नेतन्याहू का 'इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ब्रिटेन' कमेंट: उन्होंने क्या कहा, क्यों मायने रखता है, और ब्रिटेन की प्रतिक्रिया
13 अगस्त 2026 को इज़राइली PM नेतन्याहू ने 'मेलेक ब्लिट्ज़र हाइम' पॉडकास्ट पर ब्रिटेन को 'इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ब्रिटेन' कहा, जिस पर ब्रिटेन सरकार ने तुरंत कड़ी नाराजगी जताई और इसे 'पूरी तरह अस्वीकार्य' बताया। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब जुलाई 2024 में लेबर पार्टी के सत्ता में आने के बाद से UK इज़राइल संबंध 'फ्रोज...
प्रकाशितकर्ताDeepSeek-V4-Flash से संपादितGPT Image 1.5 से चित्र बनाए गए
13 अगस्त 2026 को इज़राइली PM नेतन्याहू ने 'मेलेक ब्लिट्ज़र हाइम' पॉडकास्ट पर ब्रिटेन को 'इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ब्रिटेन' कहा, जिस पर ब्रिटेन सरकार ने तुरंत कड़ी नाराजगी जताई और इसे 'पूरी तरह अस्वीकार्य' बताया।
यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब जुलाई 2024 में लेबर पार्टी के सत्ता में आने के बाद से UK इज़राइल संबंध 'फ्रोजन' हो गए हैं, जिसमें हथियारों पर प्रतिबंध, ICC के साथ सहयोग वापस लेना और मंत्रिस्तरीय संचार लगभग बंद होना शा...
What did Israeli Prime Minister Benjamin Netanyahu say about the United Kingdom on the Israeli podcast "Melech Blitzer Haim," calling it theAI-generated editorial illustration of the diplomatic controversy sparked by Netanyahu's podcast remarks.
AI संकेत
Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: What did Israeli Prime Minister Benjamin Netanyahu say about the United Kingdom on the Israeli podcast "Melech Blitzer Haim," calling it the. Article summary: On August 13, 2026, Israeli Prime Minister Benjamin Netanyahu called the United Kingdom the **"Islamic Republic of Britain"** during an appearance on Avi Harush's Israeli podcast *Melech Blitzer Haim* (broadcast on Army . Topic tags: general, general web. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, watermarks, charts with fake numbers, clic
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13 अगस्त, 2026 को इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक पॉडकास्ट में ब्रिटेन को 'इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ब्रिटेन' कहकर एक बड़ा कूटनीतिक विवाद खड़ा कर दिया। इस बयान की ब्रिटेन सरकार ने तुरंत निंदा की और दो पूर्व करीबी सहयोगियों के बीच संबंधों में गहरी गिरावट को उजागर किया ।
Studio Global AI
अपना शोध जारी रखें
इस पृष्ठ में एक स्रोत-समर्थित उत्तर शामिल है जिसे आप Studio Global के अंदर जारी रख सकते हैं।
"नेतन्याहू का 'इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ब्रिटेन' कमेंट: उन्होंने क्या कहा, क्यों मायने रखता है, और ब्रिटेन की प्रतिक्रिया" का संक्षिप्त उत्तर क्या है?
13 अगस्त 2026 को इज़राइली PM नेतन्याहू ने 'मेलेक ब्लिट्ज़र हाइम' पॉडकास्ट पर ब्रिटेन को 'इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ब्रिटेन' कहा, जिस पर ब्रिटेन सरकार ने तुरंत कड़ी नाराजगी जताई और इसे 'पूरी तरह अस्वीकार्य' बताया।
सबसे पहले सत्यापित करने योग्य मुख्य बिंदु क्या हैं?
13 अगस्त 2026 को इज़राइली PM नेतन्याहू ने 'मेलेक ब्लिट्ज़र हाइम' पॉडकास्ट पर ब्रिटेन को 'इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ब्रिटेन' कहा, जिस पर ब्रिटेन सरकार ने तुरंत कड़ी नाराजगी जताई और इसे 'पूरी तरह अस्वीकार्य' बताया। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब जुलाई 2024 में लेबर पार्टी के सत्ता में आने के बाद से UK इज़राइल संबंध 'फ्रोजन' हो गए हैं, जिसमें हथियारों पर प्रतिबंध, ICC के साथ सहयोग वापस लेना और मंत्रिस्तरीय संचार लगभग बंद होना शा...
