स्विट्जरलैंड की संघीय आपराधिक अदालत ने पियरे मिराबो को विदेशी लोक अधिकारी को रिश्वत देने और गंभीर धनशोधन का दोषी ठहराया है। अदालत ने उन्हें दो वर्ष की निलंबित कारावास सजा सुनाई। हालांकि, अलग से लगाए गए दस्तावेज़ जालसाजी के आरोप में उन्हें बरी कर दिया गया।
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मिराबो स्विस बैंकर्स एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष और जिनेवा के निजी बैंक Mirabaud & Cie के पूर्व भागीदार रहे हैं।
अदालत का फैसला क्या है?
बेलिनज़ोना स्थित अदालत ने स्विस अटॉर्नी जनरल कार्यालय के आरोपपत्र में बताए गए तथ्यों को सरलीकृत प्रक्रिया में स्वीकार किया। रिपोर्टों के अनुसार, मिराबो ने मामले के आधारभूत तथ्यों को स्वीकार किया था और अदालत ने उनसे पूछताछ के बाद फैसला सुनाया।
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दोषसिद्धि दो अपराधों में हुई:
- विदेशी लोक अधिकारी को रिश्वत देना
- गंभीर धनशोधन
वहीं, दस्तावेज़ जालसाजी का आरोप भ्रष्टाचार और धनशोधन से अलग था, जिसमें अदालत ने मिराबो को बरी कर दिया।
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दो साल की सजा, लेकिन तत्काल जेल नहीं
मिराबो को 24 महीने की कारावास सजा दी गई है, लेकिन यह निलंबित है—अर्थात सजा को तत्काल जेल में काटना नहीं होगा, बशर्ते वे निलंबन की शर्तों का उल्लंघन न करें।
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यह मामला त्वरित अथवा सरलीकृत प्रक्रिया के तहत निपटाया गया। उपलब्ध रिपोर्टिंग से यह स्पष्ट है कि मिराबो ने आरोपों से जुड़े तथ्य स्वीकार किए और अदालत ने आरोपपत्र को मान्यता दी।
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4 हालांकि, उपलब्ध सामग्री में अदालत के विस्तृत सजा-कारण नहीं हैं। इसलिए यह निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता कि पश्चाताप, सेवानिवृत्ति, सहयोग या मुआवजे जैसे किसी एक कारक को अदालत ने कितना महत्व दिया।
8.23 करोड़ स्विस फ्रैंक के भुगतान का आरोप
रिपोर्टों में उद्धृत आरोपपत्र के अनुसार, मिराबो ने 2000 से 2012 के बीच सैकड़ों भुगतानों में कुल 8.23 करोड़ स्विस फ्रैंक—लगभग 10.17 करोड़ डॉलर—दिए। अभियोजन पक्ष का कहना था कि ये भुगतान कुवैत की सार्वजनिक सामाजिक सुरक्षा संस्था PIFSS के तत्कालीन महानिदेशक फहद अल-राजान को किए गए थे।
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आरोप था कि इन भुगतानों के बदले Mirabaud & Cie को PIFSS से जुड़ा लगभग 59.52 करोड़ डॉलर का निवेश कारोबार मिला।
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मुकदमे से पहले, रिपोर्टों के मुताबिक, मिराबो ने एक अलग समझौते के तहत PIFSS को 4.2 करोड़ स्विस फ्रैंक का मुआवजा दिया था।
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34 उपलब्ध स्रोत यह स्थापित नहीं करते कि अदालत ने अपने फैसले के हिस्से के रूप में कोई अतिरिक्त जुर्माना, संपत्ति जब्ती या अलग मुआवजा आदेश दिया।
PIFSS की भूमिका क्यों अहम है?
PIFSS, यानी कुवैत की Public Institution for Social Security, वह सार्वजनिक संस्था है जिसके धन के निवेश से जुड़ा यह मामला था। अभियोजन के अनुसार, PIFSS की संपत्तियां Mirabaud & Cie के माध्यम से निवेश की गई थीं; यही संस्था मिराबो के अलग मुआवता समझौते की लाभार्थी भी थी।
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2012 के अंत तक संबंधित निवेश माध्यमों में PIFSS के करीब 59.5 करोड़ डॉलर लगे होने की बात रिपोर्टों में कही गई है।
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फहद अल-राजान और लंदन की अलग कानूनी लड़ाई
मिराबो का मामला फहद अल-राजान और PIFSS से जुड़े बड़े विवाद का एक हिस्सा था। इंग्लैंड में अलग कार्यवाही में PIFSS ने आरोप लगाया था कि उसके पूर्व महानिदेशक ने निवेश फैसलों को प्रभावित करने के बदले वित्तीय संस्थानों और बिचौलियों से रिश्वत मांगी और ली। ये इंग्लैंड की अपीलीय अदालत की सामग्री में दर्ज आरोप हैं; इन्हें हर कथित भुगतान या हर पक्ष के खिलाफ अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।
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स्विस मामले पर आई रिपोर्टिंग के अनुसार, अल-राजान की 2022 में लंदन में मृत्यु हो गई थी।
14 उपलब्ध सामग्री से लंदन में चल रही व्यापक कानूनी कार्यवाहियों का अंतिम परिणाम स्पष्ट नहीं होता।
मिराबो की बैंकिंग विरासत पर असर
यह फैसला इसलिए भी उल्लेखनीय है क्योंकि मिराबो सिर्फ पारिवारिक नाम वाले निजी बैंक के पूर्व भागीदार नहीं थे, बल्कि स्विट्जरलैंड के बैंकिंग क्षेत्र के प्रमुख लॉबी संगठन के पूर्व अध्यक्ष भी थे। अदालत के निर्णय ने जिनेवा की निजी बैंकिंग की एक प्रमुख शख्सियत को कुवैती सार्वजनिक धन से जुड़े लंबे भ्रष्टाचार मामले में आपराधिक रूप से जिम्मेदार ठहराया।
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फैसले की सीमा भी स्पष्ट है: इसमें मिराबो की विदेशी रिश्वत और गंभीर धनशोधन के लिए आपराधिक जिम्मेदारी तय हुई है, जबकि जालसाजी के अलग आरोप को खारिज कर दिया गया।
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