संयंत्र अभी solid-state तकनीक का इंतजार नहीं कर रहा, बल्कि बड़े आकार के lithium-ion सेल बना रहा है। इसकी योजना में स्थिर ऊर्जा भंडारण के लिए lithium iron phosphate यानी LFP सेल और इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए nickel-manganese-cobalt यानी NMC सेल शामिल हैं। NMC सेल Toyota की आने वाली पूरी तरह इलेक्ट्रिक Highlander के लिए भी बनाए जाएंगे।
यह रणनीति साफ संकेत देती है: LG उन बैटरी रसायनों और फॉर्मेट पर काम कर रहा है जिन्हें आज ग्राहकों को सप्लाई किया जा सकता है, जबकि solid-state पर शोध जारी है। बैटरी उद्योग के लिए निकट अवधि का सवाल सिर्फ यह नहीं है कि कौन-सी रसायन तकनीक बेहतर है। यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि उसे लगातार बनाया जा सके, स्थानीय स्तर पर सप्लाई किया जा सके और वाहन निर्माता या ऊर्जा-भंडारण कंपनियां उसकी कीमत स्वीकार कर सकें।
LG, General Motors यानी GM के साथ lithium-manganese-rich या LMR प्रिज्मैटिक सेल पर भी काम कर रहा है। दोनों कंपनियों की योजना अमेरिका में 2028 से इनका व्यावसायिक उत्पादन शुरू करने की है, जबकि प्री-प्रोडक्शन इससे पहले शुरू हो सकता है।
GM के अनुसार ये सेल भविष्य के इलेक्ट्रिक ट्रकों और बड़े SUV मॉडल के लिए बनाए जाएंगे। कंपनी का लक्ष्य 400 मील से अधिक की रेंज और ऐसी लागत है जो कम कीमत वाली LFP बैटरियों के करीब हो। रिपोर्टों के मुताबिक LMR रसायन में महंगे nickel और cobalt की तुलना में manganese का इस्तेमाल अधिक होता है।
LMR, solid-state का विकल्प नहीं है। यह उसी व्यावसायिक दबाव का अलग समाधान है—रेंज और लागत में सुधार, लेकिन ऐसी उत्पादन प्रक्रियाओं के साथ जो मौजूदा बैटरी उद्योग से अपेक्षाकृत अधिक मेल खाती हैं। LG एरिजोना में 46-series cylindrical सेल का उत्पादन भी तैयार कर रहा है। इससे पता चलता है कि solid-state उत्पादन की समस्या हल होने तक कंपनी कई ऐसे lithium-ion फॉर्मेट पर दांव लगा रही है जिन्हें बड़े पैमाने पर बनाया जा सके।
कुछ प्रतिस्पर्धी कंपनियों ने LG के EV अनुमान से पहले की समयसीमा बताई है। BYD और CATL ने 2027 में छोटे पैमाने पर solid-state सेल का ट्रायल या पायलट उत्पादन शुरू करने का लक्ष्य रखा है। Geely ने भी सत्यापन के बाद 2027 में अपने ब्रांडों के वाहनों में पायलट तैनाती की बात कही है।
ये घोषणाएं महत्वपूर्ण हैं, लेकिन यहां पायलट शब्द पर ध्यान देना जरूरी है। पायलट उत्पादन सीमित मात्रा में प्रक्रिया को परखने के लिए होता है। यह आम बाजार के वाहनों के लिए mass production नहीं होता। CATL की योजनाओं से जुड़ी रिपोर्टिंग में बड़े पैमाने पर बाजार उपयोग का समय 2030 या उसके बाद बताया गया है। Geely की पायलट समयसीमा भी यह नहीं बताती कि solid-state बैटरियां बड़े पैमाने पर किफायती कब होंगी।
Mercedes-Benz और BMW solid-state बैटरियों का परीक्षण कर रहे हैं, जबकि Stellantis ने ट्रायल की योजना बनाई है। ये कार्यक्रम तकनीक के विकास और सत्यापन को दर्शाते हैं, लेकिन अभी तक उच्च उत्पादन-उपज, टिकाऊपन और प्रतिस्पर्धी लागत वाले बड़े पैमाने के उत्पादन का प्रमाण नहीं हैं।
ली की टिप्पणी को सबसे संतुलित तरीके से एक चरणबद्ध रास्ते के रूप में समझा जा सकता है:
इस नजरिए से LG का रुख विरोधाभासी नहीं, बल्कि सावधान है। कंपनी solid-state बैटरियों को खारिज नहीं कर रही; वह तकनीकी संभावना और औद्योगिक तैयारी के बीच अंतर बता रही है। लैंसिंग संयंत्र, LMR, LFP, NMC और cylindrical-cell कार्यक्रम एक ही व्यावसायिक तर्क की ओर इशारा करते हैं: इस दशक के बाकी हिस्से में वे बैटरी सुधार अधिक असर डाल सकते हैं जिन्हें बड़े पैमाने पर बनाया जा सके। EV की solid-state बैटरियों का भविष्य अब भी इस बात पर निर्भर है कि बड़े आकार के सेल का उत्पादन भरोसेमंद, टिकाऊ और किफायती कैसे बनाया जाता है।