नेतन्याहू का 'इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ब्रिटेन' कमेंट: उन्होंने क्या कहा, क्यों मायने रखता है, और ब्रिटेन की प्रतिक्रिया
13 अगस्त 2026 को इज़राइली PM नेतन्याहू ने 'मेलेक ब्लिट्ज़र हाइम' पॉडकास्ट पर ब्रिटेन को 'इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ब्रिटेन' कहा, जिस पर ब्रिटेन सरकार ने तुरंत कड़ी नाराजगी जताई और इसे 'पूरी तरह अस्वीकार्य' बताया। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब जुलाई 2024 में लेबर पार्टी के सत्ता में आने के बाद से UK इज़राइल संबंध 'फ्रोज...
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13 अगस्त 2026 को इज़राइली PM नेतन्याहू ने 'मेलेक ब्लिट्ज़र हाइम' पॉडकास्ट पर ब्रिटेन को 'इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ब्रिटेन' कहा, जिस पर ब्रिटेन सरकार ने तुरंत कड़ी नाराजगी जताई और इसे 'पूरी तरह अस्वीकार्य' बताया।
यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब जुलाई 2024 में लेबर पार्टी के सत्ता में आने के बाद से UK इज़राइल संबंध 'फ्रोजन' हो गए हैं, जिसमें हथियारों पर प्रतिबंध, ICC के साथ सहयोग वापस लेना और मंत्रिस्तरीय संचार लगभग बंद होना शा...
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13 अगस्त, 2026 को इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक पॉडकास्ट में ब्रिटेन को 'इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ब्रिटेन' कहकर एक बड़ा कूटनीतिक विवाद खड़ा कर दिया। इस बयान की ब्रिटेन सरकार ने तुरंत निंदा की और दो पूर्व करीबी सहयोगियों के बीच संबंधों में गहरी गिरावट को उजागर किया ।
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"नेतन्याहू का 'इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ब्रिटेन' कमेंट: उन्होंने क्या कहा, क्यों मायने रखता है, और ब्रिटेन की प्रतिक्रिया" का संक्षिप्त उत्तर क्या है?
13 अगस्त 2026 को इज़राइली PM नेतन्याहू ने 'मेलेक ब्लिट्ज़र हाइम' पॉडकास्ट पर ब्रिटेन को 'इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ब्रिटेन' कहा, जिस पर ब्रिटेन सरकार ने तुरंत कड़ी नाराजगी जताई और इसे 'पूरी तरह अस्वीकार्य' बताया।
सबसे पहले सत्यापित करने योग्य मुख्य बिंदु क्या हैं?
13 अगस्त 2026 को इज़राइली PM नेतन्याहू ने 'मेलेक ब्लिट्ज़र हाइम' पॉडकास्ट पर ब्रिटेन को 'इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ब्रिटेन' कहा, जिस पर ब्रिटेन सरकार ने तुरंत कड़ी नाराजगी जताई और इसे 'पूरी तरह अस्वीकार्य' बताया। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब जुलाई 2024 में लेबर पार्टी के सत्ता में आने के बाद से UK इज़राइल संबंध 'फ्रोजन' हो गए हैं, जिसमें हथियारों पर प्रतिबंध, ICC के साथ सहयोग वापस लेना और मंत्रिस्तरीय संचार लगभग बंद होना शा...
इज़राइली पॉडकास्ट 'मेलेक ब्लिट्ज़र हाइम' (जो आर्मी रेडियो/गैलिट्ज़ाहल पर प्रसारित हुआ) पर आवी हारुश के साथ बातचीत में नेतन्याहू ने ब्रिटिश मीडिया द्वारा इज़राइल के कवरेज की आलोचना की । उन्होंने विंस्टन चर्चिल के बेटे, पत्रकार रैंडोल्फ चर्चिल की प्रशंसा की, जिन्होंने 1967 के छह दिवसीय युद्ध के दौरान इज़राइल के पक्ष में रिपोर्टिंग की थी। फिर उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा: "आज ब्रिटेन में ऐसा खोजकर देखिए, जिसे आप 'इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ब्रिटेन' कह सकते हैं"।
