7 अक्टूबर 2026 को वियना और बीजिंग की स्वतंत्र टीमों ने Nature में थोरियम 229 पर आधारित पहली काम करने वाली न्यूक्लियर घड़ियों के नतीजे प्रकाशित किए। परंपरागत परमाणु घड़ियां इलेक्ट्रॉनों के बदलाव मापती हैं; ये प्रोटोटाइप कैल्शियम फ्लोराइड के क्रिस्टल में मौजूद थोरियम 229 के नाभिकीय बदलाव पर निर्भर हैं। वियना का सिस्टम...
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शोध उत्तर

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: What did the independent TU Wien and Tsinghua University teams in Vienna and Beijing report in Nature on October 7, 2026, about the world’s. Article summary: The independent Vienna and Beijing teams reported the first operating thorium-229 nuclear clocks in Nature on October 7, 2026—a milestone in turning a nuclear transition into a working timekeeping reference, rather than . Topic tags: general, education, general web, news, academic. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, watermarks, char
वियना और बीजिंग की दो स्वतंत्र शोध टीमों ने Nature में थोरियम-229 पर आधारित पहली काम करने वाली न्यूक्लियर घड़ियों के नतीजे पेश किए। एक टीम में ऑस्ट्रिया की TU Wien और जर्मनी का राष्ट्रीय मापन संस्थान PTB शामिल था; दूसरी टीम बीजिंग की Tsinghua University से थी। दोनों ने समय मापने के लिए थोरियम के नाभिक में होने वाले बदलाव को संदर्भ बनाया। 4
17
आम परमाणु घड़ियां परमाणुओं में इलेक्ट्रॉनों के ऊर्जा-स्तर बदलने पर काम करती हैं। नए प्रोटोटाइप इसके बजाय थोरियम-229 समस्थानिक के नाभिक में होने वाले बदलाव को मापते हैं। थोरियम के नाभिक कैल्शियम फ्लोराइड (CaF₂) के ठोस क्रिस्टल में समाहित हैं। लेज़र की रोशनी इस नाभिकीय बदलाव को उत्तेजित करती है और घड़ी उस रोशनी की आवृत्ति को मापती है। यह न तो नाभिकीय विखंडन है, न ही संलयन। 17
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वियना के प्रयोग में शोधकर्ताओं ने 148 नैनोमीटर की नाभिकीय संक्रमण-आवृत्ति पर लगातार चलने वाले लेज़र को स्थिर किया। थोरियम के नाभिक रोशनी को किस तरह सोखते हैं, इसे मापकर सिस्टम लेज़र की आवृत्ति में तेजी से सुधार करता रहा। 33
TU Wien और PTB की टीम ने दिखाया कि उसका सिस्टम बिना किसी हस्तक्षेप के 24 घंटे से अधिक समय तक खुद को स्थिर रख सकता है। एक दिन के संचालन के दौरान आवृत्ति-अस्थिरता लगभग 10⁻¹⁵ के स्तर तक पहुंची। इसे आसान भाषा में करीब 3 करोड़ साल में एक सेकंड की त्रुटि के बराबर बताया जाता है। यह माप की सैद्धांतिक दर को समझाने का तरीका है—इसका अर्थ यह नहीं कि घड़ी को इतने लंबे समय तक चलाकर परखा गया। 9
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Tsinghua University की टीम ने अपने प्रोटोटाइप में वियना के सिस्टम की तुलना में लगभग छह गुना अधिक स्थिरता बताई। अलग-अलग बनाए गए क्रिस्टलों की जांच में भी लगभग एक-जैसे संकेत मिले; उनकी रीडिंग में अंतर करीब 10 खरब में तीन हिस्से के बराबर बताया गया। 19
