जर्मनी के Federal Cartel Office के अनुसार, Apple के App Tracking Transparency framework में थर्ड पार्टी ऐप्स को Apple की अपनी सेवाओं की तुलना में सहमति लेने के लिए ज्यादा कठिन प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था। बदलाव लगभग पूरे यूरोपीय संघ में लागू होंगे और सात वर्षों तक एक स्वतंत्र trustee इनकी निगरानी करेगा। यह समझौता य...
शोध उत्तर

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: What did Germany’s Federal Cartel Office find in its multi-year investigation into Apple’s App Tracking Transparency framework, why did it c. Article summary: Germany’s Federal Cartel Office concluded that Apple’s App Tracking Transparency (ATT) framework treated competing app developers less favorably than Apple’s own services, potentially distorting competition in mobile-app. Topic tags: general, general web, news. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, watermarks, charts with fake numbers
Apple का App Tracking Transparency (ATT) framework यूजर्स को ऐप्स की tracking पर नियंत्रण देने के लिए बनाया गया था। लेकिन जर्मनी के Federal Cartel Office यानी Bundeskartellamt ने निष्कर्ष निकाला कि इसके लागू होने का तरीका प्रतिस्पर्धी ऐप डेवलपर्स के लिए नुकसानदेह हो सकता है।
नियामक की मुख्य आपत्ति यह थी कि Apple ने अपनी सेवाओं और थर्ड-पार्टी ऐप्स के लिए consent यानी सहमति लेने की प्रक्रिया एक जैसी नहीं रखी। थर्ड-पार्टी ऐप्स के सामने एक अतिरिक्त बाधा थी और उनके prompts का wording व design यूजर्स को सहमति देने से हतोत्साहित कर सकता था।
Apple का कहना है कि उसके नियम competition law के अनुरूप हैं। इसके बावजूद कंपनी ने कुछ बदलावों की प्रतिबद्धता दी, जिन्हें Bundeskartellamt ने अब कानूनी रूप से बाध्यकारी बना दिया है। इसके साथ जर्मनी की वर्षों से चल रही जांच समाप्त हो गई।
Apple ने 2021 में ATT शुरू किया था। इसके तहत iOS App Store पर उपलब्ध थर्ड-पार्टी ऐप्स को कुछ तरह की cross-company tracking के लिए दो स्तरों पर सहमति लेनी पड़ सकती थी:
Apple की अपनी सेवाओं पर ये सख्त अतिरिक्त शर्तें उसी तरह लागू नहीं होती थीं।
इसलिए विवाद केवल इस बात पर नहीं था कि Apple यूजर्स से tracking की अनुमति क्यों मांगता है। असली सवाल consent journey की असमानता का था:
दूसरे शब्दों में, आपत्ति privacy consent के सिद्धांत पर नहीं, बल्कि उसके design और असमान इस्तेमाल पर थी।
Bundeskartellamt ने Apple की commitments को binding बना दिया है। इनमें prompts के design और डेवलपर्स द्वारा consent requests पेश करने के तरीके—दोनों में बदलाव शामिल हैं।
थर्ड-पार्टी ऐप्स में दिखने वाले ATT pop-up को इस तरह redesign किया जाएगा कि उसकी भाषा, layout और visual elements यूजर्स को consent देने से हतोत्साहित न करें। लक्ष्य यह है कि थर्ड-पार्टी ऐप्स और Apple की अपनी सेवाओं के consent requests एक-दूसरे के ज्यादा करीब हों।
डेवलपर्स को Apple के tracking request को अन्य data-protection consent requests के साथ तार्किक तरीके से जोड़ने की अधिक स्वतंत्रता मिलेगी। इससे अलग-अलग pop-ups वाली अनावश्यक “double hurdle” कम हो सकती है, जो थर्ड-पार्टी ऐप्स के लिए consent flow को Apple की अपनी प्रक्रिया से कठिन बनाती थी।
