द अटलांटिक के अनुसार, यूक्रेन ने 2026 की शुरुआत में ‘M&Ms’ नाम की एक योजना पर विचार किया था, लेकिन इसे लागू नहीं किया गया। कथित योजना में एक रात में 1,000 तक छोटे, स्वायत्त और AI सक्षम ड्रोन भेजकर मॉस्को क्षेत्र के हवाईअड्डों पर लगातार दबाव बनाने की बात थी। ड्रोन कैमरा आधारित मैप मैचिंग से GPS बाधित होने की स्थिति म...
शोध उत्तर

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: What did The Atlantic report about Ukraine’s proposed “M&Ms” operation to use up to 1,000 autonomous, AI-enabled drones per night to overwhe. Article summary: The Atlantic reported—citing two anonymous sources with direct knowledge—that Ukraine developed but did not execute “M&Ms,” a plan to use autonomous AI-guided drone swarms to impose a prolonged closure of Moscow-area air. Topic tags: general, general web, news, user generated. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, watermarks, charts w
द अटलांटिक ने दो गुमनाम सूत्रों के हवाले से बताया कि यूक्रेनी अधिकारियों ने “M&Ms” नाम से एक ऐसी योजना तैयार की थी, जिसमें मॉस्को क्षेत्र के हवाईअड्डों की ओर स्वायत्त, AI-सक्षम ड्रोन के झुंड भेजे जाने थे। इसका उद्देश्य केवल एयरपोर्ट की इमारतों या रनवे को नष्ट करना नहीं था। योजना के समर्थक कथित तौर पर ऐसा लगातार खतरा पैदा करना चाहते थे, जिससे नागरिक उड़ानें रोकनी पड़ें, अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस मॉस्को से दूरी बनाने लगें और रूस के नेतृत्व पर फिर से बातचीत शुरू करने का दबाव बढ़े।
यह योजना कथित तौर पर 2026 की शुरुआत में सामने आई थी, लेकिन इसे अमल में नहीं लाया गया। इसके विवरण की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। द अटलांटिक ने जानकारी के लिए प्रत्यक्ष जानकारी रखने वाले दो गुमनाम सूत्रों का हवाला दिया, जबकि यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की के कार्यालय के एक अज्ञात अधिकारी ने ऐसी AI-स्वॉर्म योजना के अस्तित्व से इनकार किया।
रिपोर्ट के मुताबिक, “M&Ms” नाम छोटे, सस्ते और लगभग एक जैसे दिखने वाले बड़ी संख्या में ड्रोन की ओर संकेत करता था। योजना में एक ही रात में 1,000 तक ड्रोन इस्तेमाल करने का विचार था। इतने बड़े झुंड का मकसद रूसी वायु-रक्षा प्रणाली पर दबाव डालना और मॉस्को के आसपास विमानन संचालन में बार-बार बाधा पैदा करना था।
इस योजना का कथित अंतिम लक्ष्य मॉस्को के नागरिक हवाई क्षेत्र को लंबे समय तक बंद कराना था। ड्रोन रनवे या टर्मिनल को सीधे नुकसान न भी पहुंचाते, तब भी बार-बार घुसपैठ से विमान यात्रियों के लिए जोखिम बढ़ता और एयरपोर्ट प्राधिकरणों तथा एयरलाइंस को उड़ानें रोकने या उनका मार्ग बदलने पर मजबूर होना पड़ सकता था।
इस रणनीति का कुछ आधार पहले की घटनाओं में देखा गया था। यूक्रेनी ड्रोन गतिविधियों के कारण मॉस्को के हवाईअड्डों पर अस्थायी पाबंदियां लग चुकी थीं। शेरेमेत्येवो एयरपोर्ट पर उड़ानों में देरी और डायवर्जन की भी खबरें आई थीं।
रिपोर्ट के अनुसार, इन ड्रोन को लगातार किसी मानव ऑपरेटर के नियंत्रण पर निर्भर रहने के बजाय स्वायत्त रूप से उड़ना था। उनका मार्गदर्शन तंत्र कथित तौर पर लाइव कैमरा तस्वीरों—जैसे सड़कें, इमारतें, भू-भाग और आसपास की अन्य दृश्य विशेषताओं—की पहले से सेव किए गए नक्शों से तुलना करता।