जब होस्ट ने पूछा कि क्या पूरा यूरोप भी ऐसा ही है, तो नेतन्याहू ने और आगे बढ़ते हुए कहा: "हाँ, लेकिन आप जानते हैं, किसी ने कहा था कि परमाणु हथियारों वाला पहला इस्लामिक गणराज्य 'इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ब्रिटेन' होगा" — यह ईरान के साथ सीधी तुलना थी । रिपोर्टों के अनुसार, वे 2024 के एक मजाक को दोहरा रहे थे जिसका श्रेय तत्कालीन अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस को दिया जाता है ।
ब्रिटेन सरकार की सख्त प्रतिक्रिया
ब्रिटेन ने तुरंत और कड़ा रुख अपनाया। एक सरकारी प्रवक्ता ने इसे "पूरी तरह अस्वीकार्य" बताया और पुष्टि की कि यह मामला सीधे इज़राइली सरकार के सामने उठाया गया है । विदेश, राष्ट्रमंडल और विकास कार्यालय (FCDO) ने एक सार्वजनिक बयान जारी कर इस टिप्पणी की निंदा की, जिसे ब्रिटिश अधिकारियों और सभी दलों के नेताओं ने एक पुराने अंतरराष्ट्रीय सहयोगी का अपमान माना । डाउनिंग स्ट्रीट के पूर्व चीफ ऑफ स्टाफ स्टीव हिल्टन ने इसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के एक प्रमुख साथी को अलग-थलग करने की "भयानक कूटनीतिक विफलता" करार दिया ।
व्यापक संदर्भ: लेबर सरकार (2024-2026) के तहत UK-इज़राइल संबंध
नेतन्याहू की यह टिप्पणी अचानक नहीं आई। जुलाई 2024 में लेबर पार्टी के सत्ता में आने के बाद से दोनों देशों के संबंध ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच गए हैं:
'फ्रोजन' रिश्ते: जुलाई 2026 तक, इज़राइली अधिकारियों ने द टेलीग्राफ को बताया कि प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम की सरकार के साथ संबंध 'फ्रोजन' हैं। लंदन और जेरूसलम के मंत्रियों के बीच संवाद लगभग बंद हो चुका है, और कोई नया रक्षा या व्यापार समझौता नहीं हो रहा है ।
हथियारों पर प्रतिबंध: सितंबर 2024 में, ब्रिटेन ने इज़राइल को 350 में से 30 हथियार निर्यात लाइसेंस निलंबित कर दिए, यह कहते हुए कि इनके अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करने में इस्तेमाल होने का 'स्पष्ट जोखिम' है ।
ICC में बदलाव: लेबर सरकार ने इज़राइली अधिकारियों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) की कार्रवाई पर अपनी आपत्ति वापस ले ली, जो पिछली कंज़र्वेटिव सरकार के रुख से एक बड़ा बदलाव था ।
व्यापार वार्ता स्थगित: मई 2025 में, विदेश सचिव डेविड लैमी ने ब्रिटेन-इज़राइल मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत रोक दी ।
फिलिस्तीन की मान्यता: ब्रिटेन ने औपचारिक रूप से फिलिस्तीन राज्य को मान्यता दी, जिससे इज़राइली सरकार और नाराज हो गई ।
लेबर पार्टी का आंतरिक दबाव: लेबर पार्टी में फिलिस्तीन समर्थक भावना में वृद्धि हुई है। YouGov के एक सर्वेक्षण में 47% लेबर मतदाताओं ने फिलिस्तीनी पक्ष का समर्थन किया, जिसने सरकार को इज़राइल पर सख्त रुख अपनाने के लिए प्रेरित किया ।
यहूदी समूहों, ब्रिटिश अधिकारियों और मुस्लिम काउंसिल ऑफ ब्रिटेन की प्रतिक्रिया
ब्रिटिश यहूदी नेता: कई ब्रिटिश यहूदी संगठनों ने नेतन्याहू की भाषा की निंदा की। प्रोग्रेसिव जूडाइज्म आंदोलन के नेताओं, रब्बी चार्ली बैगिंस्की और रब्बी जोश लेवी ने कहा कि प्रधानमंत्री एक प्रमुख सहयोगी को अलग-थलग कर रहे हैं और ऐसी भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं जो दक्षिणपंथी इस्लामोफोबिक विचारधारा को बढ़ावा देती है । उन्होंने चेतावनी दी: "ऐसे समय में जब हमारे देश में यहूदी विरोधी भावना, मुस्लिम विरोधी नफरत और सामाजिक विभाजन वास्तविक भय पैदा कर रहे हैं, इस तरह की भाषा खतरनाक और गैर-जिम्मेदाराना है" ।
इज़राइली विपक्ष: नेतन्याहू के राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों ने भी उन पर हमला किया, उन पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य के साथ संबंधों को अनावश्यक रूप से नुकसान पहुंचाने और 'भयानक कूटनीतिक विफलता' की देखरेख करने का आरोप लगाया ।
