IDC का मई का पूर्वानुमान, उसके अपने फरवरी 2026 के अनुमान से बड़ा संशोधन है, जब 12.9% की गिरावट के साथ शिपमेंट 1.1 बिलियन यूनिट रहने का अनुमान लगाया गया था । इस गहराते संकट ने बाजार को विश्लेषकों की अपेक्षा से भी तेजी से गिराया है। 2026 की पहली तिमाही में, वैश्विक शिपमेंट पहले ही सालाना 2.9% गिर चुका था, जिसे IDC ने आने वाली आफत का "हल्का-फुल्का अग्रदूत" बताया था । अब 13.9% की पूरे साल की गिरावट, स्मार्टफोन बाजार के इतिहास की सबसे बड़ी वार्षिक गिरावट साबित होगी ।
IDC इस ऐतिहासिक गिरावट के लिए दो मुख्य कारण गिनाता है, जो साल की शुरुआत से और भी गंभीर हो गए हैं ।
पहला और सबसे बड़ा कारण मेमोरी चिप्स की वैश्विक कमी है। इस संकट ने 2025 में ही बाजार को बदलना शुरू कर दिया था, क्योंकि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) डेटा सेंटर्स से DRAM और NAND फ्लैश की भारी मांग ने उस सप्लाई को सोख लिया, जो आमतौर पर उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में जाती थी , । इसका नतीजा हुआ कंपोनेंट की कीमतों में नाटकीय बढ़ोतरी। IDC विश्लेषक नबीला पोपल ने इस स्थिति को "अस्थायी निचोड़ नहीं, बल्कि मेमोरी बाजार से उठने वाला एक सुनामी जैसा झटका" करार दिया है । इसका सबसे गहरा असर लो-एंड और मिड-रेंज फोन बनाने वाली कंपनियों पर पड़ रहा है, जो पहले से ही कम मुनाफे पर काम करती हैं और यह बढ़ी हुई लागत वहन नहीं कर पातीं ।
जहां मेमोरी संकट पहले से ही बाजार को गिरा रहा था, वहीं एक नए भू-राजनीतिक झटके ने बुरी स्थिति को और खराब कर दिया। IDC की मई की रिपोर्ट साफ तौर पर अमेरिका-ईरान युद्ध को ग्रोथ को सीमित करने वाला दूसरा बड़ा कारण बताती है, जिसने आपूर्ति श्रृंखला में नई रुकावटें और बड़े आर्थिक विपरीत हालात पैदा किए हैं। इससे उपभोक्ताओं की मांग और निर्माताओं का उत्पादन, दोनों कमजोर हुए हैं ।
गिरते उत्पादन के बीच, स्मार्टफोन की औसत बिक्री मूल्य (ASP) में 14% की बढ़ोतरी होकर 2026 में रिकॉर्ड $523 (लगभग 43,000 रुपये) तक पहुंचने का अनुमान है , । कुछ रिपोर्ट्स IDC के ताजा आंकड़ों का हवाला देते हुए यह आंकड़ा $550 तक बता रही हैं । यह बढ़ोतरी मेमोरी की बढ़ी हुई लागत को सीधे उपभोक्ताओं पर डालने का नतीजा है। इसका सीधा असर यह हो रहा है कि 100 डॉलर (8,000 रुपये से कम) से कम कीमत वाले बेहद सस्ते स्मार्टफोन का बाजार तेजी से सिकुड़ रहा है। IDC विश्लेषकों का कहना है कि अगर मेमोरी की कीमतें 2027 के मध्य तक स्थिर भी हो जाती हैं, तो भी इनके पिछले स्तरों पर लौटने की संभावना नहीं है, जिससे सबसे सस्ते डिवाइसों का कारोबारी मॉडल हमेशा के लिए खत्म हो सकता है ।
इस गिरावट का असर सब पर बराबर नहीं पड़ेगा। जिन बाजारों में कीमत के प्रति संवेदनशील उपभोक्ता ज्यादा हैं और लो-एंड डिवाइसों का बोलबाला है, वहां सबसे ज्यादा गिरावट आने का अनुमान है। फरवरी और मार्च के शुरुआती पूर्वानुमानों में, जो पहले से ही डरावने थे, क्षेत्रीय प्रभाव को बहुत स्पष्ट रूप से बताया गया था , :
IDC ने साफ कहा, "लो-एंड वेंडर्स को सप्लाई की कमी और ऊंचे दाम पर कम डिमांड के कारण शिपमेंट में भारी गिरावट का सामना करना पड़ेगा।" । किफायती डिवाइसों का दौर अब बड़ी कंपनियों के दबदबे वाले बाजार को जन्म दे सकता है, जिसमें Apple, सैमसंग और Huawei जैसी बड़ी किफायत वाली दिग्गज कंपनियां ही इस तूफान का सामना कर पाएंगी ।