15 अगस्त 2026 को प्रकाशित एक पॉडकास्ट में इतमर बेन ग्विर ने गाजा में हर रात “30 या 40” लोगों को मारने की बात कही और कुछ फिलिस्तीनियों को “जीने के लायक नहीं” तथा “इंसान भी नहीं” बताया। [1][3][4] बेन ग्विर फिलिस्तीनियों के कथित ‘स्वैच्छिक प्रवास’, गाजा में इजरायली बस्तियों और वहां लंबे समय तक इजरायली नियंत्रण के समर्थ...
शोध उत्तर

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: What did Israeli National Security Minister Itamar Ben-Gvir say on a podcast hosted by former hostage Rom Braslavski about killing 30 to 40. Article summary: Ben-Gvir used the podcast to advocate a markedly more lethal and expansionist Gaza policy, but he does not command the Israel Defense Forces or have legal power to order Gaza strikes. His words are politically consequent. Topic tags: general, general web, user generated, news. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, watermarks, charts wi
इजरायल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतमर बेन-ग्विर ने पूर्व गाजा बंधक रोम ब्रास्लाव्स्की के पॉडकास्ट पर गाजा के लिए कहीं अधिक हिंसक और विस्तारवादी नीति की वकालत की। उन्होंने हर रात दर्जनों लोगों की हत्या, फिलिस्तीनियों के लिए अपमानजनक भाषा, ‘प्रवास’ और गाजा में इजरायली बस्तियों का समर्थन दोहराया।
इन बयानों का राजनीतिक असर हो सकता है, लेकिन इससे बेन-ग्विर को इजरायल की सेना—इजरायली डिफेंस फोर्सेज (IDF)—को आदेश देने का अधिकार नहीं मिल जाता।
15 अगस्त को सामने आए पॉडकास्ट एपिसोड में बेन-ग्विर ने कहा कि इजरायल को गाजा में लक्षित हत्याएं करनी चाहिए और हर रात “30 या 40” लोगों को खत्म करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि लक्ष्य केवल वे लोग नहीं होने चाहिए जो उसी क्षण तत्काल खतरा पैदा कर रहे हों। रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने गाजा के कुछ लोगों को “जीने के लायक नहीं”, “जिन्हें जीवित नहीं रहना चाहिए” और “इंसान भी नहीं” कहा।
ये टिप्पणियां ऐसे समय आईं जब बेन-ग्विर इजरायली सैन्य हमलों में कमी की आलोचना कर रहे थे और प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की नीति से सार्वजनिक रूप से असहमति जता रहे थे। इसलिए उनका बयान सिर्फ अधिक सैन्य हिंसा की मांग नहीं था; यह सरकार की मौजूदा दिशा को चुनौती भी था।
बातचीत में दोषी ठहराए गए आतंकवादियों को फांसी देने का मुद्दा भी उठा। ब्रास्लाव्स्की ने बेन-ग्विर से कहा कि बेन-ग्विर की ओत्ज़मा येहूदीत पार्टी द्वारा आगे बढ़ाए जा रहे मृत्युदंड कानून के तहत उन्हें खुद फांसी देने की अनुमति दी जाए। उपलब्ध रिपोर्टें इस बातचीत और बेन-ग्विर के उस कानून के राजनीतिक समर्थन की पुष्टि करती हैं; हालांकि, केवल इस सामग्री के आधार पर पॉडकास्ट में कानून लागू करने की उनकी हर पसंदीदा प्रक्रिया स्पष्ट नहीं होती।
