Google ने अपने तर्क के समर्थन में उपयोग के आंकड़े भी साझा किए। कंपनी के मुताबिक उसके प्लेटफॉर्म पर प्रोसेस होने वाले AI टोकन की मात्रा बेहद तेजी से बढ़ी है।
यह वृद्धि कई जगहों से आ रही है:
पिचाई का तर्क है कि जब उपयोग इतनी तेजी से बढ़ रहा है, तो इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च भी उसी गति से बढ़ना स्वाभाविक है।
I/O 2026 में Google ने Gemini 3.5 Flash नाम का एक नया AI मॉडल भी पेश किया, जिसे तेज़ और अपेक्षाकृत सस्ता बताया गया।
इस तरह के मॉडल दिखाते हैं कि AI सिस्टम समय के साथ अधिक कुशल होते जाते हैं। जब इन्फरेंस लागत कम होती है और गति बढ़ती है, तो वही इंफ्रास्ट्रक्चर ज्यादा ऐप्लिकेशन और उपयोगकर्ताओं को संभाल सकता है।
हालाँकि पिचाई ने निवेश का बचाव किया, लेकिन उन्होंने कुछ गंभीर चुनौतियों को भी स्वीकार किया।
सबसे बड़ी समस्याएँ हैं:
AI उद्योग में इन मुद्दों पर अब काफी ध्यान दिया जा रहा है क्योंकि कंपनियाँ तेजी से नई कंप्यूटिंग क्षमता बनाने की कोशिश कर रही हैं।
पिचाई की 2026 की टिप्पणियाँ उनके 2025 के बयानों से कुछ अलग थीं। उस समय उन्होंने माना था कि AI निवेश उछाल में "कुछ हद तक अव्यावहारिकता" भी मौजूद है और अगर AI बबल फूटा तो कोई भी कंपनी पूरी तरह सुरक्षित नहीं रहेगी।
लेकिन I/O 2026 में उनका संदेश ज्यादा आशावादी था। उन्होंने तीन बातों पर जोर दिया:
उन्होंने जोखिम से इनकार नहीं किया, लेकिन कहा कि लंबी अवधि में AI का विकास इस निवेश को तार्किक बनाता है।
Google अकेली कंपनी नहीं है जो AI पर इतना खर्च कर रही है। Microsoft, Amazon और अन्य बड़ी टेक कंपनियाँ भी नए चिप्स, डेटा सेंटर और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर में अरबों डॉलर लगा रही हैं।
पिचाई के अनुसार यह दौर उसी तरह का है जैसा इंटरनेट या क्लाउड कंप्यूटिंग के शुरुआती वर्षों में देखा गया था—पहले भारी निवेश, फिर तेजी से बढ़ती दक्षता और अंततः तकनीक का व्यापक इस्तेमाल।
अगर उनका अनुमान सही साबित होता है, तो आज का यह महंगा AI इंफ्रास्ट्रक्चर आने वाले समय में तकनीक को कहीं ज्यादा सस्ता और सर्वव्यापी बना सकता है।
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