चीन LLM रेस में पीछे क्यों है — और फिर भी AI की अगली लड़ाई जीत सकता है
पूर्व Tencent वैज्ञानिक लियू वेई का कहना है कि चीन LLM रेस में पीछे है क्योंकि उसका अधिकांश काम पहले से बने मॉडलों की नकल या कैच‑अप पर केंद्रित है। उनके अनुसार AI में जीत सिर्फ बेहतर मॉडल स्कोर से नहीं आती; असली बदलाव तब होता है जब कोई नया “पैरेडाइम” बनता है जो लोगों के काम करने का तरीका बदल देता है। Tencent छोड़ने...
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पूर्व Tencent वैज्ञानिक लियू वेई का कहना है कि चीन LLM रेस में पीछे है क्योंकि उसका अधिकांश काम पहले से बने मॉडलों की नकल या कैच‑अप पर केंद्रित है।
उनके अनुसार AI में जीत सिर्फ बेहतर मॉडल स्कोर से नहीं आती; असली बदलाव तब होता है जब कोई नया “पैरेडाइम” बनता है जो लोगों के काम करने का तरीका बदल देता है।
Tencent छोड़ने के बाद उन्होंने Video Rebirth नाम का स्टार्टअप शुरू किया, जो AI वीडियो और “वर्ल्ड मॉडल” तकनीक पर काम कर रहा है—जिसे वे AI की अगली बड़ी दिशा मानते हैं।
What did former Tencent AI lead Liu Wei say about why China is currently losing the large language model (LLM) race, what he means by the neIndustry debates about the AI race increasingly focus on who will create the next paradigm shift beyond today’s large language models.
AI संकेत
Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: What did former Tencent AI lead Liu Wei say about why China is currently losing the large language model (LLM) race, what he means by the ne. Article summary: Liu Wei’s argument is basically that China is behind in LLMs because it is still mostly following a path set elsewhere, while the leaders are creating the next breakthrough pattern themselves. He says China can still win. Topic tags: general, education, general web, user generated. Reference image context from search candidates: Reference image 1: visual subject "5 hours ago - A distinguished scientist at the Shenzhen-based company, Liu was also head of its Hunyuan team, the firm’s foundational model development unit for the generative AI e" source context "China is losing the LLM race but it can still win in AI, ex-Tencent AI lead says - ChinaTechNews.com" Ref
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कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के क्षेत्र में काम कर चुके लियू वेई, जो कभी Tencent के प्रतिष्ठित वैज्ञानिक और उसके Hunyuan बड़े‑मॉडल प्रोजेक्ट के तकनीकी नेताओं में से एक थे, ने वैश्विक AI प्रतिस्पर्धा पर काफ़ी स्पष्ट टिप्पणी की है। उनके मुताबिक चीन फिलहाल बड़े भाषा मॉडलों (Large Language Models या LLMs) की दौड़ में पीछे है। लेकिन वे यह भी मानते हैं कि इससे यह तय नहीं हो जाता कि पूरी AI रेस खत्म हो चुकी है।
लियू का मुख्य तर्क एक अहम अंतर पर आधारित है: तकनीकी पैरेडाइम का अनुसरण करना बनाम उसे बनाना। उनके अनुसार अगर कोई देश या कंपनी केवल मौजूदा तकनीक की नकल करके आगे बढ़ने की कोशिश करती है, तो जब भी अग्रणी खिलाड़ी दिशा बदलेंगे, वह फिर पीछे छूट सकती है।
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"चीन LLM रेस में पीछे क्यों है — और फिर भी AI की अगली लड़ाई जीत सकता है" का संक्षिप्त उत्तर क्या है?
पूर्व Tencent वैज्ञानिक लियू वेई का कहना है कि चीन LLM रेस में पीछे है क्योंकि उसका अधिकांश काम पहले से बने मॉडलों की नकल या कैच‑अप पर केंद्रित है।
सबसे पहले सत्यापित करने योग्य मुख्य बिंदु क्या हैं?
पूर्व Tencent वैज्ञानिक लियू वेई का कहना है कि चीन LLM रेस में पीछे है क्योंकि उसका अधिकांश काम पहले से बने मॉडलों की नकल या कैच‑अप पर केंद्रित है। उनके अनुसार AI में जीत सिर्फ बेहतर मॉडल स्कोर से नहीं आती; असली बदलाव तब होता है जब कोई नया “पैरेडाइम” बनता है जो लोगों के काम करने का तरीका बदल देता है।
मुझे अभ्यास में आगे क्या करना चाहिए?
Tencent छोड़ने के बाद उन्होंने Video Rebirth नाम का स्टार्टअप शुरू किया, जो AI वीडियो और “वर्ल्ड मॉडल” तकनीक पर काम कर रहा है—जिसे वे AI की अगली बड़ी दिशा मानते हैं।
लियू वेई क्यों कहते हैं कि चीन LLM रेस में पीछे है
लियू के अनुसार समस्या सिर्फ तकनीकी क्षमता की नहीं बल्कि रणनीति की है। उनका कहना है कि चीन में AI विकास का बड़ा हिस्सा पहले से बने मॉडलों की बराबरी करने या उनकी नकल करने पर केंद्रित रहा है—जैसे ChatGPT‑स्टाइल बातचीत करने वाले मॉडल बनाना।
यह तरीका जोखिम भरा है। यदि आप केवल मौजूदा तकनीकी सीमा का पीछा कर रहे हैं, तो जो खिलाड़ी उस सीमा को तय करते हैं वे अचानक नई दिशा में छलांग लगा सकते हैं—और बाकी सभी फिर से पीछे रह जाते हैं।
लियू ने इसे सीधे शब्दों में कहा: AI के दौर में यदि आप सिर्फ “फॉलोअर” हैं तो किसी भी समय आपके पैरों तले से जमीन खिसक सकती है, क्योंकि तकनीकी सीमा अचानक आगे बढ़ सकती है।
इसका मतलब यह है कि चुनौती केवल यह नहीं है कि किसी देश का मॉडल थोड़ा कमज़ोर है। असली मुद्दा यह है कि पूरे उद्योग की दिशा कौन तय कर रहा है।
AI में “नया पैरेडाइम” क्या होता है?
