दक्षिण कोरिया की बिजली योजना अब केवल ऊर्जा क्षेत्र का मसला नहीं रह गई है। सवाल यह है कि देश सेमीकंडक्टर फैब और एआई डेटा सेंटरों को चौबीसों घंटे स्थिर बिजली कैसे देगा, साथ ही परिवहन और हीटिंग के विद्युतीकरण को आगे बढ़ाएगा और कोयले पर निर्भरता घटाएगा।
जलवायु, ऊर्जा और पर्यावरण मंत्री किम सुंग-ह्वान ने कहा है कि सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स और एसके हाइनिक्स के चिप उत्पादन विस्तार तथा नए एआई डेटा सेंटरों के कारण बिजली मांग तेज़ी से बढ़ेगी। रॉयटर्स को दिए एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि केवल एआई से जुड़ी जरूरतें ही 25–30 गीगावाट अतिरिक्त मांग जोड़ सकती हैं। पेट्रोल-चालित वाहनों से इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर संक्रमण भी मांग को और बढ़ाएगा।
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2040 का अनुमान इतना क्यों बढ़ा
सरकार के संशोधित अनुमान के अनुसार, 2040 में अधिकतम बिजली मांग 158.4–165 गीगावाट रह सकती है। अप्रैल के 131.8–138.2 गीगावाट के अनुमान से यह 26.6–26.8 गीगावाट अधिक है। उन्नत उद्योगों और एआई डेटा सेंटरों की हिस्सेदारी 2040 की अधिकतम मांग में 36.2–36.5 गीगावाट आंकी गई है।
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यह सिर्फ राष्ट्रीय स्तर का अनुमान नहीं है। रॉयटर्स द्वारा उद्धृत विश्लेषकों के अनुसार, दक्षिण-पश्चिमी क्षेत्र में प्रस्तावित चार चिप फैब की बिजली जरूरत अकेले ग्वांग्जू, उत्तरी जिओला और दक्षिणी जिओला की मौजूदा वार्षिक बिजली खपत के 70–80% के बराबर हो सकती है।
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बहस में पैमाना समझाने के लिए एक तुलना की जा रही है: यदि 26.8 गीगावाट की अतिरिक्त मांग को पूरी तरह 1.4 गीगावाट क्षमता वाले APR1400 परमाणु रिएक्टरों से पूरा किया जाए, तो करीब 19 रिएक्टर चाहिए होंगे। यह कोई स्वीकृत निर्माण योजना नहीं, बल्कि मांग वृद्धि का तुलनात्मक आकलन है।
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नए परमाणु संयंत्रों पर मंत्री का रुख
किम का कहना है कि अतिरिक्त परमाणु क्षमता की जांच जरूरी है; उन्होंने यह नहीं कहा कि नए संयंत्रों को मंजूरी मिल चुकी है। उनके मुताबिक, सेमीकंडक्टर उत्पादन को चौबीसों घंटे स्थिर बिजली चाहिए और बढ़ती मांग को केवल नवीकरणीय ऊर्जा से पूरा करना कठिन होगा। इसलिए नए परमाणु रिएक्टरों की जरूरत का शीघ्र आकलन होना चाहिए।
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यह फैसला दक्षिण कोरिया की 2040 तक की दीर्घकालिक रूपरेखा, 12वीं बेसिक प्लान फॉर इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई एंड डिमांड, में शामिल किया जा रहा है। किम ने कहा है कि सरकार ने अभी यह तय नहीं किया है कि योजना में अतिरिक्त रिएक्टर शामिल किए जाएंगे या नहीं। उत्पादन मिश्रण—परमाणु, नवीकरणीय और गैस—पर सार्वजनिक विमर्श के बाद निर्णय होगा।
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परमाणु ऊर्जा के पक्ष में मुख्य तर्क यह है कि यह कम-कार्बन बिजली की बड़ी मात्रा लगातार उपलब्ध करा सकती है, जो चिप फैब और डेटा सेंटरों के संचालन ढांचे से मेल खाती है। लेकिन इससे सुरक्षा, रेडियोधर्मी कचरे के प्रबंधन, संयंत्रों के स्थान और स्थानीय स्वीकृति से जुड़ी चिंताएं खत्म नहीं हो जातीं। उपलब्ध रिपोर्टिंग में कोई विश्वसनीय राष्ट्रीय सर्वेक्षण या समर्थन-विरोध का मात्रात्मक बंटवारा नहीं दिया गया है; इसलिए जनमत पर कोई सटीक दावा करना उचित नहीं होगा।