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इन आंकड़ों को एक ही पैमाने की तुलना नहीं समझना चाहिए। स्थिरता बताती है कि समय के साथ आवृत्ति कितनी बदलती है; अलग-अलग क्रिस्टलों के संकेतों की समानता मापों की पुनरुत्पादकता बताती है। इनमें से कोई भी आंकड़ा अपने-आप दोनों घड़ियों की निरपेक्ष सटीकता की तुलना नहीं करता। प्रकाशित आवृत्ति-अस्थिरता Tsinghua के उपकरण के लिए 5 × 10⁻¹³/√(τ/सेकंड) और PTB–TU Wien के उपकरण के लिए 3 × 10⁻¹²/√(τ/सेकंड) थी। यहां τ औसत निकालने में लिया गया समय है। 33
39
दो अलग-अलग प्रयोगशालाओं में काम करने वाले सिस्टम दिखाना इस बात का सबूत है कि यह विचार सिर्फ एक प्रयोगशाला की खास व्यवस्था तक सीमित नहीं है। लेकिन दोनों उपकरण अभी प्रोटोटाइप हैं। प्रकाशित नतीजे यह नहीं दिखाते कि उन्होंने सर्वश्रेष्ठ परमाणु घड़ियों को पीछे छोड़ दिया है। 4
17
वियना में एक दिन के परीक्षण के दौरान मिली लगभग 10⁻¹⁵ की अस्थिरता और Tsinghua की लगभग छह गुना बेहतर बताई गई स्थिरता अलग-अलग मापों और समय-अवधियों से जुड़ी हैं। इसलिए “छह गुना बेहतर” कहने पर यह स्पष्ट होना चाहिए कि तुलना किस गुण की है। 9
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39
न्यूक्लियर घड़ियों को बुनियादी भौतिकी के सवालों की जांच के लिए नए उपकरण के रूप में देखा जा रहा है। वियना की टीम ने अपनी घड़ी से नाभिकीय संक्रमण की ऊर्जा में आवर्ती बदलावों और धीरे-धीरे होने वाले खिसकाव को तलाशा। इससे अति-हल्के डार्क मैटर के कुछ मॉडलों पर सीमाएं तय की गईं। यह मॉडल सीमित करने का नतीजा है—डार्क मैटर मिलने का संकेत नहीं। 33
शोधकर्ताओं ने अधिक सटीक समय-मापन और भविष्य में पोर्टेबल सिस्टम की संभावनाओं का भी उल्लेख किया है। फिर भी, अभी प्रकाशित नतीजे प्रोटोटाइप से जुड़े हैं, न कि उपग्रह नेविगेशन या अन्य बुनियादी ढांचे में इस्तेमाल के लिए तैयार उपकरणों से। 4
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फिलहाल ठोस निष्कर्ष यही है: दो स्वतंत्र टीमों ने थोरियम-229 के नाभिकीय बदलाव पर आधारित काम करने वाली घड़ियां दिखाईं। वियना के सिस्टम का अपने-आप स्थिर होना, Tsinghua का अधिक स्थिरता बताना और अलग-अलग तैयार क्रिस्टलों के बीच अच्छा मेल—ये सब अहम पड़ाव हैं। लेकिन इनसे यह साबित नहीं होता कि न्यूक्लियर घड़ियां अब तक की सर्वश्रेष्ठ परमाणु घड़ियों से आगे निकल चुकी हैं। 9
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7 अक्टूबर 2026 को वियना और बीजिंग की स्वतंत्र टीमों ने Nature में थोरियम 229 पर आधारित पहली काम करने वाली न्यूक्लियर घड़ियों के नतीजे प्रकाशित किए।
7 अक्टूबर 2026 को वियना और बीजिंग की स्वतंत्र टीमों ने Nature में थोरियम 229 पर आधारित पहली काम करने वाली न्यूक्लियर घड़ियों के नतीजे प्रकाशित किए। परंपरागत परमाणु घड़ियां इलेक्ट्रॉनों के बदलाव मापती हैं; ये प्रोटोटाइप कैल्शियम फ्लोराइड के क्रिस्टल में मौजूद थोरियम 229 के नाभिकीय बदलाव पर निर्भर हैं।
वियना का सिस्टम 24 घंटे से अधिक समय तक अपने आप स्थिर रहा। बीजिंग की टीम ने अपने प्रोटोटाइप में लगभग छह गुना अधिक स्थिरता बताई।
7 अक्टूबर 2026 को वियना और बीजिंग की स्वतंत्र टीमों ने Nature में थोरियम 229 पर आधारित पहली काम करने वाली न्यूक्लियर घड़ियों के नतीजे प्रकाशित किए। परंपरागत परमाणु घड़ियां इलेक्ट्रॉनों के बदलाव मापती हैं; ये प्रोटोटाइप कैल्शियम फ्लोराइड के क्रिस्टल में मौजूद थोरियम 229 के नाभिकीय बदलाव पर निर्भर हैं। वियना का सिस्टम...