लियू वेई अक्सर “पैरेडाइम” शब्द का इस्तेमाल करते हैं। AI शोध में इसका मतलब होता है ऐसी बड़ी तकनीकी छलांग जो यह बदल दे कि AI कैसे बनाया जाता है, लोग उसे कैसे इस्तेमाल करते हैं और उससे कारोबार कैसे बनता है।
हाल के वर्षों में ऐसे बदलावों के उदाहरण देखे गए हैं:
ChatGPT, जिसने भाषा मॉडलों को सामान्य उपयोगकर्ताओं के लिए बातचीत करने वाले टूल में बदल दिया।
AI कोडिंग सिस्टम जैसे Claude Code, जिन्होंने डेवलपर्स के काम करने का तरीका बदल दिया।
इन बदलावों ने केवल मॉडल की सटीकता नहीं बढ़ाई। उन्होंने वर्कफ़्लो और यूज़र व्यवहार दोनों को बदल दिया, जिससे पूरे उद्योग का केंद्र बदल गया।
लियू के अनुसार, केवल थोड़ा बेहतर चैटबॉट बनाना पर्याप्त नहीं है। असली जीत तब होती है जब कोई नई श्रेणी का AI उत्पाद या तकनीक बनाता है जो पूरे क्षेत्र को फिर से व्यवस्थित कर दे।
उन्होंने Tencent क्यों छोड़ा
लियू वेई ने Tencent में आठ साल से अधिक समय बिताया और कंपनी के Hunyuan बड़े भाषा मॉडल के विकास में प्रमुख भूमिका निभाई। लेकिन 2024 के अंत में उन्होंने कंपनी छोड़ दी।
इसके बाद उन्होंने Video Rebirth नाम का एक AI स्टार्टअप शुरू किया, जो वीडियो जनरेशन और तथाकथित “वर्ल्ड मॉडल” तकनीक पर काम कर रहा है।
यह कंपनी ऐसे AI सिस्टम विकसित कर रही है जो उच्च‑गुणवत्ता वाले वीडियो बना सकें और जिनमें वास्तविक दुनिया जैसी भौतिक संगति और नियंत्रण हो। लक्ष्य है कि इन्हें विज्ञापन, ई‑कॉमर्स, फ़िल्म और एनीमेशन जैसे पेशेवर क्षेत्रों में इस्तेमाल किया जा सके।
स्टार्टअप ने शुरुआती चरण में करोड़ों डॉलर की फंडिंग जुटाई है और इसका फोकस मनोरंजन या प्रयोगात्मक टूल्स की बजाय प्रोफेशनल क्रिएटर्स के लिए शक्तिशाली वीडियो मॉडल बनाना है।
इस दिशा से संकेत मिलता है कि लियू का मानना है कि मल्टीमॉडल AI और वीडियो‑आधारित “वर्ल्ड मॉडल” भविष्य में AI की अगली बड़ी तकनीकी सीमा बन सकते हैं।
फिर भी चीन AI में जीत कैसे सकता है?
हालाँकि लियू चीन की मौजूदा स्थिति की आलोचना करते हैं, लेकिन वे यह भी कहते हैं कि AI की पूरी दौड़ अभी तय नहीं हुई है।
उनका तर्क है कि AI का विकास अलग‑अलग तकनीकी पैरेडाइम की लहरों में होता है। जब अगला बड़ा ब्रेकथ्रू आता है, तो नेतृत्व भी बदल सकता है।
इसलिए असली सवाल यह नहीं है कि:
आज सबसे अच्छा चैटबॉट किसके पास है।
बल्कि यह है कि:
AI का अगला उपयोग‑मॉडल कौन बनाएगा।
यदि चीन एजेंट सिस्टम, मल्टीमॉडल मॉडल, वर्ल्ड मॉडल या किसी नए क्षेत्र में अगला पैरेडाइम बना देता है, तो प्रतिस्पर्धा की पूरी तस्वीर बदल सकती है।
लियू के शब्दों में, आज की LLM रेस हारना भविष्य की AI रेस हारने के बराबर नहीं है। निर्णायक बात यह होगी कि अगला बड़ा बदलाव कौन लाता है।
बड़ी तस्वीर
लियू वेई की टिप्पणी वैश्विक AI बहस का हिस्सा है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि अत्याधुनिक मॉडल और कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में अमेरिका अभी आगे है, जबकि चीन तेजी से अपने मॉडल इकोसिस्टम और बड़े पैमाने पर उपयोग को बढ़ा रहा है।
लियू की चेतावनी एक पुरानी तकनीकी सच्चाई को दोहराती है: कभी‑कभी वर्तमान से बराबरी करना कम महत्वपूर्ण होता है, भविष्य की दिशा तय करना ज़्यादा महत्वपूर्ण होता है।
उनके अनुसार असली अवसर आज के LLM से थोड़ा बेहतर मॉडल बनाने में नहीं, बल्कि ऐसा नया पैरेडाइम खोजने में है जो मौजूदा मॉडलों को पुराना बना दे।
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