उनकी टिप्पणी का आशय यह था कि नई सरकार का रुख कोलंबिया की ऐतिहासिक धारणा और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचलित स्थिति से अलग है। पेट्रो ने कोलंबिया के हालिया राष्ट्रपति चुनाव में विदेशी प्रभाव का आरोप भी लगाया, लेकिन उपलब्ध रिपोर्टिंग में यह उनका दावा है, स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य नहीं।
यह मान्यता नवनिर्वाचित राष्ट्रपति अबेलार्दो दे ला एस्प्रिएला की सरकार ने दी। कोलंबिया के विदेश मंत्रालय ने 10 अगस्त 2026 को घोषणा की कि देश गोलन हाइट्स पर इजरायल की संप्रभुता और बाहरी खतरों से अपनी रक्षा करने के इजरायल के अधिकार को मान्यता देता है।
दे ला एस्प्रिएला ने 7 अगस्त को पदभार संभाला था। सत्ता में आने के कुछ ही दिनों बाद लिया गया यह फैसला इजरायल के साथ संबंधों को फिर से मजबूत करने की उनकी इच्छा का संकेत माना गया।
इस कदम के बाद कोलंबिया अमेरिका के साथ उन दो देशों में शामिल हो गया, जिन्हें उपलब्ध रिपोर्टिंग में गोलन हाइट्स पर इजरायल की संप्रभुता को औपचारिक रूप से मान्यता देने वाला बताया गया है।
गोलन हाइट्स वह क्षेत्र है जिसे इजरायल ने 1967 में सीरिया से कब्जे में लिया था। बाद में इजरायल ने 1981 में इसे अपने साथ मिलाने की घोषणा की, लेकिन इस दावे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक मान्यता नहीं मिली। उपलब्ध रिपोर्टिंग में अधिकांश देशों और संयुक्त राष्ट्र की प्रचलित स्थिति इसे कब्जे वाला सीरियाई क्षेत्र मानने की बताई गई है।
इसी पृष्ठभूमि में कोलंबिया का फैसला महज एक द्विपक्षीय बयान नहीं, बल्कि क्षेत्र की संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय कानून से जुड़े लंबे समय से चले आ रहे विवाद में स्पष्ट राजनयिक पक्ष के रूप में देखा जा रहा है।
फैसले पर प्रतिक्रियाएं तीखी और बंटी हुई रहीं।
इस तरह राजनयिक तस्वीर साफ रही: इजरायल ने फैसले का स्वागत किया, जबकि सीरिया, मिस्र और अन्य अरब पक्षों ने इसे खारिज कर दिया।
दे ला एस्प्रिएला सरकार का कदम पेट्रो की विदेश नीति से सीधा उलटफेर है। पेट्रो के राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान कोलंबिया ने 2024 में इजरायल से राजनयिक संबंध तोड़ दिए थे और रामल्लाह में एक राजनयिक मिशन का आदेश दिया था। ये कदम फिलिस्तीनी मुद्दे के साथ कोलंबिया की बढ़ती राजनीतिक और राजनयिक निकटता को दर्शाते थे।
नई सरकार ने इसके बजाय इजरायल के साथ संबंधों को मजबूत करने और गोलन हाइट्स पर इजरायल के दावे का समर्थन करने का रास्ता चुना है। इसलिए यह मान्यता केवल क्षेत्रीय संप्रभुता पर एक रुख नहीं, बल्कि पेट्रो सरकार की विदेश नीति से व्यापक दूरी बनाने का शुरुआती संकेत भी है।
पेट्रो की माफी इसी राजनीतिक बदलाव को रेखांकित करती है। अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोलंबिया की ओर से नई सरकार बोलती है, लेकिन पेट्रो यह तर्क दे रहे हैं कि गोलन हाइट्स पर उसका रुख कोलंबिया की ऐतिहासिक समझ या उनके कार्यकाल में अपनाई गई नीति को प्रतिबिंबित नहीं करता।