ऐसी दृश्य-आधारित मैप-मैचिंग तकनीक का उद्देश्य विमान को अपनी स्थिति का अनुमान लगाने में मदद करना होता है, खासकर तब जब सैटेलाइट नेविगेशन या GPS भरोसेमंद न हो या बाधित किया जा रहा हो। इस कथित योजना में ड्रोन इन्हीं दृश्य संकेतों की मदद से रास्ते पर बने रहने और लक्ष्य क्षेत्र तक पहुंचने वाले थे।
हालांकि, यह महत्वपूर्ण है कि उपलब्ध साक्ष्यों में इस तकनीकी क्षमता की स्वतंत्र पुष्टि नहीं है। ये विवरण एक कथित प्रस्ताव का वर्णन करते हैं, न कि यूक्रेन की सिद्ध क्षमता या वास्तव में चलाए गए किसी अभियान का।
कथित योजना का लक्ष्य विदेशी एयरलाइंस के लिए मॉस्को की उड़ानों को इतना जोखिमभरा बनाना था कि वे वहां संचालन जारी न रख सकें। इसके समर्थकों को उम्मीद थी कि अंतरराष्ट्रीय हवाई संपर्क टूटने का असर रूस के संपन्न यात्रियों पर पड़ेगा—खासकर उन लोगों पर, जो इस्तांबुल और दुबई जैसे हवाई-परिवहन केंद्रों के जरिए विदेश यात्रा करते हैं।
इस तरह एयरपोर्ट में व्यवधान को राजनीतिक और आर्थिक दबाव में बदला जा सकता था। ड्रोन का इस्तेमाल केवल भौतिक लक्ष्यों पर हमला करने के लिए नहीं, बल्कि अनिश्चितता और बार-बार उड़ान रद्द होने के जरिए मॉस्को को कम जुड़ा हुआ और रूस के प्रभावशाली वर्गों के लिए अधिक महंगा बनाने के लिए किया जाना था।
रिपोर्टिंग के अनुसार, व्यापक लक्ष्य राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर फिर से युद्धविराम वार्ता शुरू करने का दबाव बढ़ाना था।
कथित प्रस्ताव से ज़ेलेंस्की चिंतित थे, क्योंकि एयरपोर्ट के आसपास उड़ता हुआ स्वायत्त ड्रोन किसी नागरिक विमान से टकरा सकता था या उसे निशाना बना सकता था। ऐसी घटना में यात्रियों और चालक दल की जान जा सकती थी। यूक्रेनी नेतृत्व से जुड़ी चिंताओं में यह आशंका भी शामिल थी कि ऐसे हमले को “पायरेसी” यानी विमान के खिलाफ समुद्री डकैती-जैसी आपराधिक कार्रवाई के रूप में वर्णित किया जा सकता है।
इस योजना ने स्वायत्त हथियारों को लेकर एक बड़ा कानूनी और मानवीय सवाल भी खड़ा किया: क्या लगातार मानव नियंत्रण के बिना काम करने वाली प्रणाली सैन्य लक्ष्य और नागरिक विमान, एयरपोर्ट कर्मचारियों या अन्य संरक्षित लोगों और वस्तुओं के बीच विश्वसनीय अंतर कर सकती है?
द अटलांटिक ने इस जोखिम को खास तौर पर गंभीर बताया। यदि किसी अभियान का व्यावहारिक प्रभाव किसी स्पष्ट सैन्य लक्ष्य पर हमले के बजाय नागरिक विमानन को खतरे में डालना हो, तो उसके मानवीय और कानूनी परिणाम और भी गंभीर हो सकते हैं।
चूंकि यह अभियान चलाया ही नहीं गया, इसलिए उपलब्ध जानकारी यह तय नहीं कर सकती कि ड्रोन वास्तविक परिस्थितियों में कैसे काम करते या किसी खास हमले का अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत मूल्यांकन किस तरह होता।
द अटलांटिक की रिपोर्ट में उस समय यूक्रेन के रक्षा मंत्री रहे मायखाइलो फेदोरोव को योजना का प्रमुख वास्तुकार बताया गया। ज़ेलेंस्की की आपत्तियों के बावजूद तैयारियां कुछ समय तक चलती रहीं, लेकिन जुलाई में सरकार में फेरबदल के दौरान फेदोरोव को पद से हटाए जाने के बाद योजना कथित तौर पर ठहर गई।
