मुख्य बातें:
एंड‑टू‑एंड एन्क्रिप्शन का मतलब होता है कि संदेश रास्ते में या सर्वर पर कहीं भी पढ़ा नहीं जा सकता। इसे हटाने से मैसेजिंग सिस्टम पारंपरिक मॉडल पर लौट आता है जहाँ प्लेटफ़ॉर्म के पास तकनीकी रूप से डेटा देखने की क्षमता होती है।
EFF का कहना है कि Meta ने वर्षों तक यह संदेश दिया कि वह अपनी सभी मैसेजिंग सेवाओं में डिफ़ॉल्ट एंड‑टू‑एंड एन्क्रिप्शन लाने की दिशा में काम कर रहा है—जिसमें Facebook Messenger और आगे चलकर Instagram भी शामिल था।
लेकिन EFF के अनुसार हुआ उल्टा। Instagram पर एन्क्रिप्शन को विस्तार देने के बजाय कंपनी ने मौजूद ऑप्शनल एन्क्रिप्शन फीचर ही हटा दिया।
प्राइवेसी समर्थकों के लिए असली चिंता यह है कि अब यूज़र्स के पास पहले की तुलना में कम प्राइवेसी विकल्प बचे हैं।
Meta का कहना है कि इस फीचर का इस्तेमाल बहुत कम लोग कर रहे थे। कंपनी के मुताबिक बहुत कम Instagram यूज़र्स ने एन्क्रिप्टेड चैट मोड चालू किया था, इसलिए इसे हटाने का निर्णय लिया गया।
Meta ने यह भी कहा कि यदि कोई यूज़र मजबूत प्राइवेसी के साथ मैसेजिंग चाहता है, तो वह WhatsApp का उपयोग कर सकता है, जहाँ एंड‑टू‑एंड एन्क्रिप्शन पहले से डिफ़ॉल्ट रूप में लागू है।
हालाँकि आलोचकों का तर्क है कि जब कोई फीचर सीमित क्षेत्रों में और ऑप्शनल रूप में उपलब्ध हो, तो उसका कम उपयोग होना स्वाभाविक है। इसलिए कम अपनाने को हटाने का एकमात्र कारण मानना विवादास्पद माना जा रहा है।
इस फैसले के समय को लेकर भी चर्चा हुई। Instagram से एन्क्रिप्शन हटाने का निर्णय अमेरिका के “Take It Down Act” लागू होने से लगभग 11 दिन पहले आया।
यह कानून प्लेटफ़ॉर्मों को यह बाध्य करता है कि वे बिना सहमति के साझा की गई अंतरंग तस्वीरों या वीडियो को रिपोर्ट मिलने के बाद जल्द हटाएँ।
दोनों घटनाओं के बीच सीधा संबंध आधिकारिक रूप से पुष्टि नहीं किया गया है। लेकिन कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि:
फिर भी, Meta ने सार्वजनिक रूप से यह नहीं कहा कि कानून के कारण ही यह बदलाव किया गया।
इस बदलाव के बाद Instagram पर निजी संदेशों को देखने का तरीका बदल जाता है:
सरल शब्दों में: Instagram मैसेज अब प्लेटफ़ॉर्म से पूरी तरह निजी नहीं माने जा सकते।
यह घटना एक बड़े तकनीकी विवाद को भी दिखाती है।
Instagram का यह कदम बताता है कि बड़ी टेक कंपनियों को अक्सर प्राइवेसी, सुरक्षा और नियामकीय दबाव के बीच संतुलन बनाना पड़ता है—और कई बार उस संतुलन में प्राइवेसी विकल्प पीछे छूट जाते हैं।
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