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वियना और बीजिंग की दो स्वतंत्र शोध टीमों ने Nature में थोरियम-229 पर आधारित पहली काम करने वाली न्यूक्लियर घड़ियों के नतीजे पेश किए। एक टीम में ऑस्ट्रिया की TU Wien और जर्मनी का राष्ट्रीय मापन संस्थान PTB शामिल था; दूसरी टीम बीजिंग की Tsinghua University से थी। दोनों ने समय मापने के लिए थोरियम के नाभिक में होने वाले बदलाव को संदर्भ बनाया। 4
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आम परमाणु घड़ियां परमाणुओं में इलेक्ट्रॉनों के ऊर्जा-स्तर बदलने पर काम करती हैं। नए प्रोटोटाइप इसके बजाय थोरियम-229 समस्थानिक के नाभिक में होने वाले बदलाव को मापते हैं। थोरियम के नाभिक कैल्शियम फ्लोराइड (CaF₂) के ठोस क्रिस्टल में समाहित हैं। लेज़र की रोशनी इस नाभिकीय बदलाव को उत्तेजित करती है और घड़ी उस रोशनी की आवृत्ति को मापती है। यह न तो नाभिकीय विखंडन है, न ही संलयन। 17
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वियना के प्रयोग में शोधकर्ताओं ने 148 नैनोमीटर की नाभिकीय संक्रमण-आवृत्ति पर लगातार चलने वाले लेज़र को स्थिर किया। थोरियम के नाभिक रोशनी को किस तरह सोखते हैं, इसे मापकर सिस्टम लेज़र की आवृत्ति में तेजी से सुधार करता रहा। 33
TU Wien और PTB की टीम ने दिखाया कि उसका सिस्टम बिना किसी हस्तक्षेप के 24 घंटे से अधिक समय तक खुद को स्थिर रख सकता है। एक दिन के संचालन के दौरान आवृत्ति-अस्थिरता लगभग 10⁻¹⁵ के स्तर तक पहुंची। इसे आसान भाषा में करीब 3 करोड़ साल में एक सेकंड की त्रुटि के बराबर बताया जाता है। यह माप की सैद्धांतिक दर को समझाने का तरीका है—इसका अर्थ यह नहीं कि घड़ी को इतने लंबे समय तक चलाकर परखा गया। 9
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Tsinghua University की टीम ने अपने प्रोटोटाइप में वियना के सिस्टम की तुलना में लगभग छह गुना अधिक स्थिरता बताई। अलग-अलग बनाए गए क्रिस्टलों की जांच में भी लगभग एक-जैसे संकेत मिले; उनकी रीडिंग में अंतर करीब 10 खरब में तीन हिस्से के बराबर बताया गया। 19
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इन आंकड़ों को एक ही पैमाने की तुलना नहीं समझना चाहिए। स्थिरता बताती है कि समय के साथ आवृत्ति कितनी बदलती है; अलग-अलग क्रिस्टलों के संकेतों की समानता मापों की पुनरुत्पादकता बताती है। इनमें से कोई भी आंकड़ा अपने-आप दोनों घड़ियों की निरपेक्ष सटीकता की तुलना नहीं करता। प्रकाशित आवृत्ति-अस्थिरता Tsinghua के उपकरण के लिए 5 × 10⁻¹³/√(τ/सेकंड) और PTB–TU Wien के उपकरण के लिए 3 × 10⁻¹²/√(τ/सेकंड) थी। यहां τ औसत निकालने में लिया गया समय है। 33
