यह कोई कंकाल नहीं, बल्कि पत्थर में दर्ज गति का एक क्षण है। नॉर्थ डकोटा के मारमार्थ के पास हेल क्रीक फॉर्मेशन में वैज्ञानिकों ने 2025 में चार विशाल पदचिह्नों का एक क्रम दर्ज किया। इसे वयस्क टायरैनोसॉरस रेक्स (T. rex) से जोड़ा गया पहला ज्ञात जीवाश्म-पथ माना गया है। ये निशान करीब 6.65 करोड़ वर्ष पुराने हैं और क्रिटेशस काल के अंतिम दौर के हैं।
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चार कदमों में छिपी बड़ी कहानी
यह जीवाश्म-पथ लगभग 23 फुट (करीब 7 मीटर) लंबा है। इसमें तीन-अंगुलियों वाले चार पदचिह्न हैं—दो बाएं और दो दाएं पैर के। हर पदचिह्न करीब 3 फुट, यानी लगभग 1 मीटर, लंबा है।
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शोधकर्ताओं ने असाधारण आकार, पंजों की अपेक्षाकृत पतली छाप, चट्टानों की उम्र, स्थान और आसपास मिले टायरैनोसॉर जीवाश्मों के आधार पर इन्हें एक वयस्क T. rex का पदचिह्न माना है। फिर भी, हड्डियों की तुलना में पदचिह्न शरीररचना की कम जानकारी देते हैं। इसलिए यह पहचान उपलब्ध साक्ष्यों पर आधारित मजबूत निष्कर्ष है, पूर्ण और निर्विवाद प्रमाण नहीं।
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एक पदचिह्न नहीं, चलने का रिकॉर्ड
डायनासोर के अलग-अलग पदचिह्न पहले भी मिल चुके हैं, लेकिन एक ही जीव के लगातार कदमों का क्रम अधिक महत्वपूर्ण है। इससे वैज्ञानिक कदमों की लंबाई और चलने की दिशा का अध्ययन कर सकते हैं। इस शोध को जर्नल ऑफ वर्टिब्रेट पेलियॉन्टोलॉजी में प्रकाशित किया गया है।
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यही कारण है कि यह खोज वयस्क टायरैनोसॉर के व्यवहार का असाधारण रिकॉर्ड है। केवल टांगों की हड्डियों से गति का अनुमान लगाने के बजाय, वैज्ञानिक देख सकते हैं कि यह विशाल शिकारी प्राचीन कीचड़ भरी जमीन पर वास्तव में कैसे चला था।
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टी. रेक्स दौड़ नहीं रहा था
पदचिह्नों के बीच की दूरी से करीब 13 फुट (लगभग 4 मीटर) की कदम-लंबाई का अनुमान लगाया गया। इसी आधार पर शोधकर्ताओं ने इसकी गति करीब 3.5 से 4.5 मील प्रति घंटा—लगभग 5.6 से 7.2 किमी प्रति घंटा—आंकी है। यह मनुष्य की तेज पैदल चाल के बराबर है।
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इससे प्रजाति की अधिकतम रफ्तार तय नहीं होती। यह केवल इस छोटे-से पदचिह्न-क्रम में दर्ज इस एक जीव की गति बताता है। निशान मौसम के असर से घिसे हुए हैं, इसलिए सटीक माप में सीमाएं हैं; फिर भी उपलब्ध साक्ष्य बताते हैं कि उस समय वयस्क T. rex चल रहा था, दौड़ नहीं रहा था।
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खोज किसने की और अध्ययन कैसे हुआ
नॉर्थग्लेन हाई स्कूल के शिक्षक और डेनवर म्यूज़ियम ऑफ नेचर एंड साइंस के स्वयंसेवक केंट हप्स ने 2025 में मारमार्थ के पास एक खुदाई अभियान में स्वयंसेवा करते हुए इस स्थल को खोजा। यह जगह अमेरिकी वन सेवा के प्रशासन वाली संघीय भूमि पर है।
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डेनवर म्यूज़ियम ऑफ नेचर एंड साइंस के शोधकर्ताओं ने इंग्लैंड की लिवरपूल जॉन मूर्स यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर इसका अध्ययन किया। टीम ने पदचिह्न वाली चट्टान का दस्तावेज़ तैयार करने और छापों का विश्लेषण करने के लिए उच्च-रिज़ॉल्यूशन 3डी सतह स्कैनिंग का उपयोग किया।
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निकालना क्यों इतना मुश्किल है
रिपोर्टों के अनुसार, चार में से तीन पदचिह्नों को हेलिकॉप्टर से निकालकर डेनवर म्यूज़ियम ऑफ नेचर एंड साइंस ले जाने की योजना थी।
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दूरदराज़ बैडलैंड्स क्षेत्र तक पहुंचना आसान नहीं है, लेकिन असली चुनौती इसकी असामान्य संरक्षा भी है। इसे साधारण मुलायम तलछट में बनी छाप नहीं, बल्कि त्रि-आयामी “रॉक-ऑन-रॉक” संरचना बताया गया है। इसलिए इसे हड्डी के जीवाश्म की तरह निकालना कहीं अधिक कठिन है।
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उपलब्ध रिपोर्टिंग यह पुष्टि नहीं करती कि पदचिह्नों को निकाला जा चुका है या वे सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए कब उपलब्ध होंगे। लेकिन चार कदमों का यह क्रम ही पर्याप्त रूप से खास है—यह अंतिम क्रिटेशस के परिदृश्य में चलते एक विशाल शिकारी की दुर्लभ, प्रत्यक्ष झलक देता है।
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