24 जुलाई 2026 को EU ने गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों के आरोप में छह ईरानी नागरिकों को सूचीबद्ध किया और 2023 में बने सैन्य सहायता प्रतिबंधों को नवीनीकृत किया।[1][2] अल्बानिया, बोस्निया और हर्जेगोविना, आइसलैंड, लिकटेंस्टाइन, मोल्दोवा, मोंटेनेग्रो, नॉर्थ मैसेडोनिया, नॉर्वे और यूक्रेन ने अपनी राष्ट्रीय नीतियों को इन फैसलों...
शोध उत्तर

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24 जुलाई 2026 को यूरोपीय संघ ने ईरान से जुड़े प्रतिबंधों पर दो अलग-अलग, लेकिन परस्पर संबंधित फैसले किए। एक फैसला गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों के आरोपों पर आधारित था, जबकि दूसरा ईरान के रूस के खिलाफ युद्ध और मध्य पूर्व तथा लाल सागर क्षेत्र में सशस्त्र समूहों को सैन्य समर्थन से जुड़ी व्यवस्था पर था।
इसके बाद EU से बाहर के नौ यूरोपीय देशों ने अपनी राष्ट्रीय नीतियों को इन उपायों के अनुरूप करने की घोषणा की।
यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है: 24 जुलाई का फैसला कोई एकल, नई प्रतिबंध व्यवस्था नहीं था। मानवाधिकारों से जुड़ा ढांचा 2011 में बनाया गया था, जबकि सैन्य समर्थन से संबंधित अलग व्यवस्था जुलाई 2023 में शुरू हुई थी।
EU परिषद ने गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों के आरोप में छह ईरानी नागरिकों पर प्रतिबंध लगाए। इनमें पांच न्यायाधीश और एक साइबर समूह से जुड़ा प्रमुख व्यक्ति शामिल है, जिस पर सूचना दबाने में मदद करने का आरोप लगाया गया है।
इन प्रतिबंधों के तहत सूचीबद्ध लोगों की EU में मौजूद संपत्तियां फ्रीज की जा सकती हैं, उनके EU में प्रवेश या यात्रा पर रोक लगती है और EU के व्यक्ति तथा संस्थाएं उन्हें धन या आर्थिक संसाधन उपलब्ध नहीं करा सकतीं। इस व्यापक मानवाधिकार व्यवस्था में ऐसे उपकरणों के ईरान को निर्यात पर भी रोक है, जिनका इस्तेमाल आंतरिक दमन के लिए किया जा सकता है।
यह व्यवस्था 2011 में शुरू की गई थी और समय-समय पर इसे नवीनीकृत तथा संशोधित किया जाता रहा है। यह 2023 में बनाई गई सैन्य-सहायता वाली प्रतिबंध व्यवस्था से अलग है।
EU परिषद ने Decision (CFSP) 2025/1837 के जरिए Decision (CFSP) 2023/1532 में संशोधन किया। इस फैसले से उन प्रतिबंधों को नवीनीकृत किया गया, जिनका संबंध ईरान के रूस के खिलाफ यूक्रेन युद्ध में सैन्य समर्थन, मध्य पूर्व और लाल सागर क्षेत्र में सशस्त्र समूहों तथा संस्थाओं को समर्थन और मध्य पूर्व में नौवहन की स्वतंत्रता को कमजोर करने वाली कार्रवाइयों से है।
EU के उपलब्ध बयान के अनुसार, इस सैन्य-सहायता व्यवस्था के तहत चार लोगों को सूची से हटाया गया। यह मानवाधिकार संबंधी फैसले से अलग है, जिसमें तीन लोगों को सूची से हटाया गया और एक संस्था की प्रविष्टि अपडेट की गई।
इसी वजह से चार और तीन लोगों को हटाए जाने, दोनों तरह की संख्या सामने आती है। दोनों आंकड़े सही हैं, लेकिन वे 24 जुलाई के पैकेज में शामिल अलग-अलग प्रतिबंध व्यवस्थाओं से संबंधित हैं।
इन नौ गैर-EU देशों ने 24 जुलाई के उपायों के अनुरूप अपनी राष्ट्रीय नीतियां करने की घोषणा की:
‘नीतियों को अनुरूप करना’ का अर्थ यह है कि ये देश संबंधित EU परिषद के फैसलों के अनुरूप अपने राष्ट्रीय कदम उठाएंगे। इसका यह अर्थ नहीं है कि वे EU के सदस्य बन गए हैं या EU कानून उनके देशों में अपने-आप लागू हो गया है। अमल उनके अपने राष्ट्रीय कानूनी और प्रशासनिक तंत्र के जरिए होगा।
इन देशों में EU उम्मीदवार देश, यूरोपीय आर्थिक क्षेत्र से जुड़े देश और यूक्रेन शामिल हैं। इससे प्रतिबंधों का व्यावहारिक दायरा EU के 27 सदस्य देशों से आगे बढ़ता है।
2023 में बनाई गई प्रतिबंध व्यवस्था का मूल उद्देश्य रूस के खिलाफ उसके युद्ध में ईरान के सैन्य समर्थन को संबोधित करना था। EU अधिकारियों ने ईरान से ड्रोन और अन्य सैन्य उपकरणों के हस्तांतरण को इन कदमों से जोड़ा है, जिनका इस्तेमाल रूसी सेनाओं ने यूक्रेन के खिलाफ किया है।
