IBM ने दो क्रायोजेनिक मॉड्यूल को एक साझा वातावरण में जोड़कर ठंडा किया; सिस्टम 4 केल्विन तक पांच दिनों से कम समय में पहुंचा और 15 मिलीकेल्विन से नीचे तापमान हासिल किया। मॉड्यूलर आर्किटेक्चर का उद्देश्य सैकड़ों क्वांटम चिप्स को जोड़ने के लिए जरूरी वायरिंग और इंटरकनेक्ट उपलब्ध कराना है। इसके लिए L couplers चिप्स, मॉड्य...
शोध उत्तर

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IBM ने दो मॉड्यूलर क्रायोजेनिक सिस्टम को सफलतापूर्वक जोड़कर एक साझा, बेहद ठंडा वातावरण बनाया है। कंपनी इसे ऐसे क्वांटम कंप्यूटर तैयार करने की दिशा में अहम इंजीनियरिंग कदम बता रही है, जिनमें एक ही बहुत बड़े रेफ्रिजरेटर पर निर्भर रहने के बजाय कई मॉड्यूल जोड़कर सैकड़ों क्वांटम चिप्स को साथ काम कराया जा सके।
क्वांटम कंप्यूटिंग को बड़े पैमाने पर ले जाना केवल क्यूबिट की संख्या बढ़ाने का सवाल नहीं है। प्रोसेसरों को समान क्रायोजेनिक वातावरण में काम करना होता है, नियंत्रण और रीडआउट के लिए कहीं अधिक वायरिंग चाहिए होती है और अलग-अलग मॉ्यूल के बीच कनेक्शन भी पर्याप्त रूप से भरोसेमंद होना चाहिए।
दोनों मॉड्यूल कथित तौर पर 4 केल्विन तक पांच दिनों से कम समय में ठंडे हुए और इसके बाद 15 मिलीकेल्विन से नीचे का तापमान हासिल किया। सुपरकंडक्टिंग क्वांटम प्रोसेसरों के लिए जरूरी संचालन स्थितियां इस तरह के अत्यंत कम तापमान पर ही हासिल की जाती हैं।
IBM के अनुसार, संयुक्त सिस्टम एक मॉड्यूलर आर्किटेक्चर का शुरुआती प्रदर्शन है। इसका लक्ष्य ऐसा साझा अल्ट्रा-कोल्ड वातावरण बनाना है, जिसमें भविष्य में सैकड़ों क्वांटम चिप्स को एक बड़े क्वांटम कंप्यूटर के रूप में जोड़ा जा सके।
हालांकि, उपलब्ध स्रोत सिस्टम के संयुक्त सटीक आकार या किसी खास बॉक्स-आकार के डिजाइन की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करते। इसलिए इन विशिष्टताओं को प्रदर्शित परिणाम का प्रमाणित हिस्सा नहीं माना जा सकता।
क्वांटम सिस्टम को बढ़ाने का पारंपरिक तरीका एक ही सिस्टम के चारों ओर लगातार बड़ा क्रायोस्टैट—यानी अत्यंत कम तापमान बनाए रखने वाला उपकरण—बनाना हो सकता है। IBM का मॉड्यूलर तरीका इसके बजाय क्रायोजेनिक सिस्टम और उससे जुड़े हार्डवेयर को दोहराए जा सकने वाले यूनिट के रूप में देखता है, जिन्हें जरूरत के अनुसार जोड़ा जा सके।
बड़े क्वांटम सिस्टम में नियंत्रण और मापन के लिए अधिक वायरिंग, साथ ही प्रोसेसरों को जोड़ने वाले घटकों के लिए अधिक भौतिक जगह चाहिए। IBM और इस घोषणा की कवरेज के अनुसार, नया आर्किटेक्चर वायरिंग क्षमता बढ़ाने और अधिक प्रोसेसर जोड़ने का रास्ता तैयार करता है।
फिर भी, इसे पूर्ण बड़े पैमाने के क्वांटम कंप्यूटर के रूप में नहीं समझना चाहिए। यह उस बुनियादी ढांचे के एक महत्वपूर्ण हिस्से को प्रदर्शित करता है जिसकी जरूरत ऐसे कंप्यूटर के लिए होगी। प्रोसेसर का प्रदर्शन, एरर करेक्शन, सॉफ्टवेयर और पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता—इन सभी को अभी साथ-साथ विकसित होना है।
