इसलिए असली सवाल यह नहीं है कि यूरोपीय कंपनियां AI टूल खरीदेंगी या नहीं। सवाल यह है कि वे इन टूल का उत्पादक इस्तेमाल कर पाएंगी, विस्तार के लिए पूंजी जुटा पाएंगी और दूसरे देशों में स्थानांतरित हुए बिना सीमापार कारोबार बढ़ा पाएंगी या नहीं।
लागार्ड ने दो आपस में जुड़ी बाधाओं की पहचान की। पहली, डिजिटल तकनीकों के लिए यूरोपीय संघ का सिंगल मार्केट अभी पर्याप्त रूप से एकीकृत नहीं है। अलग-अलग देशों के नियम, कानूनी व्यवस्थाएं और प्रशासनिक प्रक्रियाएं किसी कंपनी के लिए पूरे EU में डिजिटल सेवा देना कठिन बना सकती हैं। उसे हर राष्ट्रीय बाजार के लिए अपने संचालन का मॉडल अलग से तैयार करना पड़ सकता है।
दूसरी बाधा यूरोप के पूंजी बाजारों का विखंडन है। इससे उन नवोन्मेषी कंपनियों तक जोखिम पूंजी का प्रवाह सीमित हो जाता है, जिन्हें स्टार्ट-अप चरण के बाद वेंचर कैपिटल, ग्रोथ फंडिंग या इक्विटी निवेश के बड़े दौर की जरूरत होती है।
दोनों समस्याएं मिलकर कंपनियों के विस्तार में नुकसान पैदा करती हैं। कोई होनहार यूरोपीय कंपनी सीमापार विस्तार, देर के चरण की फंडिंग या यूरोप में प्रभावी ढंग से सूचीबद्ध होने में कठिनाई महसूस कर सकती है। उपलब्ध सामग्री में कंपनियों के स्थानांतरण या वित्तीय कमी की कोई सत्यापित मात्रात्मक तुलना नहीं दी गई है, इसलिए इस नुकसान का सटीक आकार बताना उचित नहीं होगा। फिर भी नीति-संबंधी चिंता स्पष्ट है: यूरोप नवाचार पैदा तो कर सकता है, लेकिन उससे बनने वाली कंपनियों और आर्थिक मूल्य का पर्याप्त हिस्सा अपने पास न रख पाए।
लागार्ड ने AI बहस को यूरोप की व्यापक आर्थिक स्थिति से जोड़ते हुए कहा कि युद्ध के बाद का विकास मॉडल अब कमजोर पड़ रहा है। इस पर बढ़ते व्यापार प्रतिबंध, अपेक्षाकृत ऊंची ऊर्जा लागत और औद्योगिक प्रतिस्पर्धा में चीन की बढ़ती ताकत का दबाव है।
इस वजह से AI का महत्व केवल तकनीकी क्षेत्र तक सीमित नहीं है। यदि यूरोपीय कंपनियां विनिर्माण, सेवाओं और शोध में AI का इस्तेमाल बढ़ा पाती हैं, तो यह उत्पादकता को सहारा दे सकता है और उन ताकतों के असर को कुछ हद तक कम कर सकता है जो पारंपरिक निर्यात-आधारित मॉडल को कम भरोसेमंद बना रही हैं। ECB ने भी कहा है कि AI जैसी अमूर्त परिसंपत्तियों में बढ़ता निवेश अनिश्चितता के बीच यूरो क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों को सहारा दे सकता है।
लागार्ड का तर्क यह नहीं है कि AI अकेले यूरोप की आर्थिक समस्याएं हल कर देगा। उनका जोर इस बात पर है कि बाहरी परिस्थितियां कम अनुकूल हो रही हैं, इसलिए बड़े पैमाने पर विस्तार, उत्पादकता और घरेलू क्षमता पहले से अधिक जरूरी हैं।
इस कठिन माहौल में लागार्ड ने यूरो क्षेत्र के लिए घरेलू मांग को मजबूती का एक महत्वपूर्ण स्रोत बताया। उन्होंने यह भी कहा कि हाल की वृद्धि व्यापक दबावों की तुलना में अपेक्षाकृत बेहतर बनी हुई है।
यह मजबूती इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे यूरोपीय कारोबारों को AI लागू करने के लिए बड़ा ग्राहक आधार मिलता है। हालांकि बड़ी आबादी अपने-आप एक एकीकृत बाजार नहीं बनाती। मांग को यूरोपीय स्तर के विस्तार में बदलने के लिए साझा नियम, आसानी से उपलब्ध वित्त और सीमापार कारोबार की कम बाधाएं भी जरूरी हैं।