बेन-ग्विर अलग से गाजा के फिलिस्तीनियों के लिए जिसे वे स्वैच्छिक “प्रवास” कहते हैं, उसका समर्थन करते रहे हैं। जुलाई के अंत में उन्होंने कहा था कि हमास को नष्ट करना और फिलिस्तीनियों को गाजा से बाहर जाने के लिए प्रोत्साहित करना ही वह एकमात्र समाधान है जिसमें इजरायल को भागीदार होना चाहिए। उन्होंने मध्यस्थों के जरिए हमास के साथ समझौते को भी खारिज किया।
यह रुख गाजा में इजरायली बस्तियों और लंबे समय तक इजरायली नियंत्रण के उनके समर्थन से मेल खाता है—न कि बातचीत के जरिए इजरायली वापसी से।
बेन-ग्विर इजरायल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री हैं। उनके मंत्रालय के तहत इजरायल पुलिस और इजरायल जेल सेवा आती हैं। इससे वे घरेलू पुलिस व्यवस्था, जेल नीति और संबंधित कानून-प्रवर्तन प्रशासन में प्रभावशाली भूमिका निभाते हैं।
लेकिन उनकी शक्तियों की स्पष्ट सीमाएं हैं:
इसका अर्थ यह नहीं कि उनके बयान महत्वहीन हैं। वे मंत्रिमंडल के सदस्य हैं, दक्षिणपंथी गठबंधन की एक प्रमुख पार्टी का नेतृत्व करते हैं और उनकी पार्टी का संसदीय समर्थन नेतन्याहू पर दबाव डाल सकता है। यानी गाजा युद्ध पर उनका प्रभाव राजनीतिक और संस्थागत है, परिचालन कमान वाला नहीं।
दक्षिण अफ्रीका ने अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) में इजरायल पर नरसंहार कन्वेंशन के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए मामला दायर किया है। इस मामले में दक्षिण अफ्रीका ने इजरायली राजनीतिक और सैन्य अधिकारियों के बयानों को ऐसे प्रमाण के रूप में पेश किया है, जिनसे गाजा में फिलिस्तीनियों को एक समूह के रूप में नष्ट करने के कथित इरादे का अनुमान लगाया जा सकता है।
यहां कानूनी अंतर समझना जरूरी है। ICJ के अंतरिम उपायों वाले आदेशों ने यह फैसला नहीं दिया कि इजरायल ने नरसंहार किया है। अदालत ने गाजा के फिलिस्तीनियों के उन अधिकारों की संभाव्यता पर विचार किया जो नरसंहार कन्वेंशन के तहत संरक्षित हैं और इजरायल को संरक्षित समूह के सदस्यों की हत्या जैसे निषिद्ध कृत्यों को रोकने तथा नरसंहार के लिए प्रत्यक्ष और सार्वजनिक उकसावे को रोकने और दंडित करने के उपाय करने को कहा।
इसलिए बेन-ग्विर की भाषा को दक्षिण अफ्रीका या अन्य पक्ष अमानवीयकरण, संभावित इरादे या उकसावे के संदर्भ-साक्ष्य के तौर पर उद्धृत कर सकते हैं। लेकिन अकेले ये टिप्पणियां बेन-ग्विर की व्यक्तिगत आपराधिक जिम्मेदारी या इजरायल द्वारा नरसंहार किए जाने की ICJ की अंतिम घोषणा नहीं हैं। इजरायल नरसंहार के आरोप को खारिज करता है और कहता है कि उसका युद्ध फिलिस्तीनियों के एक संरक्षित समूह के खिलाफ नहीं, बल्कि हमास के खिलाफ है।
पॉडकास्ट पर की गई टिप्पणियां बेन-ग्विर के उस अति-राष्ट्रवादी मतदाता आधार को मजबूत कर सकती हैं जो अधिकतम सैन्य बल, गाजा पर स्थायी इजरायली नियंत्रण, वहां बस्तियों और फिलिस्तीनियों के चले जाने का समर्थन करता है। रिपोर्टों के अनुसार, कभी हाशिये पर माने जाने वाले ऐसे विचार 27 अक्टूबर को होने वाले इजरायली चुनाव से पहले अधिक प्रमुख हो रहे हैं। साथ ही, इजरायल के घरेलू मीडिया में इस खास एपिसोड को अपेक्षाकृत कम कवरेज मिला।
