SK ग्रुप के चेयरमैन चे ताए वोन ने 13 अगस्त 2026 को CNBC को दिए एक व्यापक इंटरव्यू में चेतावनी दी कि AI मेमोरी चिप्स की वैश्विक कमी 2027 में अपने चरम पर होगी और उन्होंने इस स्थिति को 'युद्ध' जैसा बताया। उन्होंने 'चिपफ्लेशन' (chipflation) शब्द गढ़ा, जो मेमोरी चिप्स की कीमतों में 40 50% की बढ़ोतरी को दर्शाता है, जिसके...
शोध उत्तर

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दुनिया की सबसे बड़ी AI मेमोरी चिप बनाने वाली कंपनी SK हाइनिक्स के चेयरमैन ने एक चौंकाने वाली भविष्यवाणी की है। SK ग्रुप के चेयरमैन चे ताए-वोन — जिनके नियंत्रण वाली कंपनी SK हाइनिक्स दुनिया की ज़्यादातर AI के लिए हाई-बैंडविड्थ मेमोरी (HBM) चिप्स बनाती है — ने 13 अगस्त, 2026 को CNBC को दिए एक विस्तृत इंटरव्यू में साफ कहा कि 2027 में मेमोरी चिप उद्योग के इतिहास का सबसे भयानक आपूर्ति-मांग असंतुलन देखने को मिलेगा।
चे ने AI मेमोरी चिप्स हासिल करने की होड़ को 'युद्ध' का नाम दिया। उन्होंने CNBC को सियोल में दिए इंटरव्यू में कहा, "यह युद्ध जैसी स्थिति है। हर कोई मेमोरी चिप्स खरीदना चाहता है। इनके बिना आप AI कंप्यूटिंग सिस्टम नहीं बना सकते।"
उन्होंने बताया कि विदेशी सरकारें पहले से ही अपने उद्योगों की ओर से दबाव बना रही हैं, और आगाह किया कि दक्षिण कोरिया को भी ऐसे ही दबाव का सामना करना पड़ सकता है। अन्य मौकों पर उन्होंने इस स्थिति को 'संपूर्ण अराजकता' (utter chaos) कहा है।
चे का अनुमान है कि 2027 मेमोरी चिप्स के लिए अब तक का सबसे खराब आपूर्ति-मांग असंतुलन लाएगा। इसकी वजह यह है कि मांग तेज़ी से बढ़ रही है, जबकि कोई भी मेमोरी कंपनी समय पर पर्याप्त क्षमता जोड़ने में कामयाब नहीं हो पाई है।
SK हाइनिक्स का विशाल योंगिन सेमीकंडक्टर क्लस्टर — जो इसके विस्तार की आधारशिला है — फरवरी 2027 में उत्पादन शुरू करेगा। लेकिन चे की अपनी भविष्यवाणी बताती है कि यह समय भी कमी के चरम को रोकने के लिए बहुत देर हो चुकी होगी।
ग्राहकों ने चे को बताया है कि उन्हें अगले साल अकेले AI चिप की मांग में 60% से 100% तक की बढ़ोतरी की उम्मीद है, जबकि आपूर्ति मुश्किल से बढ़ेगी। चे ने कहा कि ये अनुरोध मेमोरी आपूर्ति के लिए 'संपूर्ण अराजकता' के समान हैं।
चे ने चेतावनी दी कि मेमोरी की कीमतें 40-50% बढ़ गई हैं, जिसे उन्होंने 'चिपफ्लेशन' (chipflation) नाम दिया है। यह पहले से ही वैश्विक IT कंपनियों — जिनमें Apple भी शामिल है — को अपने कंज्यूमर प्रोडक्ट्स के दाम बढ़ाने के लिए मजबूर कर रहा है।
