जर्मनी के विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने कहा कि ऐसे लोगों को मारने की वकालत, जो तत्काल खतरा नहीं हैं, एक स्पष्ट सीमा पार करती है। उनके अनुसार, इसे इज़राइल के वैध आत्मरक्षा के अधिकार के हिस्से के रूप में उचित नहीं ठहराया जा सकता।
सत्तारूढ़ CDU/CSU संसदीय समूह के विदेश नीति प्रवक्ता युर्गेन हार्ट ने बेन-ग्विर की टिप्पणियों को अमानवीय बताया। उन्होंने कहा कि EU प्रतिबंध मानव गरिमा और मानवाधिकारों की सार्वभौमिकता की पुष्टि करेंगे।
वामपंथी दल के डाइटमार बार्ट्श ने बर्लिन और ब्रसेल्स से प्रतिबंधों पर विचार करने की मांग की, जिसमें पूरे यूरोप में प्रवेश प्रतिबंध भी शामिल हो सकता है। सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी के आदिस अहमेतोविच ने जर्मनी से बेन-ग्विर और वित्त मंत्री बेज़ालेएल स्मोट्रिच—दोनों पर प्रतिबंधों का समर्थन करने को कहा।
जर्मनी के उप-कुलपति लार्स क्लिंगबाइल ने भी EU से बेन-ग्विर पर प्रतिबंध लगाने की संभावना पर गंभीरता से विचार करने को कहा और उनकी भाषा को अमानवीय बताया।
EU परिषद के सामने बेन-ग्विर को EU की वैश्विक मानवाधिकार प्रतिबंध व्यवस्था के तहत सूचीबद्ध करने का प्रस्ताव रखा गया है। इसका अर्थ यह है कि प्रस्तावित कार्रवाई अपने-आप पूरे इज़राइल पर नया प्रतिबंध लगाने के बजाय एक व्यक्तिगत मंत्री को निशाना बनाएगी।
यूरोपीय आयोग का घोषित कानूनी मानक यह है कि इज़राइल को अंतरराष्ट्रीय कानून और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के तहत अपने दायित्व निभाने होंगे तथा नागरिकों की निरंतर सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी। बेन-ग्विर के सार्वजनिक बयानों पर यूरोपीय बहस इसी कानूनी और मानवाधिकार ढांचे के भीतर चल रही है।
EU की विदेश-नीति से जुड़े प्रतिबंधों के लिए सभी सदस्य देशों की सर्वसम्मति आवश्यक होती है। जून में EU की विदेश-नीति प्रमुख काया कालास ने कहा था कि कई सदस्य देशों ने बेन-ग्विर पर प्रतिबंध का प्रस्ताव रखा, लेकिन जरूरी सहमति नहीं बन सकी।
इस नियम के कारण प्रत्येक सदस्य देश के पास निर्णय को रोकने की महत्वपूर्ण शक्ति है। जर्मनी की स्थिति विशेष रूप से अहम है, क्योंकि वहां अब विभिन्न दलों के नेता कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, जबकि जर्मन सरकार ने पहले इज़राइल से जुड़े कुछ EU कदमों का विरोध किया है।
जर्मन अधिकारियों ने बेन-ग्विर पर प्रतिबंधों का औपचारिक समर्थन अभी नहीं किया है। नतीजतन, यूरोपीय आयोग की ओर से अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून और नागरिक सुरक्षा पर जोर दिए जाने तथा किसी ठोस दंड को मंजूरी देने की EU की क्षमता के बीच अंतर बना हुआ है। फिलहाल प्रस्ताव का भविष्य सभी सदस्य देशों के बीच राजनीतिक सहमति पर निर्भर है।