The Information की एक रिपोर्ट के मुताबिक, DeepSeek और Moonshot AI ने अपने नए मॉडल ट्रेन करने के लिए OpenAI के GPT-6 Astra से मिले जवाबों पर काफी निर्भरता रखी। Reuters ने यह दावा उन लोगों के हवाले से प्रकाशित किया जिन्हें मामले की सीधी जानकारी थी। संबंधित कंपनियों ने तत्काल टिप्पणी नहीं की थी। यह आरोप स्वतंत्र रूप से साबित नहीं हुआ है।
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रिपोर्ट में DeepSeek के V4.1-Flash 1017 और Moonshot के Kimi K3.1 Pro का नाम लिया गया है। यहां मुद्दा OpenAI के मॉडल के अंदरूनी वेट्स तक पहुंच का नहीं, बल्कि एक मॉडल के जवाबों से दूसरे मॉडल को ट्रेन करने और ऐसा करने की अनुमति का है।
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मॉडल डिस्टिलेशन क्या है?
डिस्टिलेशन में एक सक्षम मॉडल—यानी “टीचर”—के जवाबों का इस्तेमाल कम खर्चीले या छोटे “स्टूडेंट” मॉडल को ट्रेन करने के लिए किया जाता है। स्टूडेंट मॉडल टीचर के जवाबों से सीख सकता है; इसके लिए उसे टीचर के वेट्स तक पहुंच जरूरी नहीं होती। OpenAI भी बड़े मॉडल के आउटपुट से कम लागत वाले मॉडल को फाइन-ट्यून करने के लिए डिस्टिलेशन प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराता है।
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इसलिए डिस्टिलेशन तकनीक अपने आप में गैरकानूनी या अनुचित नहीं है। सवाल यह है कि ट्रेनिंग के लिए डेटा कैसे जुटाया गया और उसका इस्तेमाल किस अनुमति के तहत हुआ। OpenAI “एडवर्सेरियल डिस्टिलेशन” को किसी मॉडल के आउटपुट या रीजनिंग का व्यवस्थित और बिना अनुमति इस्तेमाल बताता है—जिसका मकसद दूसरे मॉडल को ट्रेन करना, उसकी नकल करना या उसे बेहतर बनाना हो सकता है।
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अगर कोई डेवलपर इस तरीके से कुछ क्षमताएं हासिल कर ले, तो उसे वे क्षमताएं खुद विकसित करने में लगने वाला समय या खर्च कम करना पड़ सकता है। आलोचकों की चिंता है कि बिना अनुमति ऐसा करना नकल को बढ़ावा दे सकता है और मॉडल बनाने में किए गए शोध व ट्रेनिंग से मिली प्रतिस्पर्धी बढ़त को कमजोर कर सकता है।
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OpenAI के अलग reasoning-extraction मामले को इस रिपोर्ट का सबूत न मानें
GPT-6 Astra से ट्रेनिंग का ताजा आरोप, सितंबर में OpenAI द्वारा बताई गई एक अलग extraction मुहिम का प्रमाण नहीं है। 30 सितंबर को OpenAI ने अपने मॉडलों से संरक्षित रीजनिंग निकालने की कोशिशों के बारे में बताया था। उस बयान से अपने आप यह साबित नहीं होता कि The Information की रिपोर्ट में नामित मॉडल किस तरह ट्रेन किए गए।
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OpenAI के मुताबिक, उस अलग मुहिम की शुरुआती गतिविधि जुलाई के पहले सप्ताह में दिखी थी। माध्यमिक रिपोर्टिंग में 24–25 जुलाई को 4,000 से अधिक यूज़रों की ओर से करीब 16,000 अनुरोधों का उछाल बताया गया। OpenAI ने कहा कि 28 जुलाई तक गतिविधि रोक दी गई थी। ये आंकड़े अनुरोधों और यूज़रों के हैं—सफलतापूर्वक निकाली गई जानकारी के नहीं।
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रिपोर्टों में बताए गए तरीके में एक बातचीत से एन्क्रिप्टेड रीजनिंग कॉपी करके दूसरी बातचीत में मॉडल से उसे टेक्स्ट के रूप में लिखवाने की कोशिश शामिल थी। OpenAI ने कहा कि ऑपरेटरों ने उसका एन्क्रिप्शन नहीं तोड़ा, डेटाबेस में सेंध नहीं लगाई और संग्रहित बातचीतों तक सीधे पहुंच नहीं बनाई।
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OpenAI ने गतिविधि के एक अहम हिस्से को Moonshot AI से जुड़े लोगों से जोड़ा, लेकिन यह भी कहा कि वह तय नहीं कर सका कि सभी ऑपरेटर एक ही समूह के थे या नहीं। CyberScoop ने बताया कि Moonshot से जुड़े होने के दावे के समर्थन में OpenAI ने सार्वजनिक तकनीकी सबूत नहीं दिए। इसलिए उपलब्ध जानकारी के आधार पर इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की जा सकती।
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Anthropic ने अपने सुरक्षा उपायों के बारे में क्या कहा?
अक्टूबर में Anthropic ने बताया कि उसके सुरक्षा उपायों से डिस्टिलेशन के जरिए जुटाए गए डेटा की मात्रा करीब 90%–99% कम हुई। कंपनी ने अलग से कहा कि क्लासिफायर लागू करने के बाद निकाले गए reasoning tokens की संख्या पहले के मुकाबले 10 से 100 गुना कम रही। ये दो अलग-अलग माप हैं।
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Anthropic ने यह भी आरोप लगाया कि Zhipu ने GLM-5.3 विकसित करते समय अग्रणी अमेरिकी मॉडलों की साइबर क्षमताओं को डिस्टिल किया। यह Anthropic का दावा है; उपलब्ध जानकारी से यह साबित नहीं होता कि इस खास आरोप में Claude मॉडल की ही बात थी।
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विवाद क्यों अहम है—और इससे क्या साबित नहीं होता
मॉडल डेवलप करने वाली कंपनियों की चिंता है कि कोई प्रतिद्वंद्वी शोध और ट्रेनिंग में उतना निवेश किए बिना उपयोगी क्षमताएं हासिल कर सकता है। सुरक्षा से जुड़ी चिंता यह है कि क्षमता की नकल के साथ मूल मॉडल के सुरक्षा उपाय भी जरूरी नहीं कि दूसरे मॉडल में आ जाएं। Anthropic ने कहा है कि गैरकानूनी डिस्टिलेशन से उन्नत AI क्षमताओं की नकल तो हो सकती है, लेकिन उनके साथ उतने मजबूत सुरक्षा उपाय न बनें।
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ये कंपनियों और रिपोर्टिंग में उठाई गई चिंताएं हैं—इस बात का प्रमाण नहीं कि DeepSeek या Moonshot के बताए गए मॉडल GPT-6 Astra के बराबर हैं, किसी खास अनुबंध का उल्लंघन हुआ है, या कोई निश्चित नुकसान हुआ है। अहम फर्क यह है कि डिस्टिलेशन एक ट्रेनिंग तकनीक है; विवाद इस बात पर है कि दूसरे मॉडल के जवाब कैसे हासिल किए गए और उनका दोबारा इस्तेमाल किस तरह हुआ।