पेज़ेश्कियान ने खामेनेई की मौजूदगी को देश के लिए “बहुत बड़ी ताकत” बताया, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया कि उनसे संपर्क में कठिनाई की वजह क्या है । उन्होंने यह भी नहीं बताया कि समस्या खामेनेई की स्वास्थ्य स्थिति, सुरक्षा कारणों, राजनीतिक परिस्थितियों या किसी अन्य वजह से जुड़ी है।
मोजतबा खामेनेई, जिनकी उम्र 56 वर्ष बताई गई है, अपने पिता आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद सर्वोच्च नेता बने। अली खामेनेई की मौत अमेरिका-इज़राइल के हवाई हमले में हुई थी। इसके बाद से मोजतबा खामेनेई सार्वजनिक रूप से दिखाई नहीं दिए हैं ।
उनकी सेहत को लेकर कई तरह की अटकलें हैं। कुछ स्वतंत्र जांच रिपोर्टों में दावा किया गया है कि वे उसी हमले में घायल हुए थे और कथित तौर पर उनके चेहरे पर गंभीर जलने के निशान तथा पैरों में चोटें आई थीं। हालांकि, ये विवरण पेज़ेश्कियान के 5 अगस्त वाले इंटरव्यू में नहीं दिए गए थे; वे अलग-अलग रिपोर्टों, जिनमें Iran International, Reuters और Jerusalem Post का उल्लेख है, पर आधारित हैं ।
रिपोर्टों के अनुसार, खामेनेई से जुड़े सार्वजनिक संदेश अब तक लिखित बयानों और हस्तलिखित संदेशों के रूप में सामने आए हैं। शासन ने उनकी कोई ऑडियो रिकॉर्डिंग भी जारी नहीं की है । Iran International की एक जांच में यह दावा किया गया कि पेज़ेश्कियान और खामेनेई के बीच अब तक ज्ञात एकमात्र आमने-सामने की मुलाकात कार की पिछली सीट पर हुई थी ।
इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इन्हें राष्ट्रपति के ताजा बयान से अलग संदर्भ में देखना जरूरी है।
इंटरव्यू में पेज़ेश्कियान ने ईरान की विदेश नीति से जुड़े फैसलों पर भी महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के 13 में से 12 सदस्यों ने जून में अमेरिका के साथ हुए समझौता ज्ञापन यानी Memorandum of Understanding (MoU) के पक्ष में मतदान किया था ।
पेज़ेश्कियान के मुताबिक, खामेनेई ने शुरुआत में कहा था कि वे इस समझौते के पक्ष में नहीं हैं। लेकिन परिषद में भारी बहुमत मिलने के बाद उन्होंने इसे मंजूरी दे दी ।
यह जानकारी Axios और Al Jazeera की पहले की रिपोर्टों से भी मेल खाती है, जिनके अनुसार खामेनेई ने अमेरिका के साथ बातचीत की अनुमति तो दी थी, लेकिन व्यक्तिगत रूप से MoU पर उनकी अलग राय थी । जून में जारी एक लिखित बयान में खामेनेई ने कहा था कि सैद्धांतिक रूप से उनका मत अलग था, लेकिन राष्ट्रपति और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सदस्यों की ओर से ईरानी जनता और “प्रतिरोध” के अधिकारों की रक्षा का आश्वासन मिलने के बाद उन्होंने इसे स्वीकार किया ।
13 में से 12 सदस्यों का समर्थन ईरान की निर्णय प्रक्रिया में संस्थागत मतभेदों का असामान्य संकेत माना जा रहा है ।
पेज़ेश्कियान ने कहा कि उनका प्रशासन 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद के “सबसे कठिन दौरों में से एक” से गुजर रहा है । सरकारी मीडिया से जुड़े Tasnim News Agency के अनुसार, उन्होंने बढ़ते प्रतिबंधों, सुरक्षा चुनौतियों, आर्थिक दबाव, सूखे और थोपे गए सैन्य संघर्ष का उल्लेख किया । अन्य रिपोर्टों में उनके हवाले से क्षेत्रीय सैन्य संघर्ष और नौसैनिक नाकेबंदी का भी जिक्र किया गया है ।
अप्रैल 2026 में पेज़ेश्कियान ने अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को “असहनीय” बताया था। उन्होंने X पर लिखा था कि नाकेबंदी के नाम पर की जा रही कार्रवाई प्रतिरोध और स्वतंत्रता की कीमत चुकाने वाले देश के खिलाफ सैन्य अभियान का विस्तार है ।
रिपोर्टों के अनुसार, इस नाकेबंदी ने ईरान की तेल निर्यात करने और जरूरी सामान आयात करने की क्षमता पर गंभीर असर डाला है। ईरान के केंद्रीय बैंक के गवर्नर ने चेतावनी दी थी कि देश में कुछ ही हफ्तों में भोजन और दवाओं की कमी हो सकती है ।
अपने इंटरव्यू में पेज़ेश्कियान ने कहा कि राष्ट्रीय एकता ने देश को अस्थिर करने की कोशिशों को रोकने में मदद की । लेकिन सर्वोच्च नेता की महीनों से चली आ रही सार्वजनिक अनुपस्थिति, उनसे संवाद में कठिनाई और अमेरिका के साथ समझौते पर सामने आए मतभेद ईरान की सत्ता संरचना को लेकर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।
फिर भी, उपलब्ध जानकारी से यह निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता कि “बहुत मुश्किल” संवाद का सीधा कारण खामेनेई की शारीरिक स्थिति ही है। पेज़ेश्कियान ने इस बारे में कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया है।