कोपरनिकस एटमॉस्फियर मॉनिटरिंग सर्विस (CAMS) की पहली एटमॉस्फियर वॉच समीक्षा के मुताबिक, 1 जनवरी से 15 सितंबर 2026 के बीच दुनिया की 34% आबादी ने भू-स्तरीय ओज़ोन की ‘बेहद खराब’ वायु गुणवत्ता का सामना किया। 17% आबादी ‘बहुत खराब’ श्रेणी में थी। रिपोर्ट ने यह भी दिखाया कि वायु प्रदूषण देशों और महाद्वीपों की सीमाएँ पार कर सकता है—इसलिए स्थानीय उत्सर्जन घटाने के साथ अंतरराष्ट्रीय सहयोग भी ज़रूरी है।
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वायु-गुणवत्ता की श्रेणियाँ क्या बताती हैं?
रिपोर्ट के एक विवरण में 34% आबादी ‘बेहद खराब’, 17% ‘बहुत खराब’ और 5% ‘अच्छी’ दीर्घकालिक ओज़ोन गुणवत्ता के संपर्क में बताई गई। यानी सबसे खराब दो श्रेणियों में कुल मिलाकर करीब आधी दुनिया थी। उपलब्ध आँकड़े बाकी सभी श्रेणियों के लिए भरोसेमंद प्रतिशत नहीं देते।
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CAMS के ओज़ोन पेज पर लगभग 40% वैश्विक आबादी के ‘बेहद ऊँचे’ ओज़ोन स्तरों के संपर्क में आने का भी उल्लेख है। यह आँकड़ा ‘बेहद खराब’ गुणवत्ता वाली 34% आबादी के आँकड़े के बराबर नहीं माना जा सकता: उपलब्ध सारांश यह स्पष्ट नहीं करते कि दोनों मापों में अंतर क्यों है।
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एशिया में सबसे अधिक जोखिम
एशिया में ओज़ोन का जोखिम लगातार बना रहा। एक विवरण के अनुसार, क्षेत्र की 53% आबादी ‘बेहद खराब’ और अन्य 22% ‘बहुत खराब’ ओज़ोन-वायु गुणवत्ता के संपर्क में थी। CAMS अलग से बताता है कि एशिया के 60% निवासी ‘बेहद ऊँचे’ ओज़ोन स्तरों के संपर्क में आए; उपलब्ध स्रोत यह नहीं बताते कि यह आँकड़ा श्रेणीवार प्रतिशतों से कैसे मेल खाता है।
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गर्मियों की लू के दौरान यूरोप और उत्तरी अमेरिका में भी कई दिन बहुत अधिक ओज़ोन जोखिम वाले रहे। एक समाचार रिपोर्ट ने प्रदूषित हवा के अधिक संपर्क वाले शहरों में दिल्ली, रियो डी जनेरियो, मेक्सिको सिटी, मिलान और काहिरा का नाम लिया है। हालांकि, यह सूची केवल ओज़ोन प्रदूषण की रैंकिंग के रूप में प्रस्तुत नहीं की गई।
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WHO के मानक: माप का तरीका भी मायने रखता है
स्रोतों में ओज़ोन के लिए WHO से जुड़े दो अलग संदर्भ दिए गए हैं। CAMS के मुताबिक, पीक-सीज़न यानी मौसम के सबसे अधिक ओज़ोन वाले दौर में स्तर 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर (µg/m³) से नीचे रखने का लक्ष्य है। दूसरी ओर, एक समाचार रिपोर्ट ‘बेहद खराब’ श्रेणी को आठ घंटे के औसत में 100 µg/m³ से अधिक ओज़ोन से जोड़ती है। ये अलग-अलग औसत और माप हैं—इन्हें एक ही सीमा नहीं समझना चाहिए।
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गर्मी, उत्सर्जन और आग से जुड़ी चिंता
ज़मीनी ओज़ोन तब बनती है जब प्रदूषक धूप और ऊँचे तापमान में रासायनिक प्रतिक्रिया करते हैं। CAMS ने 2026 के जोखिम को भीषण गर्मी और मानव गतिविधियों से होने वाले वायु प्रदूषण से जोड़ा। समीक्षा में जंगलों की आग के धुएँ पर भी ध्यान दिया गया। हालांकि, उपलब्ध स्रोत यह नहीं बताते कि ओज़ोन के स्तर में इन कारकों में से हर एक का कितना योगदान था।
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CAMS ने यह भी कहा कि आने वाले महीनों में अत्यधिक मज़बूत अल नीनो परिस्थितियाँ जारी रहने की आशंका थी, जिससे जंगलों की आग को लेकर चिंता बढ़ सकती है। यह आगे के जोखिम का आकलन है—इससे यह साबित नहीं होता कि रिपोर्टिंग अवधि में अल नीनो ने ओज़ोन के स्तर को कितना प्रभावित किया।
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सीमाओं के पार जाता प्रदूषण, साझा कार्रवाई की ज़रूरत
CAMS की समीक्षा में वायु प्रदूषण को देशों और महाद्वीपों के पार जाते हुए दर्ज किया गया। यानी किसी जगह की हवा पर वहाँ के स्थानीय उत्सर्जन के साथ-साथ दूर से आया प्रदूषण भी असर डाल सकता है। CAMS ने COP31 से पहले इन निष्कर्षों को देशों के बीच समन्वित कार्रवाई की ज़रूरत से जोड़ा है—क्योंकि जलवायु, वायु गुणवत्ता और जनस्वास्थ्य आपस में जुड़े मुद्दे हैं।
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यूरोप के बारे में समीक्षा पर आधारित रिपोर्टिंग कहती है कि ओज़ोन के स्तर में गिरावट का कोई स्पष्ट रुझान नहीं दिखता और यह अब भी समस्या बना हुआ है। उपलब्ध स्रोत यह साबित नहीं करते कि उत्तरी अमेरिका में भी प्रगति रुकी है; न ही वे इस रिपोर्ट में बताए गए जोखिम से जुड़े स्वास्थ्य प्रभावों का कोई मात्रात्मक अनुमान देते हैं।
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