फ्रांस के केंद्रीय बैंक से जुड़े विश्लेषण भी बताते हैं कि आर्थिक वृद्धि का रुझान सीमित है और लगभग 1% के आसपास बना हुआ है, क्योंकि घरों और कंपनियों का खर्च करने का रुख सतर्क बना हुआ है।
धीमी वृद्धि और ऊँचे सरकारी खर्च का यह संयोजन बजट संतुलन सुधारना और कठिन बना देता है।
स्पेन के मामले में तस्वीर कुछ अलग है। IMF के अनुसार सिस्टम स्तर पर वित्तीय जोखिम फिलहाल कम हैं और घरों, कंपनियों तथा बैंकों की बैलेंस शीट सामान्यतः मजबूत स्थिति में हैं।
इसके बावजूद IMF ने चेतावनी दी है कि यदि घर की कीमतों में लगातार तेजी और ऋण देने के आसान मानदंड जारी रहे, तो भविष्य में वित्तीय क्षेत्र में कमजोरियां पैदा हो सकती हैं।
इसलिए IMF का कहना है कि स्पेन को अभी की मजबूत आर्थिक स्थिति का उपयोग कर जल्दी से फिस्कल स्पेस बनाना चाहिए।
IMF का मुख्य सुझाव है कि फ्रांस को कर बढ़ाने की बजाय सरकारी खर्च को नियंत्रित करने पर अधिक ध्यान देना चाहिए।
IMF के अनुसार केवल टैक्स बढ़ाकर बजट घाटा कम करना संभव नहीं होगा, क्योंकि देश में पहले से ही कर भार काफी अधिक है।
इसलिए सरकार को चाहिए कि:
स्पेन के लिए IMF की सलाह कुछ अलग दिशा में है। यहां प्राथमिकता है कि मौजूदा आर्थिक मजबूती का उपयोग कर जल्दी वित्तीय सुधार किए जाएं।
IMF ने सुझाव दिया है कि:
IMF के विश्लेषण के अनुसार यदि अतिरिक्त कदम नहीं उठाए गए, तो स्पेन का सार्वजनिक कर्ज GDP के 90% से ऊपर बना रह सकता है और समय के साथ फिर से बढ़ भी सकता है।
IMF दोनों देशों के लिए एक व्यापक संदेश देता है: सरकारों को अगले आर्थिक झटके से पहले अपनी सार्वजनिक वित्तीय स्थिति मजबूत करनी चाहिए।
फ्रांस में यह जरूरी है क्योंकि उच्च कर्ज और धीमी सुधार प्रक्रिया देश को बाजार दबाव या भू‑राजनीतिक तनाव के समय जोखिम में डाल सकती है।
स्पेन के लिए तर्क थोड़ा अलग है। फिलहाल अर्थव्यवस्था मजबूत है, लेकिन भविष्य में पेंशन खर्च और वित्तीय क्षेत्र से जुड़े जोखिम बढ़ सकते हैं। इसलिए बेहतर होगा कि अनुकूल आर्थिक परिस्थितियों के दौरान ही बजट स्थिति मजबूत कर ली जाए।
IMF की 2026 रिपोर्ट यूरो क्षेत्र के भीतर दो अलग आर्थिक तस्वीरें दिखाती है:
दोनों मामलों में IMF का मुख्य संदेश एक जैसा है—अगले आर्थिक झटके से पहले सार्वजनिक वित्त को मजबूत करना जरूरी है।
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