तुर्किये के दुरुपिनार स्थल पर 2026 में हुए अभियान में नक्शे तैयार किए गए, जमीन के भीतर देखने के लिए ग्राउंड-पेनेट्रेटिंग रडार (GPR) इस्तेमाल किया गया, मिट्टी के नमूने लिए गए और ड्रिलिंग से भूमिगत चट्टान के कोर निकाले गए। शोधकर्ताओं ने जैविक पदार्थ से भरपूर सामग्री और जमीन के नीचे कुछ विसंगतियों की बात कही है। लेकिन ये शुरुआती अवलोकन यह नहीं दिखाते कि दुरुपिनार मानव-निर्मित ढांचा है या नूह की नाव।
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अभियान में क्या किया गया
करीब 20 शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों की अंतरराष्ट्रीय टीम ने स्थल का सर्वे किया। उसने लगभग 150 स्थानों से करीब 1,000 मिट्टी के नमूने इकट्ठा किए और संरचना के नीचे की परतों का पता लगाने के लिए GPR सर्वे किया।
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ड्रिलिंग से जमीन के भीतर की सामग्री के नमूने निकाले गए। रिपोर्टों के अनुसार, कोर करीब 18 मीटर तक की गहराई से हासिल किए गए हैं। टीम इनकी संरचना, जैविक पदार्थ और परतों के क्रम का प्रयोगशाला में विश्लेषण करना चाहती है।
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14 सतह को स्कैन करने के बजाय ड्रिल कोर से भौतिक नमूना मिलता है, लेकिन उसके निष्कर्षों को भूगर्भीय संदर्भ में समझना फिर भी जरूरी है।
टीम ने GOPHER नाम के कैमरा-सुसज्जित भूमिगत रोबोट का भी जिक्र किया है। इसे सर्वे में पहचानी गई ऐसी खाली जगहों या गलियारों में भेजने की योजना है जहां पहुंच संभव हो। उपलब्ध रिपोर्टों में रोबोट भेजने की योजना का वर्णन है, उसके कैमरे से मिले पुष्ट नतीजों का नहीं।
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शुरुआती संकेत क्या बताते हैं—और क्या नहीं
प्रारंभिक रिपोर्टों में कोर नमूनों की कुछ परतों में जैविक पदार्थ की अधिकता, मिट्टी के कुछ नमूनों में अधिक कार्बन और जमीन के नीचे संभावित खाली जगहों या गलियारों का उल्लेख है। शोधकर्ताओं ने रडार डेटा में परतदार और समकोण जैसी दिखने वाली विशेषताओं की ओर भी ध्यान दिलाया है।
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8 फिलहाल ये अभियान और उससे जुड़ी रिपोर्टिंग में दर्ज अवलोकन हैं—इस बात का प्रमाण नहीं कि विशेषताएं इंसानों ने बनाई थीं।
ड्रिलिंग के दौरान करीब 4 से 5 मीटर नीचे एक बेहद कठोर परत से टकराकर ड्रिल बिट टूटने की खबर है। अभियान से जुड़े लोगों ने अनुमान जताया कि यह जीवाश्मीकृत लकड़ी हो सकती है, लेकिन प्रयोगशाला जांच से इसकी संरचना की पुष्टि नहीं हुई है।
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14 किसी परत का कठोर होना अपने आप में यह नहीं बताता कि वह किस पदार्थ की है या कभी किसी नाव का हिस्सा थी।
GPR जमीन के नीचे मौजूद बदलावों के संकेत दे सकता है। लेकिन रडार में दिखी विसंगति या ज्यामितीय आकार जैसा संकेत अपने आप में दीवार, कक्ष या जहाज का ढांचा साबित नहीं करता। मिट्टी और रडार के नतीजों का महत्व आगे के विश्लेषण और प्राकृतिक कारणों को जांचने पर निर्भर करेगा।
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नूह की नाव होने का दावा अब भी अपुष्ट क्यों है
दुरुपिनार की नाव जैसी बाहरी आकृति ने नूह की नाव से जुड़ी अटकलों को हवा दी है। लेकिन केवल आकार से यह साबित नहीं होता कि कोई स्थल मानव-निर्मित जहाज है। भूवैज्ञानिकों ने प्राकृतिक उत्पत्ति को संभव माना है, और उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक अब तक स्वतंत्र रूप से सत्यापित पुरातात्विक प्रमाण नहीं मिला है जो यह स्थापित करे कि संरचना इंसानों ने बनाई थी।
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जैविक पदार्थ, कठोर परत और रडार में दिखने वाले अंतर आगे जांच के योग्य हो सकते हैं, पर इनमें से कोई भी संकेत अकेले निर्णायक नहीं है। जब तक प्रयोगशाला विश्लेषण यह न बताए कि नमूनों में कौन-से पदार्थ हैं और भूमिगत विशेषताएं कृत्रिम हैं या नहीं, नूह की नाव वाली व्याख्या अपुष्ट ही रहेगी।
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आगे क्या होगा
टीम कोर नमूनों की संरचना, जैविक सामग्री और परतों के क्रम की जांच करने की योजना बना रही है। मिट्टी और रडार के नतीजों का भी आकलन होना है। टीम ने पहले के सर्वे में दिखी और पहुंच योग्य विशेषताओं की जांच के लिए GOPHER रोबोट इस्तेमाल करने की योजना भी बताई है।
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रिपोर्टों के मुताबिक, अधिक विस्तृत नतीजे 2027 में आने की उम्मीद है। उनसे संरचना में मौजूद पदार्थों और भूमिगत विसंगतियों को समझने में मदद मिल सकती है। लेकिन जब तक नतीजे यह न दिखाएं कि ये संकेत प्राकृतिक भूगर्भीय प्रक्रियाओं से अलग किसी निर्माण के प्रमाण हैं, इन्हें किसी जहाज का सबूत नहीं मानना चाहिए।
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