12 अक्टूबर 2026 को बैंकॉक में IMF और विश्व बैंक की वार्षिक बैठकों में IMF की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने AI को नौकरियों, शिक्षा और सरकारी वित्त के लिए “धीरे-धीरे बढ़ने वाली सुनामी” बताया। साथ ही, उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि AI में हो रहा निवेश आर्थिक विकास को सहारा दे रहा है। सिंगापुर के राष्ट्रपति थरमन शनमुगरत्नम ने नए ग्रेजुएट्स की पहली नौकरी पर बढ़ते दबाव की बात कही, जबकि विश्व बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा ने उत्पादकता बढ़ाने वाले व्यावहारिक AI इस्तेमाल पर जोर दिया।
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IMF के रोजगार अनुमान का मतलब क्या है?
IMF का अनुमान है कि AI समय के साथ दुनिया की करीब 40% नौकरियों को प्रभावित कर सकता है। इसमें ऐसी नौकरियां शामिल हैं जिनके काम AI से बढ़ सकते हैं, जिनका स्तर घट सकता है या जो खत्म हो सकती हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि 40% नौकरियां निश्चित रूप से चली जाएंगी। जॉर्जीवा के मुताबिक, उन्नत अर्थव्यवस्थाओं में करीब 60% और कम आय वाले देशों में 23% नौकरियां प्रभावित हो सकती हैं।
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कम आय वाले देशों का आंकड़ा कम होना सुरक्षा की गारंटी नहीं है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, वहां AI का असर कम दिखने की वजह तकनीक को अपनाने की धीमी रफ्तार है—AI के प्रभाव से पूरी तरह अछूता होना नहीं। ये आंकड़े बताते हैं कि कितनी नौकरियां प्रभावित हो सकती हैं, यह नहीं कि कोई देश बदलाव से निपटने के लिए कितना तैयार है।
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ग्रेजुएट्स की पहली नौकरी चिंता का विषय क्यों?
थरमन ने कहा कि रोजगार की सीढ़ी का पहला पायदान—पढ़ाई पूरी करने के बाद मिलने वाली पहली नौकरी—दबाव में है, क्योंकि नए ग्रेजुएट्स को काम पर रखने की मांग घट रही है।
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28 नियमित और दोहराए जाने वाले काम, जो अक्सर शुरुआती स्तर की नौकरियों का हिस्सा होते हैं, AI के हवाले हो रहे हैं। वहीं, कुछ नई नौकरियां कम वेतन वाली हैं, जैसे निर्माण क्षेत्र के कुछ काम। जॉर्जीवा ने आगाह किया कि ऐसी नौकरियों को खोए अवसरों का संतोषजनक विकल्प नहीं माना जा सकता।
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थरमन की टिप्पणियों पर आई एक रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने अमेरिका में ग्रेजुएट्स की कमजोर होती मांग और गैर-ग्रेजुएट्स के मुकाबले कॉलेज डिग्रीधारकों को मिलने वाले वेतन लाभ में गिरावट का भी जिक्र किया।
26 सवाल सिर्फ यह नहीं है कि नई नौकरियां बनेंगी या नहीं। यह भी अहम है कि युवा अपने कौशल और करियर की नींव रखने वाला शुरुआती काम हासिल कर पाएंगे या नहीं। थरमन ने कहा कि नौकरी में देरी से ग्रेजुएट्स को कौशल विकसित करने का समय गंवाना पड़ सकता है। एक अन्य रिपोर्ट में उनके हवाले से कहा गया कि लंबे समय तक बनी अनिश्चितता भविष्य पर भरोसा कमजोर कर सकती है।
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नौकरी और पढ़ाई के बीच मजबूत कड़ी बनाने की बात
थरमन ने सरकारों से निजी कंपनियों के साथ मिलकर ग्रेजुएट्स की भर्ती को बढ़ावा देने की अपील की। इसके लिए उन्होंने बीते संकटों के दौरान इस्तेमाल किए गए रोजगार-सहायता उपायों जैसे कदमों का सुझाव दिया।
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13 उन्होंने विश्वविद्यालय की पढ़ाई को कामकाजी अनुभव से बेहतर ढंग से जोड़ने की भी बात कही—मसलन, इंटर्नशिप, पढ़ाई के साथ काम करने के कार्यक्रम और अन्य व्यावहारिक प्रशिक्षण।
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बंगा ने युवाओं को रोजगार देने की चुनौती का पैमाना बताया। CNBC की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने कहा कि अगले 15 वर्षों में 1.2 अरब युवा वयस्कता की उम्र तक पहुंचेंगे और उनके लिए नौकरियां बनाने में निजी पूंजी की भूमिका जरूरी होगी।
10 यानी रोजगार पैदा करना सरकार और कारोबार—दोनों की साझा चुनौती है; इसका हल केवल कर्मचारियों को नए AI औजार इस्तेमाल करना सिखाने से नहीं निकलेगा।
AI से विकास की उम्मीद, लेकिन टैक्स का सवाल भी
जॉर्जीवा ने चेताया कि अगर आय श्रम से हटकर पूंजी की ओर जाने लगे, तो सरकारी कर-राजस्व पर दबाव पड़ सकता है।
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15 दूसरी ओर, उनकी टिप्पणियों पर आई रिपोर्टिंग के मुताबिक, AI बुनियादी ढांचे में निवेश वैश्विक विकास दर को करीब 3% बनाए रखने में मदद कर रहा था।
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उन्होंने एशिया में विकास की संभावनाओं का भी जिक्र किया। AI अपनाने से उन्नत एशियाई अर्थव्यवस्थाओं की वृद्धि में 0.5 से 1 प्रतिशत अंक और उभरती एशियाई अर्थव्यवस्थाओं में 0.2 से 0.8 प्रतिशत अंक तक की बढ़ोतरी हो सकती है। ये संभावित लाभ हैं, तय नतीजे नहीं।
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22 बैठक पर आई रिपोर्टों के मुताबिक, AI एशिया की उम्रदराज होती आबादी से पैदा होने वाली आर्थिक सुस्ती के कुछ असर को भी कम कर सकता है।
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विकासशील देशों के लिए बंगा ने “स्मॉल AI” पर ध्यान देने की बात कही—यानी कृषि, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में काम आने वाले व्यावहारिक AI समाधान। उनका सुझाव था कि सबसे बड़े AI मॉडल बनाने की होड़ में सीधे उतरने के बजाय स्थानीय जरूरतों के मुताबिक उपयोगी तकनीक अपनाई जाए।
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उत्पादकता बढ़े, तो रोजगार की रणनीति भी जरूरी
नेताओं की बातों से नीति-निर्माताओं के सामने एक अहम चुनौती उभरती है: AI उत्पादकता और आर्थिक विकास बढ़ा सकता है, लेकिन इससे अपने-आप युवाओं के लिए पहली नौकरी नहीं बनती और न ही सरकारी राजस्व सुरक्षित रहता है। उनके सुझाए रास्ते में दोनों पहलुओं की तैयारी शामिल थी—कंपनियों को युवा कर्मचारियों की भर्ती के लिए प्रोत्साहित करना, पढ़ाई को काम से जोड़ना और आय के बदलते बंटवारे के अनुरूप कर-नीति पर विचार करना।
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