ताइवान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि राष्ट्रपति लाइ चिंग‑ते और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच संभावित बातचीत का वह स्वागत करेगा। लाइ का कहना है कि वे बातचीत में ताइवान स्ट्रेट की शांति, चीन की बढ़ती सैन्य दबाव नीति और ताइवान की बढ़ती रक्षा तैयारी पर जोर देंगे। यदि यह कॉल होती है तो यह ऐतिहासिक होगी, क्योंकि 1...

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: What did Taiwan’s Ministry of Foreign Affairs say about President Lai Ching-te potentially speaking with U.S. President Donald Trump, what k. Article summary: Taiwan’s Ministry of Foreign Affairs said Taipei would welcome an opportunity for President Lai Ching-te to speak directly with U.S. President Donald Trump, framing such contact as useful amid concerns over U.S.-China di. Topic tags: general, general web, user generated. Reference image context from search candidates: Reference image 1: visual subject "Taiwan's Foreign Ministry said on Thursday that President Lai Ching-te would be be happy to speak with U.S. President Donald Trump." source context "UPDATE 2-Taiwan says President Lai would be happy to talk to Trump" Reference image 2: visual subject "Taiwan's Foreign Ministry said on Thursday that Presi
ताइवान सरकार ने संकेत दिया है कि यदि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ताइवान के राष्ट्रपति लाइ चिंग‑ते के बीच सीधी बातचीत होती है, तो वह उसका स्वागत करेगी। ताइपे के अधिकारियों का मानना है कि ऐसे संपर्क से नीति को स्पष्ट करने और ताइवान स्ट्रेट में स्थिरता को मजबूत करने में मदद मिल सकती है, खासकर उस समय जब अमेरिका‑चीन संबंधों और ताइवान को संभावित हथियार बिक्री को लेकर चर्चा जारी है ।
राष्ट्रपति लाइ ने भी सार्वजनिक रूप से बताया है कि यदि उन्हें ट्रंप से बात करने का मौका मिलता है तो वे किन प्रमुख मुद्दों पर जोर देंगे।
ताइवान के विदेश मंत्रालय (MOFA) ने कहा कि ताइपे राष्ट्रपति लाइ और ट्रंप के बीच सीधे संवाद के अवसर का स्वागत करेगा। उप‑विदेश मंत्री चेन मिंग‑ची के अनुसार, ऐसी बातचीत वॉशिंगटन के साथ खुले संचार को बनाए रखने और हाल की अमेरिका‑चीन चर्चाओं के बाद पैदा हुई चिंताओं को संबोधित करने का मौका दे सकती है ।
ताइवान के लिए अमेरिका उसका सबसे महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा साझेदार है, इसलिए स्पष्ट संवाद को क्षेत्रीय स्थिरता और प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखने के लिए जरूरी माना जाता है।
राष्ट्रपति लाइ ने कहा है कि संभावित बातचीत में वे यह रेखांकित करेंगे कि ताइवान स्ट्रेट में शांति और स्थिरता सिर्फ ताइवान ही नहीं बल्कि वैश्विक सुरक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण है ।
ताइवान लंबे समय से इस बात पर जोर देता आया है कि स्ट्रेट में वर्तमान स्थिति—यानी किसी भी पक्ष द्वारा एकतरफा बदलाव न करना—क्षेत्रीय संतुलन का आधार है।
लाइ का एक प्रमुख संदेश यह भी होगा कि क्षेत्र में बढ़ते तनाव के लिए चीन जिम्मेदार है।
उन्होंने कहा है कि यदि बातचीत होती है तो वे ट्रंप को बताएंगे कि बीजिंग की सैन्य गतिविधियां और दबाव की रणनीति ताइवान स्ट्रेट में शांति को कमजोर कर रही हैं और क्षेत्रीय अस्थिरता पैदा कर रही हैं ।