IBM के L-couplers माइक्रोवेव-आधारित इंटर-मॉड्यूल कनेक्शन हैं। कंपनी के अनुसार, ये चिप्स, मॉड्यूल और पूरे सिस्टम के बीच गणना को संभव बनाने के लिए डिजाइन किए गए हैं और मल्टी-QPU सिस्टमों में प्रोसेसिंग क्षमता बढ़ा सकते हैं। भविष्य में इनका इस्तेमाल फॉल्ट-टॉलरेंट आर्किटेक्चर में भी किया जा सकता है।
सरल शब्दों में, इन कनेक्शनों का उद्देश्य अलग-अलग क्वांटम प्रोसेसिंग यूनिट्स को एक बड़े सिस्टम के हिस्से के रूप में काम कराना है, न कि उन्हें अलग-अलग उपकरणों तक सीमित रखना। यदि मॉड्यूलर क्रायोजेनिक हार्डवेयर को उपयोगी वितरित क्वांटम कंप्यूटिंग में बदलना है, तो यही इंटरकनेक्ट परत निर्णायक होगी।
IBM ने इस क्रायोजेनिक प्रदर्शन को अपने 2029 के Quantum Starling लक्ष्य की दिशा में एक कदम के रूप में रखा है। कंपनी के प्रकाशित रोडमैप के अनुसार, Starling एक बड़े पैमाने का फॉल्ट-टॉलरेंट क्वांटम कंप्यूटर होगा, जो 200 लॉजिकल क्यूबिट पर 10 करोड़ क्वांटम गेट वाले सर्किट चला सकेगा।
इस लक्ष्य के लिए केवल अत्यधिक ठंडा वातावरण पर्याप्त नहीं होगा। IBM की योजना में मॉड्यूलर प्रोसेसर, उच्च क्षमता वाली वायरिंग, मॉड्यूलों के बीच संचार और एरर-करेक्शन तकनीकों को एक ही सिस्टम में काम करना शामिल है। जुड़े हुए क्रायोजेनिक मॉड्यूल अधिक प्रोसेसरों को साझा वातावरण में रखने की भौतिक समस्या को संबोधित करते हैं, जबकि L-couplers मॉड्यूलों के बीच संचार की भूमिका निभाते हैं।
एक रिपोर्ट में IBM का 2027 तक कम से कम 1,000 प्रोग्रामेबल क्यूबिट हासिल करने का लक्ष्य भी बताया गया है। यह भविष्य का लक्ष्य है, दो मॉड्यूलों को ठंडा करने के इस प्रदर्शन से हासिल परिणाम नहीं। उपलब्ध प्रमाण Quantum Nighthawk प्रोसेसरों की इस साल बाद में स्थापना के दावे की स्वतंत्र पुष्टि भी नहीं करते।
इस उपलब्धि का सबसे बड़ा महत्व आर्किटेक्चर में है। IBM बड़े क्वांटम हार्डवेयर को एकमात्र विशाल रेफ्रिजरेटर के रूप में बनाने के बजाय मॉड्यूलर क्रायोजेनिक सिस्टमों को जोड़कर स्केल करने की कोशिश कर रहा है। यदि कंपनी इस बुनियादी ढांचे को भरोसेमंद एरर करेक्शन और बेहतर प्रदर्शन वाले प्रोसेसरों के साथ सफलतापूर्वक जोड़ पाती है, तो यह प्रदर्शन Quantum Starling की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। फिलहाल इसे उस लक्ष्य की ओर जरूरी इंजीनियरिंग मील का पत्थर समझना अधिक सही है—मंजिल नहीं।
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IBM ने दो क्रायोजेनिक मॉड्यूल को एक साझा वातावरण में जोड़कर ठंडा किया; सिस्टम 4 केल्विन तक पांच दिनों से कम समय में पहुंचा और 15 मिलीकेल्विन से नीचे तापमान हासिल किया।
IBM ने दो क्रायोजेनिक मॉड्यूल को एक साझा वातावरण में जोड़कर ठंडा किया; सिस्टम 4 केल्विन तक पांच दिनों से कम समय में पहुंचा और 15 मिलीकेल्विन से नीचे तापमान हासिल किया। मॉड्यूलर आर्किटेक्चर का उद्देश्य सैकड़ों क्वांटम चिप्स को जोड़ने के लिए जरूरी वायरिंग और इंटरकनेक्ट उपलब्ध कराना है। इसके लिए L couplers चिप्स, मॉड्यूल और बड़े सिस्टमों के बीच संचार में मदद करेंगे।
IBM का कहना है कि यह काम 2029 के Quantum Starling रोडमैप को सहारा देता है, जिसे 200 लॉजिकल क्यूबिट पर 10 करोड़ क्वांटम गेट वाले सर्किट चलाने के लिए डिजाइन किया जा रहा है।