चान के अनुसार, यूरोप में कई सरकारें और कंपनियां अब "स्ट्रैटेजिक ऑटोनॉमी" (रणनीतिक स्वायत्तता) की दिशा में काम कर रही हैं—जिसका मतलब है अपनी अर्थव्यवस्था को अधिक लचीला बनाना और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों को विविध बनाना।
यह रुझान बढ़ते भू‑राजनीतिक तनाव और एक ही बाजार या सप्लाई चेन पर अत्यधिक निर्भरता से जुड़े जोखिमों की चिंता से जुड़ा है। इसलिए यूरोपीय नीति‑निर्माता और व्यवसाय अब वैश्विक स्तर पर नई साझेदारियां और बहुपक्षीय सहयोग तलाश रहे हैं।
चान का मानना है कि यही बदलाव हांगकांग और यूरोप के बीच संबंध मजबूत करने के नए अवसर पैदा कर रहा है।
चान ने कुछ प्रमुख क्षेत्रों का उल्लेख किया जहां दोनों पक्ष सहयोग बढ़ा सकते हैं:
उनका कहना है कि इन क्षेत्रों में व्यावहारिक और पारस्परिक लाभ पर आधारित सहयोग से दोनों पक्ष तेजी से बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था के अनुरूप खुद को बेहतर ढंग से ढाल सकते हैं।
चान ने स्वीकार किया कि कुछ नीतिगत मुद्दों पर हांगकांग और यूरोप के बीच मतभेद हो सकते हैं। फिर भी उनका मानना है कि संवाद और व्यावहारिक सहयोग को प्राथमिकता देना चाहिए।
यूरोप यात्रा के बाद उनका मुख्य संदेश यही रहा कि अगर दोनों पक्ष खुले संवाद को जारी रखते हुए व्यापार, निवेश और तकनीकी नवाचार में सहयोग बढ़ाएं, तो वे मौजूदा भू‑राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच भी पारस्परिक लाभ और दीर्घकालिक अवसर पैदा कर सकते हैं।
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