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दो अलग-अलग प्रयोगशालाओं में काम करने वाले सिस्टम दिखाना इस बात का सबूत है कि यह विचार सिर्फ एक प्रयोगशाला की खास व्यवस्था तक सीमित नहीं है। लेकिन दोनों उपकरण अभी प्रोटोटाइप हैं। प्रकाशित नतीजे यह नहीं दिखाते कि उन्होंने सर्वश्रेष्ठ परमाणु घड़ियों को पीछे छोड़ दिया है। 4
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वियना में एक दिन के परीक्षण के दौरान मिली लगभग 10⁻¹⁵ की अस्थिरता और Tsinghua की लगभग छह गुना बेहतर बताई गई स्थिरता अलग-अलग मापों और समय-अवधियों से जुड़ी हैं। इसलिए “छह गुना बेहतर” कहने पर यह स्पष्ट होना चाहिए कि तुलना किस गुण की है। 9
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न्यूक्लियर घड़ियों को बुनियादी भौतिकी के सवालों की जांच के लिए नए उपकरण के रूप में देखा जा रहा है। वियना की टीम ने अपनी घड़ी से नाभिकीय संक्रमण की ऊर्जा में आवर्ती बदलावों और धीरे-धीरे होने वाले खिसकाव को तलाशा। इससे अति-हल्के डार्क मैटर के कुछ मॉडलों पर सीमाएं तय की गईं। यह मॉडल सीमित करने का नतीजा है—डार्क मैटर मिलने का संकेत नहीं। 33
शोधकर्ताओं ने अधिक सटीक समय-मापन और भविष्य में पोर्टेबल सिस्टम की संभावनाओं का भी उल्लेख किया है। फिर भी, अभी प्रकाशित नतीजे प्रोटोटाइप से जुड़े हैं, न कि उपग्रह नेविगेशन या अन्य बुनियादी ढांचे में इस्तेमाल के लिए तैयार उपकरणों से। 4
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फिलहाल ठोस निष्कर्ष यही है: दो स्वतंत्र टीमों ने थोरियम-229 के नाभिकीय बदलाव पर आधारित काम करने वाली घड़ियां दिखाईं। वियना के सिस्टम का अपने-आप स्थिर होना, Tsinghua का अधिक स्थिरता बताना और अलग-अलग तैयार क्रिस्टलों के बीच अच्छा मेल—ये सब अहम पड़ाव हैं। लेकिन इनसे यह साबित नहीं होता कि न्यूक्लियर घड़ियां अब तक की सर्वश्रेष्ठ परमाणु घड़ियों से आगे निकल चुकी हैं। 9
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इस पृष्ठ में एक स्रोत-समर्थित उत्तर शामिल है जिसे आप Studio Global के अंदर जारी रख सकते हैं।
7 अक्टूबर 2026 को वियना और बीजिंग की स्वतंत्र टीमों ने Nature में थोरियम 229 पर आधारित पहली काम करने वाली न्यूक्लियर घड़ियों के नतीजे प्रकाशित किए।
7 अक्टूबर 2026 को वियना और बीजिंग की स्वतंत्र टीमों ने Nature में थोरियम 229 पर आधारित पहली काम करने वाली न्यूक्लियर घड़ियों के नतीजे प्रकाशित किए। परंपरागत परमाणु घड़ियां इलेक्ट्रॉनों के बदलाव मापती हैं; ये प्रोटोटाइप कैल्शियम फ्लोराइड के क्रिस्टल में मौजूद थोरियम 229 के नाभिकीय बदलाव पर निर्भर हैं।
वियना का सिस्टम 24 घंटे से अधिक समय तक अपने आप स्थिर रहा। बीजिंग की टीम ने अपने प्रोटोटाइप में लगभग छह गुना अधिक स्थिरता बताई।