क्रेमलिन ने रूस में नई व्यापक सैन्य लामबंदी की तैयारी संबंधी खबरों को खारिज किया है। 25 अगस्त को रूसी मीडिया आउटलेट RTVI से बातचीत में क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने इन्हें ‘गढ़ी हुई कहानियां’ बताया और यूक्रेनी अधिकारियों पर रूसी समाज को ‘वैचारिक रूप से अस्थिर’ करने की कोशिश का आरोप लगाया।
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यह बयान यूक्रेनी अधिकारियों की चेतावनियों से टकराता है। उनका कहना है कि रूस को अपने युद्ध प्रयासों को जारी रखने के लिए अधिक सैनिकों की जरूरत पड़ सकती है। हालांकि, उपलब्ध साक्ष्य केवल परस्पर विरोधी दावों को दर्ज करते हैं—रूस की नई लामबंदी के किसी पुष्ट आदेश की पुष्टि नहीं करते।
पेस्कोव ने क्या कहा?
पेस्कोव का बयान दो हिस्सों में था: स्पष्ट इनकार और यूक्रेन पर आरोप। उन्होंने कहा कि नई लामबंदी की खबरें क्रेमलिन की किसी वास्तविक योजना को प्रतिबिंबित नहीं करतीं। उनके अनुसार, यूक्रेनी अधिकारी इन खबरों को जानबूझकर सूचना क्षेत्र में फैला रहे हैं ताकि रूस में चिंता और राजनीतिक अस्थिरता पैदा हो।
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उपलब्ध रिपोर्टों में उद्धृत रूसी अधिकारियों का सार्वजनिक रुख भी यही रहा है कि फिलहाल बड़े पैमाने पर सैनिक बुलाने की जरूरत नहीं है। उनका कहना है कि रूसी सेना में अनुबंध आधारित भर्ती के जरिए पर्याप्त personnel जुटाए जा रहे हैं।
संयुक्त राष्ट्र में रूस के स्थायी प्रतिनिधि वासिली नेबेंज़्या ने कहा कि उनकी जानकारी के अनुसार लामबंदी ‘न तो नियोजित है और न ही अपेक्षित’। हालांकि, उन्होंने चुनावों के बाद की स्थिति पर नजर रखने की बात भी कही।
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जेलेंस्की का दावा क्या है?
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने इससे बिल्कुल अलग आकलन पेश किया है। उनका कहना है कि यूक्रेन में जारी सैन्य अभियान को बनाए रखने के लिए रूस 2026 में बाद के चरण में कम से कम 3 लाख अतिरिक्त सैनिक जुटा सकता है। उन्होंने इसकी संभावित समय-सीमा सितंबर में होने वाले स्टेट ड्यूमा चुनावों के बाद की बताई।
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जेलेंस्की ने यह भी दावा किया कि 2026 की शुरुआत से रूस को 2.67 लाख सैन्यकर्मियों का नुकसान हुआ है, जिनमें लगभग 1.55 लाख लोग मारे गए। ये आंकड़े यूक्रेनी आकलन हैं और उद्धृत रिपोर्टों में इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
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इससे पहले जेलेंस्की ने कहा था कि रूसी सैन्य नुकसान नई भर्ती से अधिक होने लगा है। उनके अनुसार, 2026 के शुरुआती महीनों में रूस में लगभग 2.21 लाख लोग सेना में शामिल हुए, जबकि नुकसान करीब 2.25 लाख रहा। ये आंकड़े भी यूक्रेनी बयानों पर आधारित हैं, इसलिए इन्हें अंतिम या सर्वसम्मत आंकड़े नहीं माना जा सकता।
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अन्य इनकार और विपरीत संकेत
रूस की सुरक्षा परिषद के उपाध्यक्ष दिमित्री मेदवेदेव ने भी शरद ऋतु में लामबंदी की खबरों को गलत बताया। उन्होंने इन्हें चुनावों से पहले यूक्रेन की उकसावे वाली कार्रवाई कहा।
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40 मार्च में मेदवेदेव ने यह भी कहा था कि नई लामबंदी की तत्काल जरूरत नहीं है, क्योंकि अनुबंधित सैनिक सेना के घोषित कार्यों के लिए पर्याप्त हैं।
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दूसरी ओर, यूक्रेनी सैन्य खुफिया ने ऐसे संकेतों की ओर इशारा किया है जिन्हें वह रूस की भर्ती बढ़ाने की संभावित तैयारी मानती है। इनमें अनुबंध आधारित भर्ती की रफ्तार धीमी पड़ना भी शामिल है। उसी रिपोर्टिंग में 2026 की पहली छमाही के दौरान रूस के रक्षा मंत्रालय के साथ लगभग 2 लाख अनुबंध और 16 हजार स्वयंसेवकों के जुड़ने के आधिकारिक आंकड़े उद्धृत किए गए हैं। ये खुफिया और मीडिया दावे हैं; इनसे यह स्वतंत्र रूप से साबित नहीं होता कि लामबंदी का फैसला हो चुका है।
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नाटो से जुड़े एक आकलन में कहा गया कि मई 2026 की निगरानी अवधि के दौरान रूस की नई लामबंदी पर कोई आधिकारिक निर्णय सामने नहीं आया, हालांकि अफवाहें जारी रहीं।
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2022 की तुलना क्यों महत्वपूर्ण है?
मौजूदा विवाद सितंबर 2022 की घटनाओं की याद दिलाता है। उस समय क्रेमलिन ने लामबंदी पर विचार किए जाने से इनकार किया था, लेकिन कुछ ही समय बाद राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने रिजर्व सैनिकों की ‘आंशिक लामबंदी’ की घोषणा कर दी। इस अभियान को आधिकारिक तौर पर लगभग 3 लाख सैनिकों से जोड़ा गया था।
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इसी वजह से आज के आधिकारिक इनकार राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण नजर आते हैं। फिर भी, 2022 की समानता यह साबित नहीं करती कि नई लामबंदी निश्चित रूप से होने वाली है। यह इतिहास केवल इतना संकेत देता है कि ऐसे आश्वासनों को सावधानी से देखना चाहिए—इसे उसी घटनाक्रम की पुनरावृत्ति का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
निष्कर्ष
पेस्कोव का मौजूदा संदेश यह है कि रूस में लामबंदी की खबरें यूक्रेन द्वारा फैलाई गई सूचना-युद्ध की कोशिश हैं, जिनका उद्देश्य रूसी समाज को अस्थिर करना है। जेलेंस्की का आकलन इसके विपरीत है: उनके अनुसार युद्धक्षेत्र में बढ़ते नुकसान और भर्ती पर दबाव रूस को लगभग 3 लाख सैनिकों की नई लामबंदी की ओर धकेल सकता है। नेबेंज़्या और मेदवेदेव समेत रूसी अधिकारियों ने ऐसी योजना से इनकार किया है।
उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर सबसे सावधान निष्कर्ष यही है कि रूस ने नई लामबंदी के आदेश की सार्वजनिक पुष्टि नहीं की है। इसके बावजूद, उसकी सैनिक जरूरतों और भविष्य की योजनाओं को लेकर रूस और यूक्रेन के दावे एक-दूसरे से काफी अलग हैं और मामला अभी अनसुलझा है।