फिलीपींस के रक्षा सचिव गिल्बर्टो तियोदोरो जूनियर ने शांगरी ला संवाद 2026 में चीन पर वार्ताओं को अपनी स्थिति मज़बूत करने का हथकंडा बताया और कहा कि दक्षिण चीन सागर में बाध्यकारी यूएनसीएलओएस जैसे कानून होने के बावजूद आचा... एक चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के प्रतिनिधि द्वारा मनीला की नीतियों पर खुले मंच से की गई सीधी चुन...

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: What did Philippine Defence Secretary Gilberto Teodoro Jr. say at the 2026 Shangri-La Dialogue about China being the main obstacle to a Sout. Article summary: Here is a breakdown of the key positions, the diplomatic exchange, and the state of play on the South China Sea Code of Conduct (COC) at the 2026 Shangri-La Dialogue.. Topic tags: general, government, general web, user generated. Reference image context from search candidates: Reference image 1: visual subject "At the 2025 Shangri-La Dialogue, Philippine Defense Secretary Gilberto Teodoro delivered a fiery speech on the South China Sea issue, accusing China of betraying its commitments to" source context "Shangri-La Dialogue exposes malicious intentions of the ..." Reference image 2: visual subject "At the 2025 Shangri-La Dialogue, Philippine Defense Secretary
23वां शांगरी-ला संवाद सिंगापुर में दक्षिण चीन सागर पर आसियान के भीतर की सबसे बड़ी फूट का अप्रत्याशित मंच बन गया। फिलीपींस के रक्षा प्रमुख और आसियान के शीर्ष प्रशासक ने एक ही मंच से दशकों से अटकी आचार संहिता (Code of Conduct - COC) वार्ता की बेहद विपरीत तस्वीरें पेश कीं, जिसने समूह के कूटनीतिक आशावाद और सीमावर्ती सदस्य देशों की ज़मीनी हताशा के बीच बढ़ते तनाव को बेनकाब कर दिया।
फिलीपींस के रक्षा सचिव गिल्बर्टो तियोदोरो जूनियर ने अपने सत्र के दौरान बिना लाग-लपेट के सीधा आरोप लगाया। उन्होंने साफ तौर पर बीजिंग को उस आचार संहिता को पूरा करने में सबसे बड़ी बाधा बताया, जिस पर 2013 से बातचीत चल रही है [21, 23]। तियोदोरो का कहना था कि चीन के लिए ये वार्ताएं "विवादों को सुलझाने का ज़रिया नहीं", बल्कि विवादित जल में यथास्थिति बनाए रखते हुए रणनीतिक बढ़त हासिल करने की एक सोची-समझी रणनीति भर हैं । उन्होंने चेतावनी दी कि फिलीपींस इस 'टालमटोल की चाल' से मूर्ख नहीं बनेगा।
ये बहस विश्वास पर उतनी ही थी जितनी नीति पर। तियोदोरो ने नई आचार संहिता की उपयोगिता पर ही सवाल उठाते हुए, संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि (UNCLOS) जैसे पहले से मौजूद बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय ढाँचों की याद दिलाई। उन्होंने संकेत दिया कि बार-बार नए समझौतों पर बातचीत की ज़रूरत इसलिए पड़ रही है क्योंकि चीन पहले से तय नियमों-कानूनों को मानने को तैयार नहीं ।
सत्र तब गर्मा गया जब चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के विशेषज्ञ प्रतिनिधिमंडल के सदस्य झांग ची ने सार्वजनिक रूप से तियोदोरो को चुनौती दी। झांग ने फिलीपींस पर एक बुनियादी विरोधाभास का आरोप लगाया—एक ओर आचार संहिता का समर्थन, और दूसरी ओर निर्जन रीफों पर कर्मियों को भेजकर दक्षिण चीन सागर में पक्षों के आचरण पर 2002 की घोषणा (Declaration on the Conduct of Parties - DOC) का उल्लंघन [17, 19]। तियोदोरो ने इस आरोप का सीधा जवाब नहीं दिया, बल्कि इसे "सवालों के भेष में छिपा प्रचार का नाटक" बताकर पलटवार कर दिया, जिस पर सभागार के एक बड़े हिस्से ने तालियाँ बजाकर उनका समर्थन किया ।