उन्होंने मौजूदा मेमोरी कीमतों को 'असामान्य' बताया और आगाह किया कि लंबे समय तक ऊंची कीमतें बने रहने से नए प्रतिस्पर्धी और भू-राजनीतिक प्रतिशोध को न्योता मिलेगा। "कीमतें बहुत तेज़ी से बढ़ गईं," उन्होंने कहा, और उम्मीद जताई कि यह विस्तार संतुलन बहाल करने में मदद करेगा।
चे ने तर्क दिया कि मौजूदा कमी पिछले सेमीकंडक्टर चक्रों से संरचनात्मक रूप से अलग है। पहले मांग हार्डवेयर डिवाइसों (स्मार्टफोन, पीसी, सर्वर) की संख्या से तय होती थी। लेकिन AI के युग में, एक ही यूज़र 10 से अधिक AI एजेंट्स का उपयोग करता है, जिनमें से प्रत्येक को भारी मात्रा में मेमोरी की आवश्यकता होती है।
उन्होंने आज के AI की तुलना "एक चार साल के बच्चे" से की — जो अभी भी अपने विकास के शुरुआती दौर में है, लेकिन पहले से ही अपेक्षा से कहीं अधिक मेमोरी की खपत कर रहा है। जैसे-जैसे AI परिपक्व होगा, मेमोरी की ज़रूरतें और बढ़ती जाएंगी।
SK हाइनिक्स दुनिया की सबसे बड़ी मेमोरी फैब निर्माण परियोजना पर काम कर रहा है, जिसमें वह 2034 तक उत्पादन क्षमता को लगभग तीन गुना करने के लिए $720 बिलियन का दांव लगा रहा है।
इसका आधार दक्षिण कोरिया में योंगिन सेमीकंडक्टर क्लस्टर है, जहां फरवरी 2027 में उत्पादन शुरू होगा। चे ने स्वीकार किया कि पांच वर्षों में मेमोरी उत्पादन को दोगुना करने की दक्षिण कोरिया की राष्ट्रीय योजना भी — और SK हाइनिक्स का अपना आक्रामक विस्तार भी — ग्राहकों की ज़रूरतों से कम है।
"मेरे सभी ग्राहक कहते हैं, 'यार, यह काफी नहीं है, हमें और चाहिए,'" चे ने CNBC को बताया।
चे ने कहा कि SK हाइनिक्स अमेरिका में फ्रंट-एंड मेमोरी चिप उत्पादन सुविधाएं बनाने को तैयार है, लेकिन कई बाधाओं ने उन्हें निराश किया है। निर्माण लागत दक्षिण कोरिया से लगभग दोगुनी है, और जमीन, बिजली, पानी और नियम — सब कुछ अधिक बोझिल है।
कंपनी पहले से ही वेस्ट लाफायेट, इंडियाना में एक $3.87 बिलियन का एडवांस्ड पैकेजिंग प्लांट बना रही है। चे ने कहा कि अगर बिजली, पानी, श्रम और आपूर्ति श्रृंखला जैसी शर्तें पूरी होती हैं, तो एक पूर्ण मेमोरी उत्पादन संयंत्र बनाना भी संभव है।
मेमोरी प्लांट के अलावा, चे ने संकेत दिया कि SK हाइनिक्स AI डेटा सेंटरों और संबंधित तकनीकों के साथ-साथ संयुक्त उद्यमों में भी दसियों अरब डॉलर का निवेश कर सकता है।
प्रमुख ग्राहकों के साथ जोखिम को कम करने के लिए, चे दीर्घकालिक समझौतों (LTAs), 'मेमोरी-एज़-अ-सर्विस' मॉडल और बड़ी टेक कंपनियों के साथ संयुक्त उद्यमों की संभावना तलाश रहे हैं।
ये नए बिज़नेस मॉडल उस संरचनात्मक बदलाव को दर्शाते हैं जो चे देख रहे हैं: AI का युग मेमोरी की मांग के लिए एक स्थायी रूप से ऊंचा फ्लोर (minimum level) बना रहा है, और पारंपरिक स्पॉट-मार्केट प्राइसिंग अब आपूर्तिकर्ताओं या ग्राहकों दोनों के लिए उपयुक्त नहीं रह गई है।
