तेहरान से ईरानी संसद के सदस्य कमरान ग़ज़नफ़री ने अमेरिका-ईरान संघर्ष को अलग-थलग क्षेत्रीय विवाद नहीं, बल्कि बड़ी शक्तियों के बीच चल रही व्यापक प्रतिस्पर्धा का एक मोर्चा बताया। 9 सितंबर को ईरानी लेबर न्यूज़ एजेंसी (ILNA) को दिए साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि दुनिया “व्यावहारिक रूप से तीसरे विश्व युद्ध के कगार पर” है। उनके अनुसार, यूरोप, पश्चिम एशिया और पूर्वी एशिया में एक साथ बढ़ते तनाव किसी बड़े युद्ध का रूप ले सकते हैं।
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यूक्रेन और ताइवान से संबंध कैसे जोड़ा
ग़ज़नफ़री का तर्क था कि रूस के खिलाफ यूक्रेन को NATO का समर्थन, साथ ही मॉस्को के ब्रिटेन और जर्मनी के साथ तनाव, यूरोप में युद्ध फैलने की आशंका बढ़ाते हैं। उन्होंने ताइवान को लेकर अमेरिका और चीन के बीच विवाद को भी एक अन्य संभावित टकराव-बिंदु बताया। उनके नजरिये में ये अलग-अलग संकट एक-दूसरे को प्रभावित कर व्यापक संघर्ष में बदल सकते हैं।
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हालांकि, यह एक कट्टरपंथी ईरानी सांसद की राजनीतिक व्याख्या है। उपलब्ध रिपोर्टों से यह सिद्ध नहीं होता कि ईरान, रूस और चीन किसी एकीकृत सैन्य कमान के तहत काम कर रहे हैं या व्यापक युद्ध अवश्यंभावी है।
NPT और अमेरिका से वार्ता पर उनका रुख
ILNA साक्षात्कार में ग़ज़नफ़री ने कहा कि ईरानी संसद परमाणु अप्रसार संधि—NPT (न्यूक्लियर नॉन-प्रोलिफरेशन ट्रीटी)—से देश के हटने के प्रस्ताव पर दोबारा विचार कर सकती है। यह संसद में विचार की संभावना भर थी, न कि ईरान द्वारा संधि छोड़ने की कोई घोषित नीति।
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उन्होंने ईरानी वार्ताकारों को भी चेताया कि वे सर्वोच्च नेता की बताई “रेड लाइन्स” का उल्लंघन न करें। पहले की सार्वजनिक टिप्पणियों में ग़ज़नफ़री ने आरोप लगाया था कि लगभग दो महीने चली वार्ताओं के दौरान अमेरिका ने ईरान और उसके वार्ता दल को धमकियां दीं। उनका कहना था कि ऐसी परिस्थितियों में हुआ कोई समझौता वैधता खो देगा।
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इन बयानों से उनका रुख साफ होता है: कूटनीति केवल सख्त वैचारिक और रणनीतिक सीमाओं के भीतर स्वीकार्य है, जबकि अधिक टकरावपूर्ण परमाणु नीति की बहस को खुला रखा जाना चाहिए।
बयान के समय समुद्र में बढ़ता सैन्य तनाव
ग़ज़नफ़री की चेतावनी ऐसे समय आई जब समुद्र में और क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों के आसपास तनाव तेज हो गया था। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कहा कि उसकी सेनाओं ने 8 सितंबर को पांच ईरानी कच्चा तेल वाहक जहाजों को नष्ट किया। CENTCOM के मुताबिक, इससे पहले इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दो दिनों में दो बार बैलिस्टिक मिसाइलों से एक अमेरिकी नौसेना युद्धपोत को निशाना बनाने की कोशिश की थी। अमेरिकी कमान ने कहा कि चार जहाज ओमान की खाड़ी में और एक खार्ग द्वीप के पास था; युद्धपोत हमलों से बच निकला और किसी अमेरिकी कर्मी को नुकसान नहीं हुआ।
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रिपोर्टों के अनुसार, इसके बाद ईरान ने जॉर्डन के अल-अज़राक हवाई अड्डे पर तैनात अमेरिकी बलों की ओर मिसाइलें दागीं।
25 फिर भी, हर हमले से जुड़े दावों को सावधानी से देखना जरूरी है: ईरान और अमेरिका के विवरण परस्पर विरोधी रहे, और CENTCOM ने साफ तौर पर इस दावे से इनकार किया कि किसी अमेरिकी नौसेना युद्धपोत को निशाना लगा था।
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इस टकराव ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य से तेल परिवहन को लेकर चिंता भी बढ़ाई। रिपोर्टों में कहा गया कि आपूर्ति और जहाजरानी बाधित होने के डर से ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया।
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इस बयान को कैसे समझें
ग़ज़नफ़री की टिप्पणियां उस कट्टरपंथी सोच को दर्शाती हैं जिसमें वॉशिंगटन के साथ ईरान का टकराव, NATO के साथ रूस के संघर्ष, ताइवान पर अमेरिका-चीन प्रतिस्पर्धा और अमेरिका-नेतृत्व वाली वैश्विक व्यवस्था के प्रतिरोध से जुड़ा हुआ है। इसका महत्व मुख्यतः ईरानी घरेलू राजनीति में है: यह वार्ता में रियायतों और परमाणु नीति पर संयम के खिलाफ दबाव का संकेत देता है।
इसे स्वतंत्र और निश्चित भविष्यवाणी नहीं मानना चाहिए कि वैश्विक युद्ध निकट है। तत्काल सत्यापित तस्वीर कथित हमलों, अमेरिकी जवाबी कार्रवाई और ऊर्जा बाजार के बढ़ते जोखिम की है—न कि इस बात का प्रमाण कि ग़ज़नफ़री द्वारा बताए गए अलग-अलग संघर्ष अब एक ही युद्ध बन चुके हैं।
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