ताइवान के नेता अक्सर यह तर्क देते हैं कि ऐसी गतिविधियां सिर्फ ताइवान ही नहीं बल्कि पूरे इंडो‑पैसिफिक क्षेत्र की सुरक्षा को प्रभावित करती हैं।
लाइ यह भी बताना चाहते हैं कि ताइवान अपना रक्षा बजट बढ़ा रहा है और अमेरिका से हथियार खरीद जारी रखना चाहता है।
उनके अनुसार ताइवान की रक्षा क्षमता को मजबूत करना युद्ध भड़काने के लिए नहीं, बल्कि संघर्ष को रोकने के लिए है। उन्होंने अमेरिकी हथियारों की खरीद को “शांति बनाए रखने के लिए आवश्यक” बताया है और इसे विश्वसनीय प्रतिरोध की रणनीति का हिस्सा कहा है ।
ताइवान का तर्क है कि मजबूत रक्षा क्षमता संभावित विरोधियों की गलत गणना को रोकती है और स्थिरता बनाए रखने में मदद करती है।
लाइ के बयान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा ताइवान की राजनीतिक स्थिति और आत्मनिर्णय के अधिकार से जुड़ा है।
उन्होंने कहा है कि किसी भी देश को ताइवान को अपने में मिलाने का अधिकार नहीं है और द्वीप का भविष्य “बाहरी ताकतों” द्वारा तय नहीं किया जा सकता ।
ताइपे की आधिकारिक स्थिति यह है कि ताइवान पहले से ही एक लोकतांत्रिक और स्वशासित व्यवस्था है, इसलिए उसके भविष्य का निर्णय उसके अपने नागरिकों को करना चाहिए।
यदि ट्रंप और लाइ के बीच सीधी बातचीत होती है तो उसे कूटनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाएगा।
अमेरिका ने 1979 में ताइपे से राजनयिक मान्यता हटाकर बीजिंग को मान्यता दी थी, और उसके बाद से वॉशिंगटन आम तौर पर ताइवान के राष्ट्रपति के साथ सीधे नेता‑स्तर पर संपर्क से बचता रहा है, ताकि चीन के साथ संबंधों का संतुलन बना रहे ।
हालांकि 2016 में डोनाल्ड ट्रंप ने ताइवान की तत्कालीन राष्ट्रपति त्साई इंग‑वेन से फोन पर बात की थी, लेकिन वह बातचीत उनके राष्ट्रपति पद संभालने से पहले हुई थी । इसलिए पद पर रहते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति और ताइवान के राष्ट्रपति के बीच सीधी बातचीत अब भी एक असामान्य कदम माना जाएगा।
ताइवान का यह रुख उसकी व्यापक रणनीति को दिखाता है—अमेरिका के साथ करीबी संवाद बनाए रखना, क्षेत्रीय स्थिरता पर जोर देना और चीन के संप्रभुता दावों का विरोध करना।
यह अभी स्पष्ट नहीं है कि ट्रंप और लाइ के बीच वास्तव में कॉल होगी या नहीं। लेकिन लाइ द्वारा बताए गए संदेश—ताइवान स्ट्रेट की स्थिरता, चीन की गतिविधियों को लेकर चेतावनी, अमेरिका के साथ रक्षा सहयोग और ताइवान के आत्मनिर्णय का अधिकार—संभावित बातचीत के मुख्य विषय बन सकते हैं।
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ताइवान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि राष्ट्रपति लाइ चिंग‑ते और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच संभावित बातचीत का वह स्वागत करेगा।
ताइवान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि राष्ट्रपति लाइ चिंग‑ते और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच संभावित बातचीत का वह स्वागत करेगा। लाइ का कहना है कि वे बातचीत में ताइवान स्ट्रेट की शांति, चीन की बढ़ती सैन्य दबाव नीति और ताइवान की बढ़ती रक्षा तैयारी पर जोर देंगे।
यदि यह कॉल होती है तो यह ऐतिहासिक होगी, क्योंकि 1979 में अमेरिका द्वारा बीजिंग को मान्यता देने के बाद किसी मौजूदा अमेरिकी राष्ट्रपति ने ताइवान के राष्ट्रपति से सीधे बात नहीं की है [1][13]।