फैसला औपचारिक रूप से Apple को दिए जाने के बाद कंपनी के पास बदलाव लागू करने के लिए चार महीने होंगे। अनुपालन की निगरानी एक स्वतंत्र trustee सात वर्षों तक करेगा।
जांच जर्मनी के प्रतिस्पर्धा नियामक ने की, लेकिन Apple की बाध्यकारी commitments केवल जर्मन यूजर्स तक सीमित नहीं रहेंगी। ये बदलाव लगभग पूरे यूरोपीय संघ में लागू होंगे।
इसका असर यूरोप के ऐप डेवलपर्स और mobile advertising कारोबार पर पड़ सकता है। Consent flow में बदलाव यह तय कर सकता है कि डेवलपर्स को targeted advertising के लिए डेटा इस्तेमाल करने की अनुमति कितनी आसानी से मिलती है और वे privacy disclosures को Apple के system-level request के साथ किस तरह जोड़ पाते हैं।
इस समझौते से मूल privacy-consent requirement खत्म नहीं होगी। थर्ड-पार्टी डेवलपर्स को अब भी covered forms of cross-company tracking शुरू करने से पहले यूजर्स की अनुमति लेनी होगी।
बदलाव consent लेने की जरूरत हटाने के बजाय उसकी mechanics और presentation में होगा। Apple को अपनी सेवाओं और rival apps के लिए प्रक्रिया ज्यादा comparable बनानी होगी और ऐसे design विकल्पों से बचना होगा जो यूजर को किसी एक जवाब की ओर धकेलें।
जर्मनी का यह समझौता यूरोप में ATT को लेकर चल रहे व्यापक विवाद का हिस्सा है। सवाल यह है कि क्या कोई dominant platform अपने प्रतिस्पर्धियों पर data consent की ऐसी सख्त शर्तें लगा सकता है, जो वह अपनी सेवाओं पर उसी तरह लागू नहीं करता।
फ्रांस के competition authority ने मार्च 2025 में Apple पर €150 मिलियन का जुर्माना लगाया था। वहां नियामक ने कहा कि ATT का उद्देश्य—यूजर्स को tracking पर नियंत्रण देना—अपने आप में मुख्य समस्या नहीं था; चिंता इसके implementation के तरीके को लेकर थी।
इटली के competition regulator ने बाद में Apple पर €98.6 मिलियन का जुर्माना लगाया। उसके निष्कर्ष के अनुसार, ATT policy ने App Store में प्रतिस्पर्धा को बाधित किया और Apple ने अपनी dominant position का लाभ उठाया।
इन कार्रवाइयों से यूरोप में एक स्पष्ट नियामकीय रेखा उभर रही है: privacy safeguards वैध हो सकते हैं, लेकिन कोई dominant platform अपनी privacy व्यवस्था का इस्तेमाल rival developers पर ज्यादा भारी consent burden डालने के लिए नहीं कर सकता। यही चिंता उन ad-supported डेवलपर्स और advertising कंपनियों के लिए भी महत्वपूर्ण है, जो targeted advertising को मापने और चलाने के लिए अधिक सटीक तथा उपयोगी डेटा चाहते हैं। उपलब्ध जानकारी व्यापक industry concern को समर्थन देती है, लेकिन Meta की ओर से किसी विशिष्ट मौजूदा मांग की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करती।
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जर्मनी के Federal Cartel Office के अनुसार, Apple के App Tracking Transparency framework में थर्ड पार्टी ऐप्स को Apple की अपनी सेवाओं की तुलना में सहमति लेने के लिए ज्यादा कठिन प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था।
जर्मनी के Federal Cartel Office के अनुसार, Apple के App Tracking Transparency framework में थर्ड पार्टी ऐप्स को Apple की अपनी सेवाओं की तुलना में सहमति लेने के लिए ज्यादा कठिन प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था। बदलाव लगभग पूरे यूरोपीय संघ में लागू होंगे और सात वर्षों तक एक स्वतंत्र trustee इनकी निगरानी करेगा।
यह समझौता यूरोप में Apple पर बढ़ते नियामकीय दबाव के बीच आया है। फ्रांस ने €150 मिलियन और इटली ने €98.6 मिलियन का जुर्माना लगाया है।