उनका मानना है कि यही भावनात्मक समर्पण ताइवान को उन देशों के खिलाफ भी मजबूत प्रतिस्पर्धी बनाता है जिनकी बेसबॉल परंपरा या संसाधन अधिक बड़े हैं।
कुरियामा का ताइवान के प्रति सम्मान सिर्फ दर्शक के रूप में नहीं है—उनका इस देश से पेशेवर संबंध भी रहा है।
वे 2012 से 2021 तक जापान की प्रोफेशनल बेसबॉल टीम होक्काइडो निप्पॉन‑हैम फाइटर्स के मैनेजर रहे और 2016 में टीम को जापान सीरीज़ खिताब दिलाया। बाद में वे इसी क्लब के मुख्य बेसबॉल अधिकारी भी बने।
फाइटर्स में काम करते समय उन्होंने कई ताइवानी खिलाड़ियों के साथ काम किया, जिससे उन्हें ताइवान की प्रतिभा और वहां की बेसबॉल संस्कृति को करीब से समझने का मौका मिला। इसी अनुभव ने उनके मन में ताइवान के लिए विशेष सम्मान पैदा किया।
ताइपेई में अपने संबोधन में कुरियामा ने एक बड़ा दृष्टिकोण भी साझा किया। उनका कहना था कि बेसबॉल क्षेत्रीय सहयोग का माध्यम बन सकता है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि ताइवान, जापान, दक्षिण कोरिया और चीन जैसे देश—जहां इतिहास और राजनीति के कारण कभी‑कभी दूरी महसूस होती है—खेल के जरिए करीब आ सकते हैं।
कुरियामा के अनुसार प्रतिस्पर्धा और खेल भावना साथ‑साथ चल सकती है। जब देश मैदान पर एक-दूसरे से मुकाबला करते हैं और फिर अनुभव साझा करते हैं, तो यह दीवारों को गिराने और आपसी समझ बढ़ाने में मदद कर सकता है।
कुरियामा के शब्दों में, ताइवान की उपलब्धियों को समझने के लिए सिर्फ स्कोरबोर्ड देखना काफी नहीं है। इसके पीछे एक ऐसी संस्कृति है जिसमें समुदाय का गर्व, प्रशंसकों का उत्साह और खिलाड़ियों की प्रतिबद्धता मिलकर खेल को राष्ट्रीय पहचान का हिस्सा बना देते हैं।
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