मुस्लिम काउंसिल ऑफ ब्रिटेन (MCB): MCB के एक प्रवक्ता ने अल जज़ीरा को बताया कि नेतन्याहू की टिप्पणी "इज़राइल के साथ अपने संबंधों पर पुनर्विचार करने की ब्रिटेन की आवश्यकता" को उजागर करती है और यह टिप्पणी इज़राइल के नेतृत्व पर खराब प्रभाव डालती है ।
ब्रिटिश राजनीतिक दल: सभी दलों के नेताओं ने नाराजगी जताई, हालांकि ब्रिटिश दक्षिणपंथ के कुछ लोगों ने तर्क दिया कि लेबर सरकार की इज़राइल नीति से नेतन्याहू की निराशा समझ में आती है । डाउनिंग स्ट्रीट के पूर्व सलाहकार गेविन बारवेल ने इस टिप्पणी को "स्पष्ट इस्लामोफोबिया" करार दिया ।
मुख्य निष्कर्ष
नेतन्याहू का 'इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ब्रिटेन' वाला तंज एक जानबूझकर किया गया उकसावा था, जो दशकों में UK-इज़राइल के सबसे खराब द्विपक्षीय संबंधों को दर्शाता है। ब्रिटेन सरकार की तत्काल और कड़ी निंदा, यहूदी समूहों और इज़राइली विपक्षी हस्तियों की व्यापक आलोचना इस बात को रेखांकित करती है कि नेतन्याहू की सरकार अपने पारंपरिक पश्चिमी सहयोगियों से कितनी अलग-थलग हो गई है। इस टिप्पणी से उस रिश्ते में सुधार की संभावना नहीं है जिसे पहले से ही 'फ्रोजन' बताया जा रहा है, और वर्तमान लेबर प्रशासन के तहत इसके पिघलने के कोई संकेत नहीं हैं।
zamon.uzNetanyahu called the United Kingdom the "British Islamic ...
इज़राइली पॉडकास्ट 'मेलेक ब्लिट्ज़र हाइम' (जो आर्मी रेडियो/गैलिट्ज़ाहल पर प्रसारित हुआ) पर आवी हारुश के साथ बातचीत में नेतन्याहू ने ब्रिटिश मीडिया द्वारा इज़राइल के कवरेज की आलोचना की । उन्होंने विंस्टन चर्चिल के बेटे, पत्रकार रैंडोल्फ चर्चिल की प्रशंसा की, जिन्होंने 1967 के छह दिवसीय युद्ध के दौरान इज़राइल के पक्ष में रिपोर्टिंग की थी। फिर उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा: "आज ब्रिटेन में ऐसा खोजकर देखिए, जिसे आप 'इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ब्रिटेन' कह सकते हैं"।
जब होस्ट ने पूछा कि क्या पूरा यूरोप भी ऐसा ही है, तो नेतन्याहू ने और आगे बढ़ते हुए कहा: "हाँ, लेकिन आप जानते हैं, किसी ने कहा था कि परमाणु हथियारों वाला पहला इस्लामिक गणराज्य 'इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ब्रिटेन' होगा" — यह ईरान के साथ सीधी तुलना थी । रिपोर्टों के अनुसार, वे 2024 के एक मजाक को दोहरा रहे थे जिसका श्रेय तत्कालीन अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस को दिया जाता है ।
ब्रिटेन सरकार की सख्त प्रतिक्रिया
ब्रिटेन ने तुरंत और कड़ा रुख अपनाया। एक सरकारी प्रवक्ता ने इसे "पूरी तरह अस्वीकार्य" बताया और पुष्टि की कि यह मामला सीधे इज़राइली सरकार के सामने उठाया गया है । विदेश, राष्ट्रमंडल और विकास कार्यालय (FCDO) ने एक सार्वजनिक बयान जारी कर इस टिप्पणी की निंदा की, जिसे ब्रिटिश अधिकारियों और सभी दलों के नेताओं ने एक पुराने अंतरराष्ट्रीय सहयोगी का अपमान माना । डाउनिंग स्ट्रीट के पूर्व चीफ ऑफ स्टाफ स्टीव हिल्टन ने इसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के एक प्रमुख साथी को अलग-थलग करने की "भयानक कूटनीतिक विफलता" करार दिया ।
व्यापक संदर्भ: लेबर सरकार (2024-2026) के तहत UK-इज़राइल संबंध
नेतन्याहू की यह टिप्पणी अचानक नहीं आई। जुलाई 2024 में लेबर पार्टी के सत्ता में आने के बाद से दोनों देशों के संबंध ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच गए हैं:
'फ्रोजन' रिश्ते: जुलाई 2026 तक, इज़राइली अधिकारियों ने द टेलीग्राफ को बताया कि प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम की सरकार के साथ संबंध 'फ्रोजन' हैं। लंदन और जेरूसलम के मंत्रियों के बीच संवाद लगभग बंद हो चुका है, और कोई नया रक्षा या व्यापार समझौता नहीं हो रहा है ।
हथियारों पर प्रतिबंध: सितंबर 2024 में, ब्रिटेन ने इज़राइल को 350 में से 30 हथियार निर्यात लाइसेंस निलंबित कर दिए, यह कहते हुए कि इनके अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करने में इस्तेमाल होने का 'स्पष्ट जोखिम' है ।
ICC में बदलाव: लेबर सरकार ने इज़राइली अधिकारियों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) की कार्रवाई पर अपनी आपत्ति वापस ले ली, जो पिछली कंज़र्वेटिव सरकार के रुख से एक बड़ा बदलाव था ।
व्यापार वार्ता स्थगित: मई 2025 में, विदेश सचिव डेविड लैमी ने ब्रिटेन-इज़राइल मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत रोक दी ।
फिलिस्तीन की मान्यता: ब्रिटेन ने औपचारिक रूप से फिलिस्तीन राज्य को मान्यता दी, जिससे इज़राइली सरकार और नाराज हो गई ।
लेबर पार्टी का आंतरिक दबाव: लेबर पार्टी में फिलिस्तीन समर्थक भावना में वृद्धि हुई है। YouGov के एक सर्वेक्षण में 47% लेबर मतदाताओं ने फिलिस्तीनी पक्ष का समर्थन किया, जिसने सरकार को इज़राइल पर सख्त रुख अपनाने के लिए प्रेरित किया ।
यहूदी समूहों, ब्रिटिश अधिकारियों और मुस्लिम काउंसिल ऑफ ब्रिटेन की प्रतिक्रिया
ब्रिटिश यहूदी नेता: कई ब्रिटिश यहूदी संगठनों ने नेतन्याहू की भाषा की निंदा की। प्रोग्रेसिव जूडाइज्म आंदोलन के नेताओं, रब्बी चार्ली बैगिंस्की और रब्बी जोश लेवी ने कहा कि प्रधानमंत्री एक प्रमुख सहयोगी को अलग-थलग कर रहे हैं और ऐसी भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं जो दक्षिणपंथी इस्लामोफोबिक विचारधारा को बढ़ावा देती है । उन्होंने चेतावनी दी: "ऐसे समय में जब हमारे देश में यहूदी विरोधी भावना, मुस्लिम विरोधी नफरत और सामाजिक विभाजन वास्तविक भय पैदा कर रहे हैं, इस तरह की भाषा खतरनाक और गैर-जिम्मेदाराना है" ।
इज़राइली विपक्ष: नेतन्याहू के राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों ने भी उन पर हमला किया, उन पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य के साथ संबंधों को अनावश्यक रूप से नुकसान पहुंचाने और 'भयानक कूटनीतिक विफलता' की देखरेख करने का आरोप लगाया ।
मुस्लिम काउंसिल ऑफ ब्रिटेन (MCB): MCB के एक प्रवक्ता ने अल जज़ीरा को बताया कि नेतन्याहू की टिप्पणी "इज़राइल के साथ अपने संबंधों पर पुनर्विचार करने की ब्रिटेन की आवश्यकता" को उजागर करती है और यह टिप्पणी इज़राइल के नेतृत्व पर खराब प्रभाव डालती है ।
ब्रिटिश राजनीतिक दल: सभी दलों के नेताओं ने नाराजगी जताई, हालांकि ब्रिटिश दक्षिणपंथ के कुछ लोगों ने तर्क दिया कि लेबर सरकार की इज़राइल नीति से नेतन्याहू की निराशा समझ में आती है । डाउनिंग स्ट्रीट के पूर्व सलाहकार गेविन बारवेल ने इस टिप्पणी को "स्पष्ट इस्लामोफोबिया" करार दिया ।
मुख्य निष्कर्ष
नेतन्याहू का 'इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ब्रिटेन' वाला तंज एक जानबूझकर किया गया उकसावा था, जो दशकों में UK-इज़राइल के सबसे खराब द्विपक्षीय संबंधों को दर्शाता है। ब्रिटेन सरकार की तत्काल और कड़ी निंदा, यहूदी समूहों और इज़राइली विपक्षी हस्तियों की व्यापक आलोचना इस बात को रेखांकित करती है कि नेतन्याहू की सरकार अपने पारंपरिक पश्चिमी सहयोगियों से कितनी अलग-थलग हो गई है। इस टिप्पणी से उस रिश्ते में सुधार की संभावना नहीं है जिसे पहले से ही 'फ्रोजन' बताया जा रहा है, और वर्तमान लेबर प्रशासन के तहत इसके पिघलने के कोई संकेत नहीं हैं।
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