यही विरोधाभास महत्वपूर्ण है: मुख्यधारा में सीमित चर्चा के बावजूद बयान उनके राजनीतिक आधार को स्पष्ट संदेश देते हैं। इससे नेतन्याहू के गठबंधन के भीतर बेन-ग्विर की सौदेबाजी की ताकत बढ़ सकती है। इसका यह मतलब नहीं कि वे सैन्य नीति खुद तय करते हैं, लेकिन नेतन्याहू के लिए ऐसा समझौता अपनाना कठिन हो सकता है जिससे बेन-ग्विर की पार्टी नाराज हो।
ये टिप्पणियां हमास के निरस्त्रीकरण और इजरायली सेना की गाजा से वापसी के क्रम को लेकर चल रहे विवाद के बीच आईं। इजरायली अधिकारियों का कहना है कि हमास के “वास्तविक निरस्त्रीकरण” के बिना सैनिक पीछे नहीं हटेंगे। इसके विपरीत, हमास ने कहा है कि भारी हथियार सौंपने की शर्त इजरायल की सैन्य कार्रवाई खत्म होना और उसकी सेना की वापसी है।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समर्थन वाले एक ढांचे में कथित तौर पर हमास के निरस्त्रीकरण को इजरायली सेना की चरणबद्ध वापसी से जोड़ा गया था। नेतन्याहू ने योजना में शामिल वापसी के प्रावधानों को खारिज करते हुए कहा कि हमास के पूरी तरह निरस्त्र होने तक इजरायल गाजा से नहीं हटेगा।
बेन-ग्विर का रुख इससे भी अधिक कठोर है। उन्होंने निरस्त्रीकरण और वापसी वाले समझौते को अस्वीकार्य बताया है तथा बातचीत के जरिए वापसी के बजाय इजरायली नियंत्रण, फिलिस्तीनियों के ‘प्रवास’ और गाजा में बस्तियों का समर्थन किया है।
इस तरह तीन अलग-अलग राजनीतिक रुख सामने आते हैं: हमास अपने निरस्त्रीकरण को इजरायली वापसी से जोड़ता है; ट्रंप का प्रस्ताव दोनों कदमों को एक-दूसरे से जोड़ता है; जबकि नेतन्याहू पहले निरस्त्रीकरण की शर्त पर अड़े हैं। बेन-ग्विर तो बातचीत के जरिए वापसी की बुनियाद को ही अस्वीकार करते हैं।
इस संदर्भ में उनके पॉडकास्ट बयान को सबसे ठीक तरह से गाजा में और अधिक सैन्य escalation तथा स्थायी नियंत्रण की सार्वजनिक मांग के रूप में समझा जा सकता है—ऐसी मांग जिसे राजनीतिक प्रभाव का सहारा है, लेकिन इजरायल की सैन्य कार्रवाइयों पर सीधी कमान का नहीं।
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15 अगस्त 2026 को प्रकाशित एक पॉडकास्ट में इतमर बेन ग्विर ने गाजा में हर रात “30 या 40” लोगों को मारने की बात कही और कुछ फिलिस्तीनियों को “जीने के लायक नहीं” तथा “इंसान भी नहीं” बताया। [1][3][4]
15 अगस्त 2026 को प्रकाशित एक पॉडकास्ट में इतमर बेन ग्विर ने गाजा में हर रात “30 या 40” लोगों को मारने की बात कही और कुछ फिलिस्तीनियों को “जीने के लायक नहीं” तथा “इंसान भी नहीं” बताया। [1][3][4] बेन ग्विर फिलिस्तीनियों के कथित ‘स्वैच्छिक प्रवास’, गाजा में इजरायली बस्तियों और वहां लंबे समय तक इजरायली नियंत्रण के समर्थक हैं—जिससे वे हमास के निरस्त्रीकरण और इजरायली वापसी से जुड़े प्रस्तावों के विरोध में खड़े होत...
उनके बयान ICJ में अमानवीय भाषा, संभावित इरादे या उकसावे के संदर्भ में पेश किए जा सकते हैं, लेकिन अदालत ने इन बयानों के आधार पर व्यक्तिगत या राज्य की आपराधिक जिम्मेदारी तय नहीं की है। [39][41][49]