दक्षिण कोरिया का मौजूदा बिजली मिश्रण
रॉयटर्स की 2025 की रिपोर्टिंग के अनुसार, दक्षिण कोरिया में 26 परमाणु रिएक्टर संचालित हैं, जिनकी कुल क्षमता 26.05 गीगावाट है।
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2024 में परमाणु ऊर्जा से 188.8 टेरावाट-घंटा (TWh) बिजली बनी, जो कुल उत्पादन का 31.7% थी और देश का सबसे बड़ा एकल बिजली स्रोत बनी। कोयला और LNG से प्रत्येक ने 167.2 TWh, यानी 28.1% उत्पादन दिया, जबकि नवीकरणीय स्रोतों से 63.2 TWh या 10.6% बिजली बनी।
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सरकार का नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्य मौजूदा स्तर से बहुत बड़ा है: क्षमता को 2025 में 37 गीगावाट से 2040 में 220 गीगावाट तक ले जाने की योजना है।
40 इससे साफ है कि नीति का प्रश्न परमाणु ऊर्जा बनाम नवीकरणीय ऊर्जा भर नहीं है। असली चुनौती परिवर्तनीय सौर और पवन उत्पादन, स्थिर आपूर्ति, ऊर्जा भंडारण और ट्रांसमिशन नेटवर्क को इस तरह जोड़ने की है कि तेजी से बढ़ते औद्योगिक भार को भरोसेमंद बिजली मिल सके।
दक्षिण-पश्चिमी चिप क्लस्टर को अलग रिएक्टर की जरूरत क्यों नहीं पड़ सकती
किम के अनुसार, दक्षिण-पश्चिमी सेमीकंडक्टर क्लस्टर की फिलहाल अनुमानित 6.3 गीगावाट मांग को मौजूदा बिजली स्रोतों में अपेक्षाकृत सीमित बढ़ोतरी से पूरा किया जा सकता है। इसलिए, मौजूदा अनुमान के स्तर पर इस क्लस्टर के लिए समर्पित परमाणु रिएक्टर अनिवार्य नहीं है।
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कठिन प्रश्न कुल उत्पादन क्षमता से आगे का है: क्या ग्रिड नए औद्योगिक केंद्रों तक भरोसेमंद बिजली पहुंचा सकता है, और क्या पर्याप्त उत्पादन व ट्रांसमिशन अवसंरचना समय पर तैयार होगी? सरकार ने कहा है कि वह इस क्लस्टर की बिजली और औद्योगिक जल जरूरतें पूरी करेगी तथा फैब और एआई सर्वरों से बढ़ती मांग के अनुरूप ग्रिड का उन्नयन करेगी।
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राष्ट्रीय नवीकरणीय योजना में सौर ऊर्जा विस्तार महत्वपूर्ण है। वहीं, जब नवीकरणीय उत्पादन कम हो, तब मांग के अनुसार चल सकने वाली आपूर्ति के रूप में LNG की भूमिका बनी रह सकती है। किम ने कहा है कि बड़ी नवीकरणीय विस्तार योजना के बावजूद अगली बिजली योजना पर चर्चा में LNG का उत्पादन हिस्सा बढ़ना लगभग अपरिहार्य है।
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2040 के बाद कोयले की भूमिका
दक्षिण कोरिया की नीति दिशा 2040 तक कोयले को चरणबद्ध तरीके से हटाने की है। इसके साथ परमाणु ऊर्जा, नवीकरणीय स्रोतों और विस्तारित बिजली ग्रिड की बड़ी भूमिका रहने की बात कही गई है।
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उपलब्ध साक्ष्य यह पुष्टि नहीं करते कि 2040 के बाद किसी खास कोयला संयंत्र को आपातकालीन बैकअप के रूप में बनाए रखने का अंतिम नीति-निर्णय हो चुका है। ऐसी संभावना विश्वसनीयता संबंधी बहस में उठ सकती है, लेकिन इसे अपनाई जा चुकी योजना नहीं माना जाना चाहिए।
मुख्य बात यह है कि दक्षिण कोरिया की एआई और सेमीकंडक्टर रणनीति अब बिजली तंत्र की रणनीति भी बन गई है। 12वीं योजना को सिर्फ यह तय नहीं करना होगा कि देश को कितनी बिजली चाहिए, बल्कि यह भी कि स्थिर उत्पादन, नवीकरणीय क्षमता, ट्रांसमिशन और लचीलापन कहाँ तथा कितनी तेजी से विकसित होगा—और क्या इस अंतर को भरने के लिए नई परमाणु क्षमता उचित है।