारिक सीमाएं हैं। यानी सिर्फ अधिक लोगों की भर्ती से समस्या हल नहीं होगी। 3
रूसी ऊर्जा ढांचे पर यूक्रेन के हमले भी ISW के विश्लेषण का एक अहम हिस्सा थे। आकलन के मुताबिक यूक्रेनी हमलों ने रूस की कम-से-कम 26 रिफाइनरियों को निशाना बनाया, जिससे रूस की तेल-प्रसंस्करण क्षमता करीब 30 प्रतिशत घटी और परिष्कृत पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात लगभग ठप हो गया। ISW ने कहा कि इससे युद्ध को वित्तपोषित करने और लंबे समय तक चलाने की रूस की क्षमता पर दबाव बढ़ सकता है। 3
ये आंकड़े विकसित होते अभियान पर ISW का आकलन हैं, स्थायी परिणाम की गारंटी नहीं। मरम्मत की क्षमता, वायु रक्षा, आगे के हमले और वैश्विक ऊर्जा बाजार—सभी भविष्य के असर को बदल सकते हैं।
रिपोर्ट का सबसे बड़ा रणनीतिक संकेत मॉस्को के उस कथित लक्ष्य से जुड़ा था जिसमें 2026 के अंत तक डोनेत्स्क ओब्लास्त का शेष यूक्रेनी-नियंत्रित क्षेत्र लेने की बात थी। ISW ने गणना की कि यदि रूस अगस्त 2026 वाली गति से ही आगे बढ़ता रहा, तो उसे यह क्षेत्र हासिल करने में लगभग अक्टूबर 2032 तक का समय लगेगा। 3
यह एक महीने की रफ्तार पर आधारित उदाहरणात्मक गणना थी, न कि यह भविष्यवाणी कि अगले छह वर्ष तक हालात अपरिवर्तित रहेंगे। इसका सीमित निष्कर्ष इतना था कि उस समय रूस की प्रगति की गति उसके घोषित लक्ष्य की समयसीमा से बहुत पीछे थी।
ISW के मुताबिक यूक्रेनी जवाबी अभियानों ने रूस पर लगातार रणनीतिक लागत डाली: रूस की शुद्ध क्षेत्रीय प्रगति घटी, लायमन से डोनेत्स्क तक उसकी एक महत्वपूर्ण परिचालन अवधारणा बाधित हुई और उसकी आक्रामक रणनीति के पीछे मानवबल तथा आर्थिक दबाव उजागर हुए। 3
आकलन ने खतरे को कम नहीं आंका। रूस के पास लड़ाई जारी रखने और यूक्रेन पर हमले करने की क्षमता बनी रही। लेकिन ISW का निष्कर्ष था कि युद्ध अब रूस की निर्बाध बढ़त वाली तस्वीर से हटकर ऐसे संघर्ष में बदल गया है, जहां मॉस्को के लक्ष्यों के सामने समय, मानवबल और संसाधनों की बड़ी बाधाएं हैं। 3
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ISW के अनुसार मार्च 2026 से रूस का शुद्ध क्षेत्रीय लाभ लगभग शून्य रहा और यूक्रेन ने रणनीतिक तथा परिचालन स्तर पर पहल को लगातार चुनौती दी। [3]
ISW के अनुसार मार्च 2026 से रूस का शुद्ध क्षेत्रीय लाभ लगभग शून्य रहा और यूक्रेन ने रणनीतिक तथा परिचालन स्तर पर पहल को लगातार चुनौती दी। [3] कुप्यांस्क, ओलेक्सांद्रिव्का और लायमन में यूक्रेनी जवाबी हमलों ने रूस की योजनाओं को बाधित किया, लेकिन लड़ाई और यूक्रेनी नागरिकों व बुनियादी ढांचे पर रूसी हमले जारी रहे। [3]