ईरान की सात-दिवसीय योजना का मतलब यह नहीं था कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य तुरंत खुल जाएगा। तेहरान ने इसे शर्तों से जुड़ा प्रस्ताव बताया: अमेरिका ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकेबंदी हटाए, ईरानी तेल की बिक्री पर प्रतिबंधों में छूट दे और क्षेत्रीय युद्धविराम माने—जिसमें लेबनान भी शामिल हो। इसके बाद सात दिन के भीतर जलडमरूमध्य खोलने और परमाणु कार्यक्रम पर अमेरिका के साथ रुकी हुई बातचीत फिर शुरू करने की बात थी। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के मुताबिक, सात दिन की अवधि अमेरिका की मंज़ूरी के बाद ही शुरू होती।
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रस्ताव को सार्वजनिक तौर पर ठुकराते हुए कहा कि यह स्वीकार्य नहीं है, लेकिन उन्होंने यह नहीं बताया कि उन्हें इसकी कौन-सी शर्त मंज़ूर नहीं थी। बाद में उन्होंने कहा कि अगले सप्ताह ईरान के साथ बातचीत फिर शुरू होने की उम्मीद है।
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प्रस्ताव में क्या था—और क्या नहीं
ईरान की योजना में जलडमरूमध्य खोलने के साथ क्षेत्र में लड़ाई रोकने और परमाणु वार्ता फिर शुरू करने की बात थी। बदले में वॉशिंगटन से बंदरगाहों की नाकेबंदी हटाने और ईरानी तेल की बिक्री पर लगे प्रतिबंधों में छूट देने की मांग थी। यह पूरा प्रस्ताव अमेरिकी स्वीकृति पर निर्भर था; इसे जहाज़रानी बहाल होने की पक्की घोषणा नहीं समझना चाहिए।
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परमाणु मुद्दे पर बातचीत फिर शुरू होना और उस विवाद का हल निकलना अलग बातें हैं। एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने कहा कि अमेरिका प्रस्ताव मान भी ले, तब भी तेहरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर रियायत नहीं देगा। यानी प्रस्ताव जलडमरूमध्य खोलने की राह तो सुझाता था, लेकिन परमाणु विवाद का समाधान नहीं करता था।
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ट्रंप ने क्यों ठुकराया, फिर भी बातचीत की गुंजाइश क्यों है?
ट्रंप ने कहा कि ईरान जलडमरूमध्य इसलिए जल्द खुलवाना चाहता है क्योंकि उसे राजस्व का नुकसान हो रहा है।
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14 प्रस्ताव में, इसके उलट, अमेरिका से नाकेबंदी और तेल प्रतिबंधों में राहत पहले देने की मांग थी। दोनों पक्षों की शर्तों के बीच यही बड़ा अंतर है; और परमाणु कार्यक्रम पर असहमति भी बाकी है।
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फिर भी प्रस्ताव ठुकराने का मतलब यह नहीं कि कूटनीतिक संपर्क खत्म हो गए हैं। ट्रंप ने बातचीत फिर शुरू होने की उम्मीद जताई, और रिपोर्टों में क़तर की मध्यस्थता के जरिए अप्रत्यक्ष चर्चा दोबारा होने की संभावना बताई गई।
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37 इस प्रस्ताव के लिए क़तर को संपर्क-माध्यम बताया गया है; उपलब्ध रिपोर्टें इस खास पहल में पाकिस्तान की मध्यस्थता स्थापित नहीं करतीं।
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ईरान का जवाब और समझौते की अड़चनें
ईरान ने कहा कि उसे अमेरिका की ओर से प्रस्ताव ठुकराने का औपचारिक संदेश नहीं मिला है और जलडमरूमध्य खोलने की उसकी शर्तें कायम हैं।
7 यह गतिरोध करीब सात महीने से चल रहे संघर्ष के बीच है। होर्मुज़ से ऊर्जा प्रवाह में रुकावट की खबरें भी आई हैं—जिससे देरी की कीमत बढ़ सकती है, लेकिन इससे नाकेबंदी, प्रतिबंध, युद्धविराम या परमाणु कार्यक्रम पर दोनों पक्षों के मतभेद अपने-आप दूर नहीं होते।
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नवंबर के मध्यावधि चुनावों के बाद अमेरिका के फिर हमले करने की संभावना की खबर भी आई है। यह बात अज्ञात अधिकारियों के हवाले से रिपोर्ट की गई थी, न कि किसी पक्के फैसले के तौर पर घोषित हुई थी।
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15 इसलिए फिलहाल नतीजा साफ है: बातचीत फिर शुरू हो सकती है, लेकिन ट्रंप की सार्वजनिक अस्वीकृति के बाद भी होर्मुज़ खोलने या संघर्ष समाप्त करने पर कोई समझौता नहीं हुआ है।
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