फेदोरोव यूक्रेन की ड्रोन युद्ध क्षमता बढ़ाने की कोशिशों से गहराई से जुड़े रहे हैं। इससे पहले की रिपोर्टिंग में उन्हें इस तकनीक के प्रमुख समर्थक और 2023 में यूक्रेन की पहली हमलावर ड्रोन इकाइयों के गठन से जुड़े नेता के रूप में बताया गया था।
उनकी बर्खास्तगी के बाद नागरिक-सामाजिक संगठनों में नाराजगी और सांसदों के विरोध-प्रदर्शन हुए। इससे इस पूरे मामले में घरेलू राजनीतिक विवाद भी जुड़ गया।
उपलब्ध स्रोत फेदोरोव को हटाए जाने के बाद पैदा हुए राजनीतिक मतभेदों का उल्लेख करते हैं, लेकिन वे स्वतंत्र रूप से यह साबित नहीं करते कि एयरपोर्ट योजना को फिर से शुरू किया जा सकता है। सबसे सुरक्षित निष्कर्ष यही है कि कथित अभियान लागू नहीं हुआ और उसकी भविष्य की स्थिति स्पष्ट नहीं है।
मॉस्को के एयरपोर्ट से जुड़ा यह कथित विचार रूस के भीतर यूक्रेन के लंबी दूरी वाले ड्रोन अभियान में तेजी के दौर में सामने आया। द अटलांटिक ने रूसी ऊर्जा ढांचे, जिनमें बड़ी तेल रिफाइनरियां भी शामिल थीं, पर हमलों और कुछ क्षेत्रों में ईंधन की कमी तथा पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारों की खबर दी।
अन्य रिपोर्टों में मॉस्को के आसपास यूक्रेनी ड्रोन हमलों और अस्थायी एयरपोर्ट बंदी का जिक्र किया गया था। इससे यह समझ आता है कि यूक्रेनी योजनाकारों को बार-बार नागरिक विमानन बाधित करना दबाव बनाने का एक संभावित साधन क्यों लगा होगा।
फिर भी, यूक्रेनी सरकार की सार्वजनिक प्रतिक्रिया विरोधाभासी रही। ज़ेलेंस्की के प्रवक्ता ने टिप्पणी करने से इनकार किया, जबकि एक अन्य अज्ञात अधिकारी ने AI-स्वॉर्म योजना को “पूरी तरह बकवास” बताया। हालांकि, उसी अधिकारी ने माना कि यूक्रेन रूसी एयरपोर्ट को अस्थायी रूप से बंद कराने में रुचि रखता है। उनका कहना था कि यूक्रेन के पास ऐसे पर्याप्त सटीक और भरोसेमंद लंबी दूरी के हथियार नहीं हैं, जिनसे नागरिकों के लिए अस्वीकार्य जोखिम पैदा किए बिना एयरपोर्ट पर हमला किया जा सके।
सबसे ठोस निष्कर्ष यह है कि द अटलांटिक ने एक कथित यूक्रेनी प्रस्ताव की रिपोर्ट दी है, किसी सफल या पूर्ण हमले की नहीं। निम्नलिखित बिंदु रिपोर्ट किए गए हैं, लेकिन स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हुए हैं:
सबसे अहम सावधानी यह है कि रिपोर्ट के अनुसार अभियान कभी चलाया नहीं गया। इसके विस्तृत दावे गुमनाम सूत्रों पर आधारित हैं और एक यूक्रेनी अधिकारी ने योजना के अस्तित्व से इनकार किया है। इसलिए यह कहानी एक कथित रणनीतिक अवधारणा का विवरण है—इस बात का प्रमाण नहीं कि यूक्रेन के पास मॉस्को के हवाईअड्डों को बंद कराने में सक्षम, तुरंत इस्तेमाल किए जा सकने वाले ड्रोन-झुंड मौजूद थे।
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द अटलांटिक के अनुसार, यूक्रेन ने 2026 की शुरुआत में ‘M&Ms’ नाम की एक योजना पर विचार किया था, लेकिन इसे लागू नहीं किया गया।
द अटलांटिक के अनुसार, यूक्रेन ने 2026 की शुरुआत में ‘M&Ms’ नाम की एक योजना पर विचार किया था, लेकिन इसे लागू नहीं किया गया। कथित योजना में एक रात में 1,000 तक छोटे, स्वायत्त और AI सक्षम ड्रोन भेजकर मॉस्को क्षेत्र के हवाईअड्डों पर लगातार दबाव बनाने की बात थी।
ड्रोन कैमरा आधारित मैप मैचिंग से GPS बाधित होने की स्थिति में रास्ता खोज सकते थे, लेकिन इस तकनीकी दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।