ठीक उसी संवाद में, एक अलग सत्र में, आसियान के महासचिव काओ किम हॉर्न ने बिल्कुल जुदा संदेश दिया। उन्होंने उम्मीद जताई कि आचार संहिता पर बातचीत इसी साल पूरी हो सकती है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि आसियान के सदस्य देश और चीन दोनों "वार्ता को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध" हैं । काओ ने दोहराया कि समझौते को 2026 तक अंतिम रूप देना सभी पक्षों के रणनीतिक हित में है और इसके लिए कार्य योजनाएँ शुरू हैं
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काओ का यह आशावाद उनके पहले के सार्वजनिक बयानों के अनुरूप है। उन्होंने 2025 के अंत में इस विचार को खारिज कर दिया था कि फिलीपींस और चीन के बीच द्विपक्षीय तनाव आचार संहिता में देरी का कारण बन रहे हैं। तब उन्होंने कहा था कि उन्हें "पूरा भरोसा" है कि पाठ को अंतिम रूप दे दिया जाएगा । उनका लहज़ा आसियान सचिवालय की उस पुरानी भूमिका को दर्शाता है, जो सदस्यों और बीजिंग के बीच निजी असहमतियों के बावजूद, कूटनीतिक प्रक्रिया को सार्वजनिक रूप से जीवित और पटरी पर बताती है। यह संस्थागत सोच बीजिंग के कूटनीतिक संदेशों से भी मेल खाती है; चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने जुलाई 2025 में काओ से मुलाकात कर दोनों पक्षों से तय समय पर आचार संहिता पूरी करने का आह्वान किया था, इसे सहयोग का एक अहम क्षेत्र बताया
।
एक ऐसे रक्षा सचिव, जो बातचीत को 'चीनी जाल' मानते हैं, और ऐसे महासचिव, जो उसे निकट भविष्य का एक संभव लक्ष्य मानते हैं, के बीच का यह फ़र्क समुद्री सुरक्षा पर आसियान की कूटनीति की उस जटिल संतुलन साधने की मज़बूरी को रेखांकित करता है।
यह सार्वजनिक नाटक असली गतिरोध को ढँक नहीं सकता। हालाँकि आसियान और चीन ने 2022 में एकल वार्ता मसौदा पाठ को अंतिम रूप दिया—जिसे अक्सर मील का पत्थर बताया जाता है—लेकिन यह पाठ अब भी गोपनीय है, और कई अहम विवाद अनसुलझे हैं:
आसियान के 2026 के अध्यक्ष मलेशिया ने कथित तौर पर आचार संहिता को प्राथमिकता बनाया है और अपने कार्यकाल में एक अंतिम मसौदे पर ज़ोर दिया है । फिर भी, जून 2026 तक, ऐसा कोई सार्वजनिक प्रमाण नहीं है कि कोई अंतिम, सहमत पाठ तैयार हो चुका है। खुद काओ ने माना है कि पाठ पर बातचीत करना "कोई आसान काम नहीं" है और "कई मुद्दों को अभी भी सुलझाया जाना बाकी है"
।
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फिलीपींस के रक्षा सचिव गिल्बर्टो तियोदोरो जूनियर ने शांगरी ला संवाद 2026 में चीन पर वार्ताओं को अपनी स्थिति मज़बूत करने का हथकंडा बताया और कहा कि दक्षिण चीन सागर में बाध्यकारी यूएनसीएलओएस जैसे कानून होने के बावजूद आचा...
फिलीपींस के रक्षा सचिव गिल्बर्टो तियोदोरो जूनियर ने शांगरी ला संवाद 2026 में चीन पर वार्ताओं को अपनी स्थिति मज़बूत करने का हथकंडा बताया और कहा कि दक्षिण चीन सागर में बाध्यकारी यूएनसीएलओएस जैसे कानून होने के बावजूद आचा... एक चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के प्रतिनिधि द्वारा मनीला की नीतियों पर खुले मंच से की गई सीधी चुनौती तीखी बहस में बदल गई। तियोदोरो ने इसे 'प्रचार का नाटक' करार देकर सीधे जवाब देने से इनकार कर दिया, जिस पर सभागार का एक...
हालांकि 2022 में एकल मसौदा पाठ तक पहुंचने और 2026 की मलेशिया अध्यक्षता के प्रयासों के बावजूद, आचार संहिता की कानूनी हैसियत, भौगोलिक दायरे और सैन्य गतिविधियों जैसे अहम मुद्दे आज भी अनसुलझे हैं, और जून 2026 तक किसी अंति...