चे ने पहले भी चेतावनी दी थी कि मेमोरी की कमी दशक के अंत तक बनी रह सकती है। ताइपे में कम्प्यूटेक्स 2026 में उन्होंने कहा था कि हाई-बैंडविड्थ मेमोरी की वैश्विक आपूर्ति में कमी 2030 तक जारी रहेगी।
निवेशकों और विश्लेषकों को उम्मीद है कि कमी कम से कम 2027 तक रहेगी, जिससे मेमोरी उत्पादकों को दुनिया के कुछ सबसे बड़े टेक्नोलॉजी ग्राहकों पर असामान्य मूल्य निर्धारण शक्ति (pricing power) मिलेगी।
चे की चेतावनियों का व्यावहारिक प्रभाव स्पष्ट है: AI मेमोरी चिप्स पूरे AI बुनियादी ढांचे के विकास (buildout) के लिए एक बाधा (bottleneck) बनते जा रहे हैं। AI कंप्यूटिंग सिस्टम बनाने वाली कंपनियां इनके बिना काम नहीं कर सकतीं, और यह कमी अब लागत को आपूर्ति श्रृंखला के माध्यम से कंज्यूमर कीमतों तक पहुंचा रही है।
कोई भी कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स — स्मार्टफोन, लैपटॉप, AI-सक्षम डिवाइस — खरीदने वाले लोगों के लिए, चे द्वारा वर्णित 'चिपफ्लेशन' का मतलब है कि कम से कम 2027 तक ऊंची कीमतें बनी रहने की संभावना है। AI उद्योग के लिए, इसका मतलब है कि बड़े भाषा मॉडल (LLMs) और AI एजेंट्स को प्रशिक्षित करने और तैनात करने की दौड़ केवल कंप्यूट पावर से नहीं, बल्कि मेमोरी की उपलब्धता से भी सीमित होगी।
चे का संदेश सीधा है: उद्योग को मेमोरी आपूर्ति में लंबे समय तक तंगी के लिए तैयार रहना होगा, और $720 बिलियन का दांव भी पर्याप्त नहीं हो सकता। "मैं अपनी पूरी कोशिश कर रहा हूं," उन्होंने कहा। क्या यह पर्याप्त है, यह वैश्विक AI अर्थव्यवस्था के लिए केंद्रीय प्रश्न बना हुआ है।
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SK ग्रुप के चेयरमैन चे ताए वोन ने 13 अगस्त 2026 को CNBC को दिए एक व्यापक इंटरव्यू में चेतावनी दी कि AI मेमोरी चिप्स की वैश्विक कमी 2027 में अपने चरम पर होगी और उन्होंने इस स्थिति को 'युद्ध' जैसा बताया।
SK ग्रुप के चेयरमैन चे ताए वोन ने 13 अगस्त 2026 को CNBC को दिए एक व्यापक इंटरव्यू में चेतावनी दी कि AI मेमोरी चिप्स की वैश्विक कमी 2027 में अपने चरम पर होगी और उन्होंने इस स्थिति को 'युद्ध' जैसा बताया। उन्होंने 'चिपफ्लेशन' (chipflation) शब्द गढ़ा, जो मेमोरी चिप्स की कीमतों में 40 50% की बढ़ोतरी को दर्शाता है, जिसके कारण Apple जैसी कंपनियों को अपने कंज्यूमर प्रोडक्ट्स के दाम बढ़ाने पड़ रहे हैं।
AI एजेंट्स के तेजी से बढ़ने के कारण मेमोरी की मांग में संरचनात्मक बदलाव आया है हर यूज़र अब 10 से ज़्यादा AI एजेंट्स चलाता है, जो पारंपरिक डिवाइस आधारित मांग से बिल्कुल अलग है।