29 जुलाई को EU की विदेश नीति प्रमुख काजा कालास ने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से फोन पर बातचीत में तेहरान से रूस को सैन्य समर्थन बंद करने का आग्रह किया। बातचीत में क्षेत्रीय तनाव कम करने और फारस की खाड़ी की स्थिति पर भी चर्चा हुई।
इसी प्रतिबंध व्यवस्था का दायरा बाद में मध्य पूर्व और लाल सागर क्षेत्र में सशस्त्र समूहों तथा संस्थाओं को ईरान के समर्थन तक बढ़ाया गया। EU की चिंता में वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों से जुड़े कदम और क्षेत्रीय सुरक्षा के व्यापक जोखिम शामिल हैं।
22 मई 2026 को EU ने मौजूदा व्यवस्था का दायरा बढ़ाया, ताकि मध्य पूर्व—विशेषकर होरमुज़ जलडमरूमध्य—में नौवहन की स्वतंत्रता के लिए खतरा पैदा करने वाली ईरानी कार्रवाइयों या नीतियों से जुड़े लोगों और संस्थाओं को निशाना बनाया जा सके।
इस विस्तारित आधार के तहत पहली सूचीबद्ध कार्रवाई 8 जून को हुई। कानूनी और प्रतिबंध संबंधी रिपोर्टों के अनुसार, इसमें इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की एक नौसैनिक इकाई और दो लोग शामिल थे।
अलग मानवाधिकार व्यवस्था में दमन, अनुचित या दमनकारी अभियोजन, मौत की सजाएं और सूचना दबाने जैसे आरोप शामिल हैं। 24 जुलाई को सूचीबद्ध छह लोगों में ऐसे न्यायाधीश और एक साइबर समूह से जुड़ा व्यक्ति शामिल था, जिन्हें EU ने इन चिंताओं से जोड़ा।
24 जुलाई का फैसला किसी अकेली कार्रवाई का हिस्सा नहीं था। 2026 में ईरान को लेकर EU के कदमों का क्रम इस प्रकार रहा:
इस क्रम से स्पष्ट है कि EU एक ही प्रतिबंध औजार पर निर्भर नहीं है। वह कथित मानवाधिकार उल्लंघनों के लिए व्यक्तिगत सूचीकरण, सैन्य हस्तांतरण से जुड़े प्रतिबंध और समुद्री तथा क्षेत्रीय सुरक्षा चिंताओं के लिए विस्तारित कानूनी आधार—तीनों का इस्तेमाल कर रहा है।
नौ गैर-EU देशों का EU के साथ जुड़ना उन गतिविधियों के खिलाफ व्यापक यूरोपीय समन्वय का संकेत है, जिन्हें इन फैसलों में निशाना बनाया गया है। इससे यह संभावना भी घट सकती है कि सूचीबद्ध लोग या संस्थाएं EU और साझेदार देशों की अलग-अलग नीतियों का लाभ उठाकर प्रतिबंधों से बच निकलें।
हालांकि, उपलब्ध स्रोत यह साबित नहीं करते कि इन उपायों का व्यावहारिक असर कितना होगा। वे तीसरे देशों, दोहरे उपयोग वाली वस्तुओं या बैंकिंग चैनलों के जरिए प्रतिबंधों से बचने के मौजूदा जोखिमों का कोई मात्रात्मक आकलन भी नहीं देते। इसलिए ऐसे संभावित रास्तों पर निश्चित निष्कर्ष निकालने के लिए अलग साक्ष्य की जरूरत होगी। फिलहाल प्रमाणित विकास यह है कि EU ने प्रतिबंधों का कानूनी दायरा बढ़ाया है और नौ देशों ने इन कदमों के साथ अपनी नीतियों को जोड़ने की घोषणा की है।
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24 जुलाई 2026 को EU ने गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों के आरोप में छह ईरानी नागरिकों को सूचीबद्ध किया और 2023 में बने सैन्य सहायता प्रतिबंधों को नवीनीकृत किया।[1][2]
24 जुलाई 2026 को EU ने गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों के आरोप में छह ईरानी नागरिकों को सूचीबद्ध किया और 2023 में बने सैन्य सहायता प्रतिबंधों को नवीनीकृत किया।[1][2] अल्बानिया, बोस्निया और हर्जेगोविना, आइसलैंड, लिकटेंस्टाइन, मोल्दोवा, मोंटेनेग्रो, नॉर्थ मैसेडोनिया, नॉर्वे और यूक्रेन ने अपनी राष्ट्रीय नीतियों को इन फैसलों के अनुरूप करने की घोषणा की।[1][2]
प्रतिबंधों का दायरा रूस के खिलाफ युद्ध में ईरान के सैन्य समर्थन, मध्य पूर्व और लाल सागर में सशस्त्र समूहों के समर्थन, होरमुज़ जलडमरूमध्य में नौवहन की स्वतंत्रता के लिए खतरे और ईरान के भीतर मानवाधिकार उल्लंघनों तक फैला...