हंगरी ने 4 नवंबर 2026 को कम्युनिस्ट दौर की राज्य-सुरक्षा फाइलों का एक हिस्सा nyitottaktak.hu पर सार्वजनिक और खोजने योग्य बनाया। इसमें करीब 50,000–60,000 लोगों के नाम होने का अनुमान है। लेकिन इसे पक्के तौर पर पहचाने गए मुखबिरों की सूची समझना गलत होगा: रिकॉर्ड में वे लोग भी हैं जिन्हें भर्ती करने की कोशिश हुई थी, और किसी दस्तावेज़ में नाम दिखना अपने-आप में सहयोग का सबूत नहीं है।
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शुरुआती रिकॉर्ड में क्या है?
पहले चरण में भर्ती दर्ज करने वाले “6-os kartonok” यानी क्रमांक 6 के कार्ड, बी-रजिस्टर और चुंबकीय टेप से वापस हासिल किया गया डेटा शामिल है। ये हर व्यक्ति की पूरी कहानी बताने वाली विस्तृत फाइलें नहीं हैं।
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प्रविष्टियों में नाम, कूटनाम, जन्मतिथि, पता और मां का नाम जैसी पहचान संबंधी जानकारी हो सकती है। भर्ती से जुड़े रिकॉर्ड में यह भी दर्ज हो सकता है कि किसी व्यक्ति को किस वजह से चुना गया और भर्ती स्वेच्छा से हुई या दबाव अथवा ब्लैकमेल के तहत। खोज के लिए नाम, जन्मतिथि और जन्मस्थान या कूटनाम का इस्तेमाल किया जा सकता है।
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यहां सबसे अहम सावधानी यही है: राज्य-सुरक्षा सेवाओं ने किसी को भर्ती के लिए संपर्क किया हो या उस पर विचार किया हो, तो इससे यह साबित नहीं होता कि उसने हामी भरी या सक्रिय रूप से सूचना दी।
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पहले से क्या अलग है?
इससे पहले भी हंगरी के नागरिक अपनी फाइल देखने के लिए आवेदन कर सकते थे और 2003 में पहुंच के नियम कुछ विस्तृत किए गए थे। लेकिन मुखबिरों के नाम आम लोगों के लिए ऑनलाइन खोजने योग्य नहीं थे; कई नाम ढके हुए थे और कुछ फाइलें उपलब्ध नहीं थीं।
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नया डेटाबेस इस लिहाज से बड़ा बदलाव है कि अब आम लोग केवल अपनी फाइल तक सीमित नहीं हैं—वे सार्वजनिक रिकॉर्ड में नाम खोज सकते हैं। प्रधानमंत्री पीटर माग्यार की सरकार ने इसे अपने चुनावी वादों में से एक और कम्युनिस्ट अतीत से निपटने की लंबे समय से टली पहल बताया।
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लॉन्च की तारीख का प्रतीकात्मक महत्व भी था। वेबसाइट 4 नवंबर को सुबह 9:30 बजे खुली—1956 की हंगरी क्रांति को सोवियत संघ द्वारा कुचले जाने की 70वीं बरसी पर। माग्यार ने सार्वजनिक घोषणा में इस तारीख को उस ऐतिहासिक घटना से जोड़ा।
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आगे क्या जारी होगा?
फाइलें चरणों में सार्वजनिक की जा रही हैं। भर्ती से जुड़ी करीब 9,000 विस्तृत डॉसियर 25 फरवरी 2027 तक जारी किए जाने की योजना है। उनसे अलग-अलग भर्ती मामलों की परिस्थितियों पर अधिक जानकारी मिल सकती है।
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स्वास्थ्य, नशे की लत और यौन रुझान जैसी संवेदनशील निजी जानकारियां हटाई जाएंगी। सरकार ने खुलासों से प्रभावित लोगों के लिए भावनात्मक सहयोग और परामर्श देने वाली हेल्पलाइन की व्यवस्था की बात भी कही है।
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नाम को फैसला न मानें
यह संग्रह अतीत का पूरा रिकॉर्ड नहीं है। उपलब्ध फाइलें अधूरी हैं और हर मामले में उनकी जानकारी को पूरी तरह भरोसेमंद या निर्णायक नहीं माना जा सकता। इसलिए खोज में किसी का नाम मिलना यह दिखा सकता है कि राज्य-सुरक्षा तंत्र ने उसे दर्ज किया या उस पर विचार किया—लेकिन इससे अपने-आप यह साबित नहीं होता कि उसने मुखबिरी की थी।
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यही वजह है कि इस खुलासे में दो बातें साथ-साथ चलती हैं: लंबे समय से सीमित रहे रिकॉर्ड तक जनता की पहुंच और अधूरे सबूतों के आधार पर किसी व्यक्ति या उसके परिवार के बारे में जल्दबाजी में निष्कर्ष निकालने का जोखिम। माग्यार ने लोगों से फाइलों को “गरिमा और इंसानियत” के साथ देखने की अपील की।
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