ताइवान ‘ड्रोन डिप्लोमेसी’ के जरिए चीन पर निर्भरता से मुक्त लोकतांत्रिक ड्रोन सप्लाई चेन बनाना चाहता है। विदेश मंत्रालय ने Drone Diplomacy Task Force बनाई है जो अंतरराष्ट्रीय साझेदारी और घरेलू ड्रोन उद्योग को बढ़ावा दे रही है। यूरोप को ताइवान के ड्रोन निर्यात में तेज उछाल आया है—2024 में 2,574 यूनिट से बढ़कर 2025 में...

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: What did Taiwan’s Foreign Ministry official Chiang Zhen-wei say about Taiwan’s “drone diplomacy” at the Taiwan‑Germany Aerospace Conference,. Article summary: Chiang Zhen-wei said Taiwan wants to use “drone diplomacy” to make drones a strategic industry and to help build democratic drone supply chains that do not rely on China. He framed Taiwan as a manufacturing-capable, reli. Topic tags: general, general web, user generated. Reference image context from search candidates: Reference image 1: visual subject "May 7, 2026 · According to the MOFA, Chiang said Taiwan's manufacturing capabilities give the country a great advantage in the global drone sector. Amidst the" source context "MOFA official highlights Taiwan’s drone prowess - Taiwan Today" Reference image 2: visual subject "May 7, 2026 · Chiang Zhen-wei says Taiw
ताइवान अब ड्रोन तकनीक को अपनी विदेश नीति और औद्योगिक रणनीति का अहम हिस्सा बना रहा है। ताइपेई में आयोजित ताइवान‑जर्मनी एयरोस्पेस कॉन्फ़्रेंस में विदेश मंत्रालय के अधिकारी च्यांग झेन‑वेई (Chiang Zhen‑wei) ने बताया कि सरकार “ड्रोन डिप्लोमेसी” के जरिए वैश्विक साझेदारियों का नेटवर्क बनाना चाहती है और ड्रोन सप्लाई चेन को चीन पर निर्भरता से मुक्त करना चाहती है।
अपने कीनोट भाषण “Drone Taiwan” में च्यांग ने कहा कि ताइवान की तकनीकी और मैन्युफैक्चरिंग क्षमता उसे एक ऐसे लोकतांत्रिक, चीन‑स्वतंत्र ड्रोन इकोसिस्टम के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका दे सकती है, जिसमें यूरोप, एशिया‑प्रशांत और समान विचार वाले देश शामिल हों।
च्यांग के अनुसार दुनिया भर में सुरक्षित और भरोसेमंद तकनीकी सप्लाई चेन की मांग तेजी से बढ़ रही है। इसी वजह से ताइवान खुद को एक ऐसे विकल्प के रूप में पेश कर रहा है जो चीन से अलग ड्रोन उत्पादन और आपूर्ति नेटवर्क बनाने में मदद कर सकता है।
उन्होंने कहा कि ताइवान के पास “बेहतर मैन्युफैक्चरिंग क्षमता” है और वह तथाकथित “नॉन‑रेड” ड्रोन सप्लाई चेन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। यह शब्द ताइवान में उन तकनीकी नेटवर्क के लिए इस्तेमाल होता है जो अधिनायकवादी देशों के घटकों पर निर्भर नहीं होते।
यह रणनीति ताइवान की पहले की “चिप डिप्लोमेसी” से मिलती‑जुलती है, जिसके जरिए उसने सेमीकंडक्टर उद्योग में वैश्विक प्रभाव बनाया।
च्यांग ने कहा कि ताइवान सेमीकंडक्टर की तरह ही ड्रोन को भी एक रणनीतिक उद्योग बनाना चाहता है। इसके लिए विदेश मंत्रालय ने Drone Diplomacy Task Force बनाई है।
यह टास्क फोर्स मुख्य रूप से तीन कामों पर ध्यान देती है:
च्यांग ने यह भी कहा कि बदलते भू‑राजनीतिक माहौल में ड्रोन तकनीक राष्ट्रीय सुरक्षा, औद्योगिक क्षमता और आर्थिक स्थिरता के लिए तेजी से महत्वपूर्ण बनती जा रही है।
ताइवान‑जर्मनी एयरोस्पेस कॉन्फ़्रेंस स्वयं इस रणनीति का उदाहरण है। इसमें ताइवानी और जर्मन कंपनियों के बीच तकनीकी व व्यावसायिक सहयोग पर चर्चा हुई।
च्यांग के मुताबिक ताइवान का लक्ष्य उन देशों के साथ काम करना है जिनके राजनीतिक और सुरक्षा हित समान हों, ताकि मिलकर ड्रोन तकनीक, निर्माण क्षमता और नए उपयोग विकसित किए जा सकें।
ताइवान सिर्फ ड्रोन निर्माण तक सीमित नहीं रहना चाहता। उसका उद्देश्य ड्रोन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के अनुप्रयोगों में क्षेत्रीय नवाचार केंद्र बनना है।
च्यांग ने बताया कि देश में स्थापित शोध संस्थान और तकनीकी कार्यक्रम इस दिशा में काम कर रहे हैं, ताकि ताइवान लोकतांत्रिक ड्रोन इकोसिस्टम का एशिया‑प्रशांत केंद्र बन सके।
ताइवान के ड्रोन उद्योग की बढ़ती मांग का असर उसके निर्यात आंकड़ों में भी दिख रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार यूरोप को ताइवान के तैयार ड्रोन का निर्यात 2024 में 2,574 यूनिट से बढ़कर 2025 में 107,433 यूनिट हो गया।
यह रफ्तार 2026 में भी जारी रही, जब सिर्फ पहली तिमाही में ही 136,010 ड्रोन यूरोप भेजे गए।
इसी अवधि में कुल ड्रोन निर्यात लगभग 100 मिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया, जो वैश्विक बाजार में ताइवानी UAV प्रणालियों की बढ़ती मांग को दिखाता है।
ताइवान की यह रणनीति सिर्फ तकनीक या व्यापार तक सीमित नहीं है। इसमें औद्योगिक नीति, सुरक्षा सहयोग और कूटनीति तीनों का मिश्रण है।
अगर यह पहल सफल होती है, तो ड्रोन भी सेमीकंडक्टर की तरह ऐसा क्षेत्र बन सकते हैं जिसमें ताइवान वैश्विक सप्लाई चेन में बेहद प्रभावशाली भूमिका निभाए।
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ताइवान ‘ड्रोन डिप्लोमेसी’ के जरिए चीन पर निर्भरता से मुक्त लोकतांत्रिक ड्रोन सप्लाई चेन बनाना चाहता है।
ताइवान ‘ड्रोन डिप्लोमेसी’ के जरिए चीन पर निर्भरता से मुक्त लोकतांत्रिक ड्रोन सप्लाई चेन बनाना चाहता है। विदेश मंत्रालय ने Drone Diplomacy Task Force बनाई है जो अंतरराष्ट्रीय साझेदारी और घरेलू ड्रोन उद्योग को बढ़ावा दे रही है।
यूरोप को ताइवान के ड्रोन निर्यात में तेज उछाल आया है—2024 में 2,574 यूनिट से बढ़कर 2025 में 107,433 यूनिट।