पोप लियो XIV ने कहा कि यूरोप में तेज़ी से बढ़ रहा सैन्य खर्च कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय भरोसे को कमजोर कर रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि रक्षा के नाम पर हो रहा पुनःसैन्यीकरण शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे सामाजिक क्षेत्रों से संसाधन छीन सकता है। पोप ने विशेष रूप से AI‑आधारित हथियारों को लेकर चिंता जताई और कहा कि यह मानवता क...

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: What did Pope Leo say about Europe’s rising military spending and rearmament, why did he call it a betrayal of diplomacy rather than true de. Article summary: Pope Leo XIV condemned Europe’s surge in military spending as a “betrayal” of diplomacy, arguing that rearmament which raises tensions and insecurity should not be called true “defence.” He linked the arms buildup to a w. Topic tags: general, general web, user generated. Reference image context from search candidates: Reference image 1: visual subject "# Europe’s military buildup is a ‘betrayal’ of diplomacy, says Pope Leo. Share Tweet Share Share Email Comments. Pope Leo XIV on Thursday criticised Europe’s rising military spendi" source context "Europe’s military buildup is a ‘betrayal’ of diplomacy, says Pope Leo | Free Press Kashmir" Reference image 2: visua
यूरोप में तेजी से बढ़ रहे सैन्य बजट को लेकर कैथोलिक चर्च के प्रमुख पोप लियो XIV ने तीखी आलोचना की है। मई 2026 में रोम की सपिएंज़ा यूनिवर्सिटी के छात्रों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि महाद्वीप का तेज़ी से हो रहा पुनःसैन्यीकरण वास्तव में सुरक्षा का रास्ता नहीं, बल्कि कूटनीति की असफलता का संकेत है।
उनके अनुसार, हथियारों और उन्नत सैन्य तकनीक पर बढ़ता निवेश वैश्विक तनाव को और बढ़ा सकता है—खासकर तब, जब युद्ध में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) जैसी तकनीकों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा हो।
पोप लियो ने विशेष रूप से उस भाषा पर सवाल उठाया, जिसमें सैन्य बजट को “रक्षा खर्च” कहा जाता है। उनका कहना था कि ऐसा पुनःसैन्यीकरण, जो देशों के बीच तनाव और असुरक्षा को बढ़ाता है, उसे वास्तविक रक्षा नहीं कहा जा सकता।
उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह की नीतियाँ:
उनकी टिप्पणी ऐसे समय आई है जब शीत युद्ध की समाप्ति के बाद यूरोप में सैन्य खर्च सबसे तेज़ गति से बढ़ रहा है।
यूरोप में बढ़ते रक्षा बजट की पृष्ठभूमि में NATO के भीतर चल रही बहस भी है। कई वर्षों से अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प यूरोपीय देशों पर दबाव डालते रहे हैं कि वे गठबंधन की सुरक्षा लागत में अधिक योगदान दें।
हाल की NATO चर्चाओं में सदस्य देशों ने रक्षा खर्च के लिए और अधिक महत्वाकांक्षी लक्ष्य पर सहमति जताई है। प्रस्ताव है कि 2035 तक GDP का लगभग 5% रक्षा और उससे जुड़े निवेशों पर खर्च किया जाए, जो पुराने 2% लक्ष्य से कहीं अधिक है।
इसी दबाव और नई रणनीति के कारण यूरोप के रक्षा बजट में तेज़ उछाल आया है। 2025 में यूरोप का कुल सैन्य खर्च लगभग 563 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 12.6% अधिक है।
पोप लियो के अनुसार, यह प्रवृत्ति दुनिया को हथियारों की प्रतिस्पर्धा की ओर ले जा सकती है, जबकि असली जरूरत संवाद और कूटनीति को मजबूत करने की है।
पोप ने केवल पारंपरिक हथियारों की दौड़ पर ही चिंता नहीं जताई। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित हथियार प्रणालियों के तेज़ विकास को भी बेहद खतरनाक बताया।
उनके शब्दों में, अगर AI का इस्तेमाल युद्ध को और तेज़ व अधिक घातक बनाने में हुआ, तो मानवता “विनाश के चक्र” (spiral of annihilation) की ओर बढ़ सकती है।
दुनिया भर में वैज्ञानिकों और नीति विशेषज्ञों के बीच भी इस मुद्दे पर बहस चल रही है। स्वायत्त हथियार (autonomous weapons) और AI‑आधारित लक्ष्य निर्धारण प्रणालियाँ युद्ध को इतना तेज़ बना सकती हैं कि मानव नियंत्रण कमजोर पड़ जाए और संघर्ष तेजी से बढ़ सकता है।
पोप लियो XIV का संदेश केवल बजट की आलोचना तक सीमित नहीं था। उनका तर्क है कि दीर्घकालिक वैश्विक सुरक्षा हथियारों से नहीं, बल्कि संवाद, सहयोग और मजबूत कूटनीतिक संस्थाओं से आती है।
पारंपरिक हथियारों की होड़ और AI‑आधारित युद्ध दोनों को लेकर चेतावनी देते हुए उन्होंने दुनिया के सामने एक स्पष्ट विकल्प रखा: या तो देश सैन्य प्रतिस्पर्धा को और तेज़ करें, या फिर शांति और कूटनीति में निवेश बढ़ाएँ।
कैथोलिक चर्च लंबे समय से शांति‑निर्माण और युद्ध से बचाव की वकालत करता रहा है, और पोप लियो XIV का यह बयान उसी परंपरा का नया उदाहरण माना जा रहा है।
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पोप लियो XIV ने कहा कि यूरोप में तेज़ी से बढ़ रहा सैन्य खर्च कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय भरोसे को कमजोर कर रहा है।
पोप लियो XIV ने कहा कि यूरोप में तेज़ी से बढ़ रहा सैन्य खर्च कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय भरोसे को कमजोर कर रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि रक्षा के नाम पर हो रहा पुनःसैन्यीकरण शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे सामाजिक क्षेत्रों से संसाधन छीन सकता है।
पोप ने विशेष रूप से AI‑आधारित हथियारों को लेकर चिंता जताई और कहा कि यह मानवता को ‘विनाश के चक्र’ की ओर ले जा सकता है।