लेकिन अमेरिकी निर्यात नियंत्रण कड़े होने के बाद स्थिति पूरी तरह बदल गई। हुआंग के अनुसार अब चीन में Nvidia की AI चिप मार्केट शेयर लगभग शून्य रह गई है।
उनका तर्क है कि अगर चीनी डेवलपर Nvidia के प्लेटफॉर्म से हटकर अन्य हार्डवेयर पर काम करने लगते हैं, तो इसका असर पूरे वैश्विक AI इकोसिस्टम पर पड़ सकता है।
जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच बीजिंग में शिखर वार्ता हुई, तब उम्मीद थी कि सेमीकंडक्टर निर्यात विवाद पर प्रगति होगी। Nvidia के CEO जेनसन हुआंग भी अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के साथ बीजिंग पहुँचे थे, जिससे उम्मीद और बढ़ गई थी।
लेकिन बैठक के बाद चिप निर्यात नियंत्रण पर कोई तत्काल समझौता नहीं हुआ।
असल समस्या यह है कि मंज़ूरी केवल कागज़ पर है।
रिपोर्टों के अनुसार अमेरिकी वाणिज्य विभाग ने लगभग 10 चीनी कंपनियों—जिनमें Alibaba, Tencent, ByteDance और JD.com शामिल हैं—को Nvidia की H200 चिप खरीदने की अनुमति दी है।
फिर भी, अभी तक एक भी डिलीवरी नहीं हुई।
इस सौदे को आगे बढ़ाने के लिए केवल अमेरिका की मंज़ूरी पर्याप्त नहीं है। दोनों सरकारों की अनुमति ज़रूरी है।
अमेरिका की तरफ से:
चीन की तरफ से:
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार बीजिंग जानबूझकर इस प्रक्रिया को धीमा कर रहा है क्योंकि वह अपनी घरेलू चिप उद्योग को प्राथमिकता देना चाहता है। शिखर सम्मेलन के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने भी कहा कि चीन ने खरीद को इसलिए मंज़ूरी नहीं दी क्योंकि वह अपने खुद के चिप्स विकसित करना चाहता है।
इस वजह से एक अजीब स्थिति पैदा हो गई है—निर्यात कानूनी रूप से संभव है, लेकिन असल में व्यापार हो नहीं पा रहा।
पिछले कुछ वर्षों में चीन ने सेमीकंडक्टर आत्मनिर्भरता को राष्ट्रीय रणनीति बना लिया है। सरकार स्थानीय कंपनियों को भारी निवेश और समर्थन दे रही है ताकि विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम हो सके।
ऐसे में अगर बड़ी मात्रा में Nvidia चिप्स आयात किए जाते हैं, तो यह चीन की दीर्घकालिक रणनीति के खिलाफ जा सकता है।
यही कारण है कि भले ही आयात अंततः अनुमति पा जाए, फिर भी चीनी नियामक यह तय कर सकते हैं कि इन चिप्स का इस्तेमाल कहाँ और किस क्षेत्र में किया जा सकता है।
जेनसन हुआंग का तर्क केवल बिक्री तक सीमित नहीं है। उनका कहना है कि AI नेतृत्व सिर्फ हार्डवेयर से तय नहीं होता—बल्कि उस हार्डवेयर पर बने सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म और डेवलपर इकोसिस्टम से तय होता है।
अगर चीनी डेवलपर Nvidia के बजाय घरेलू चिप प्लेटफॉर्म पर अपने AI सिस्टम बनाना शुरू कर देते हैं, तो अमेरिकी कंपनियाँ वैश्विक तकनीकी मानकों पर अपना प्रभाव खो सकती हैं।
दूसरे शब्दों में, Nvidia को चीन से बाहर रखना जरूरी नहीं कि चीन के AI विकास को रोक दे—यह संभव है कि इससे चीन अपनी घरेलू तकनीक को और तेज़ी से विकसित करे।
H200 चिप सौदे का अटका रहना दिखाता है कि अमेरिका‑चीन तकनीकी प्रतिस्पर्धा कितनी जटिल हो चुकी है। अब केवल तकनीकी क्षमता या व्यावसायिक मांग ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा, औद्योगिक नीति और भू‑राजनीति भी इन फैसलों को प्रभावित कर रही है।
फिलहाल Nvidia ऐसी स्थिति में है जहाँ उसे चीन को चिप बेचने की अमेरिकी मंज़ूरी तो मिल गई है—लेकिन वास्तविक शिपमेंट तब तक शुरू नहीं हो सकती जब तक बीजिंग भी हरी झंडी न दे।
इसलिए आने वाले महीनों में यह मामला केवल तकनीक का नहीं बल्कि दोनों देशों की रणनीतिक प्राथमिकताओं का भी परीक्षण बनेगा।