लागार्ड का नीतिगत समाधान यूरोप के मौजूदा आकार को वास्तविक कारोबारी पैमाने में बदलने पर केंद्रित है।
पहला कदम उन कानूनी और प्रशासनिक अड़चनों को कम करना है, जो खासकर डिजिटल क्षेत्रों में सीमापार कारोबार को अनावश्यक रूप से जटिल बनाती हैं। लक्ष्य यह है कि कोई कंपनी यूरोप भर में सेवा विकसित और बेच सके, बिना हर राष्ट्रीय बाजार के लिए अपना संचालन ढांचा पूरी तरह बदलने के।
लागार्ड ने कंपनियों के लिए एक वैकल्पिक, मानकीकृत यूरोपीय कॉरपोरेट कानूनी रूप की वकालत की, जिसे आम तौर पर “EU Inc.” कहा जा रहा है। इसके तहत कंपनियों को अलग-अलग राष्ट्रीय व्यवस्थाओं के बजाय अधिक एकसमान यूरोपीय नियमों के तहत पंजीकरण और संचालन का विकल्प मिल सकता है।
इस प्रस्ताव का उद्देश्य नवोन्मेषी कंपनियों के लिए “यूरोप में शुरू करें और यूरोप में विस्तार करें” को आसान बनाना है—यानी कंपनी यूरोप में स्थापित हो, पूरे EU में ग्राहकों को सेवा दे और बढ़ने के बाद भी वहीं अपनी जड़ें बनाए रखे।
तीसरा कदम यूरोपीय पूंजी बाजारों का गहरा एकीकरण है। अधिक जुड़े हुए बाजारों से पूरे EU की बचत को इक्विटी निवेश, वेंचर कैपिटल और विस्तार की बाद की जरूरतों के लिए उपलब्ध कराना आसान हो सकता है।
AI कंपनियों के लिए ऐसी फंडिंग निर्णायक हो सकती है। उत्पाद विकसित करने, विशेषज्ञ प्रतिभाओं को नियुक्त करने, बुनियादी ढांचा बनाने और अंतरराष्ट्रीय विस्तार के लिए शुरुआती स्टार्ट-अप पूंजी से कहीं अधिक धन की जरूरत पड़ती है।
लागार्ड की चेतावनी ऐसे समय आई है जब सार्वजनिक बाजारों में एक बड़ा विरोधाभास दिखाई दे रहा है। AI उछाल ने दुनिया भर की टेक्नोलॉजी कंपनियों के मूल्यांकन को उन स्तरों तक पहुंचा दिया है, जो आखिरी बार डॉट-कॉम दौर में देखे गए थे। इससे यह सवाल उठ रहा है कि कहीं अत्यधिक उत्साह के बाद तेज गिरावट न आ जाए।
साथ ही, यूरोप की बाजार संरचना तेज गति से बढ़ने वाली टेक कंपनियों को वित्त देने और उन्हें अपने यहां बनाए रखने के लिए उतनी मजबूत नहीं है। इसलिए चुनौती दोहरी है: यूरोपीय निवेशकों और कंपनियों को AI के अवसर का अधिक हिस्सा हासिल करना होगा, लेकिन ऊंचे मूल्यांकन को टिकाऊ आर्थिक मूल्य का स्वतः प्रमाण भी नहीं मानना होगा।
लागार्ड के अनुसार, यूरोप की AI समस्या महत्वाकांक्षा या कारोबारी निवेश की कमी नहीं है। असली समस्या यह है कि यूरोप अपने बड़े लेकिन विभाजित बाजार को वास्तविक कारोबारी पैमाने में नहीं बदल पा रहा।
उपलब्ध आंकड़े AI को तेजी से अपनाए जाने और बड़े निवेश की योजना की ओर संकेत करते हैं। इनमें यूरो क्षेत्र की कंपनियों द्वारा इस वर्ष कुल निवेश का लगभग 9% AI पर लगाने की उम्मीद भी शामिल है। लेकिन सिंगल मार्केट की बाधाएं कम किए बिना, पूंजी बाजारों का एकीकरण गहरा किए बिना और “EU Inc.” जैसे सरल सीमापार कॉरपोरेट ढांचे के बिना, यूरोपीय नवोन्मेषकों को आविष्कार से विस्तार तक लगातार रुकावटों का सामना करना पड़ सकता है।
इसलिए उनका निष्कर्ष तकनीकी होने के साथ-साथ व्यावहारिक भी है: दूसरी डिजिटल क्रांति का आर्थिक लाभ कहीं और जाने से पहले यूरोप को कंपनियों के लिए यूरोप में शुरू करना, यूरोप से वित्त जुटाना और यूरोप में ही विस्तार करना आसान बनाना होगा।