14 अक्टूबर 2026 को बैंकॉक में IMF और विश्व बैंक की सालाना बैठकों के दौरान अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था अब भी झटकों के बीच टिक रही है, लेकिन उसकी सहनशक्ति की सीमा करीब आ रही है। उनके मुताबिक, केवल हर नई मुश्किल से जूझते रहने के बजाय सरकारों को अगली चुनौती के लिए बजट में गुंजाइश और अर्थव्यवस्था की क्षमता फिर से मजबूत करनी होगी।
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अर्थव्यवस्था पर दबाव क्यों बढ़ रहा है?
जॉर्जीवा ने परिदृश्य को प्रभावित करने वाले दो विपरीत रुझानों की ओर इशारा किया: मध्य पूर्व के युद्ध से जुड़ा ऊर्जा आपूर्ति का नकारात्मक झटका और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से पैदा हो रही मांग का सकारात्मक झटका। दोनों के असर अलग-अलग जगहों पर अलग हो सकते हैं। लगातार बनी महंगाई, अनिश्चितता और एक के बाद एक आने वाले झटकों के बीच सरकारों के लिए प्रतिक्रिया देना भी कठिन होता जा रहा है।
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यही वजह है कि एक ही वैश्विक घटनाक्रम का असर हर अर्थव्यवस्था पर समान नहीं होता। AI में निवेश से जुड़ी मांग कुछ अर्थव्यवस्थाओं को सहारा दे सकती है, जबकि ऊर्जा आयात पर निर्भर देशों को आपूर्ति बाधित होने पर ज्यादा लागत का सामना करना पड़ सकता है। जॉर्जीवा ने यह भी चेताया कि सऊदी अरब में घटनाक्रम का असर देश की सीमाओं से बाहर तक जा सकता है। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टिंग यह नहीं बताती कि एशिया की सभी अर्थव्यवस्थाओं या ऊर्जा निर्यातकों पर इसका एक जैसा असर होगा—नतीजा हर देश की अपनी निर्भरता और परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
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चिंता सिर्फ ऊर्जा की तत्काल कीमत तक सीमित नहीं है। IMF के मुताबिक, कई सरकारें पहले ही झटकों का असर कम करने के लिए अपने राजकोषीय बफर—यानी जरूरत पड़ने पर खर्च करने की बजटीय गुंजाइश—का इस्तेमाल कर चुकी हैं। बड़ी विकसित अर्थव्यवस्थाओं में उधार लेने की लागत भी तेजी से बढ़ी है। ऐसे में सरकारी बजट में कम जगह बचने का मतलब है कि अगली मंदी या आपूर्ति बाधा को संभालना और मुश्किल हो सकता है।
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कर्ज चुकाने की बढ़ती लागत से घटती सरकारी गुंजाइश
ऊंची ब्याज दरें सरकारों के लिए कर्ज लेना महंगा कर सकती हैं। ऐसे समय में परिवारों को राहत देने और अर्थव्यवस्था को सहारा देने की मांग भी बढ़ती है। जॉर्जीवा की चेतावनी पर आई रिपोर्टिंग के मुताबिक, विकासशील देशों में कर्ज चुकाने की औसत लागत एक दशक में सरकारी राजस्व के 6% से बढ़कर 14% हो गई। इसका अर्थ है कि सरकारी आमदनी का बड़ा हिस्सा कर्ज चुकाने में जा रहा है और दूसरी जरूरतों के लिए कम बचता है।
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यह दबाव केवल कम आय वाले देशों तक सीमित नहीं है। जॉर्जीवा ने अमेरिका समेत अमीर देशों से भी बढ़ते कर्ज पर ध्यान देने को कहा। अमेरिका का राष्ट्रीय कर्ज 40 ट्रिलियन डॉलर से अधिक है। उन्होंने कहा कि आर्थिक विकास मददगार है, लेकिन जरूरी वित्तीय बदलाव इतनी जल्दी अकेले नहीं कर सकता।
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बढ़ती उधारी लागत और पहले से ऊंचा कर्ज एक-दूसरे का बोझ बढ़ा सकते हैं: कर्ज संभालना कठिन होता जाता है और नए झटकों से निपटने के लिए बजट में कम गुंजाइश बचती है। IMF के राजकोषीय मामलों के निदेशक रोड्रिगो वाल्देस ने भी खर्च, घाटे और कर्ज घटाने के लिए कदम उठाने की अपील की और चेताया कि देर करने से सुधार और कठिन होगा।
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IMF की सलाह: सरकारी वित्त सुधारें, लेकिन हर देश के लिए अलग रास्ता
जॉर्जीवा ने सरकारी वित्त में “तत्काल सुधार” की अपील की। इसमें राजस्व बढ़ाना, खर्च को तर्कसंगत बनाना और सार्वजनिक वित्त प्रबंधन को बेहतर करना शामिल है।
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उन्होंने बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के लिए अलग-अलग प्राथमिकताएं भी बताईं: चीन अधिक खर्च करे, अमेरिका अधिक बचत करे और यूरोप अधिक निवेश करे। मकसद यह है कि हर जगह एक जैसा उपाय लागू करने के बजाय देशों के अलग-अलग वित्तीय और आर्थिक असंतुलनों को संबोधित किया जाए।
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अमेरिका के लिए इसका अर्थ है कि आर्थिक विकास के साथ-साथ बजट संबंधी कदम भी जरूरी हैं—सिर्फ तेज विकास पर भरोसा काफी नहीं होगा। चीन के मामले में जॉर्जीवा की टिप्पणियों पर आई रिपोर्टिंग निर्यात पर निर्भरता घटाकर घरेलू खपत को मजबूत करने की दिशा की ओर इशारा करती है।
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विकास का अनुमान बेहतर, जोखिम फिर भी बरकरार
IMF ने 2026 के वैश्विक विकास का अनुमान बढ़ाकर 3.1% किया और 2027 में 3.4% वृद्धि का अनुमान दिया। ये आंकड़े बताते हैं कि अर्थव्यवस्था के बढ़ने की उम्मीद है, यह नहीं कि जोखिम खत्म हो गए हैं। IMF ने बढ़ते कर्ज और AI उछाल से जुड़े वित्तीय जोखिमों को लेकर भी आगाह किया है।
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जॉर्जीवा की चेतावनी का सार यही है: अर्थव्यवस्था का टिके रहना उसकी कमजोरियों को छिपा सकता है—खासकर जब वित्तीय बफर घट चुके हों और कर्ज चुकाना महंगा हो। अगली चुनौती का सामना करने के लिए सरकारों को फिर से कदम उठाने की गुंजाइश बनानी होगी और अपने देश की परिस्थितियों के मुताबिक राजकोषीय फैसले लेने होंगे।
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