यूरोपीय संघ का रक्षा खर्च 2021 के लगभग €218 अरब से बढ़कर 2025 में €418 अरब, यानी GDP के 2.2% तक पहुंच गया। [17] ECB के मॉडल के अनुसार दो वर्षों में सरकारी खर्च का औसत आउटपुट मल्टीप्लायर 0.93 है—यह स्थायी समृद्धि की गारंटी नहीं है। [2][4][7] रक्षा खर्च का असर इस बात पर निर्भर करेगा कि धन कैसे जुटाया जाता है और सामान...
शोध उत्तर

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: What did ECB Chief Economist Philip R. Lane warn about the eurozone-wide macroeconomic, fiscal, inflationary and monetary-policy consequence. Article summary: Lane’s warning was not that higher defence spending is necessarily harmful, but that it is a large, uncertain and uneven fiscal shock: it can raise euro-area output in the short run, while also straining capacity, adding. Topic tags: general, government, general web, user generated. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, watermarks, ch
यूरोप में रक्षा खर्च बढ़ाने की मुहिम को केवल आर्थिक विकास की कहानी समझना सही नहीं होगा। यह एक बड़ा और अनिश्चित राजकोषीय झटका है—जो अल्पावधि में उत्पादन और रोजगार को सहारा दे सकता है, लेकिन साथ ही महंगाई, सार्वजनिक कर्ज और यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) की मौद्रिक नीति के लिए नई चुनौतियां पैदा कर सकता है।
यूरोपीय संघ का रक्षा खर्च 2021 के लगभग €218 अरब से बढ़कर 2025 में €418 अरब हो गया। यह EU के GDP का 2.2% है। यूरो क्षेत्र के लिए ECB के विश्लेषण का निष्कर्ष है कि अधिक सरकारी खर्च से वास्तविक उत्पादन बढ़ना चाहिए, लेकिन इसके प्रभाव का आकार, समय और अलग-अलग देशों में वितरण अभी निश्चित नहीं है।
रक्षा क्षेत्र में ऑर्डर बढ़ने से कारखानों, इंजीनियरों, तकनीकी कंपनियों और विशेषीकृत सामान की मांग बढ़ सकती है। अगर अर्थव्यवस्था में अतिरिक्त क्षमता उपलब्ध हो, तो इससे अल्पावधि में उत्पादन को बढ़ावा मिल सकता है।
लेकिन यदि कई देश एक साथ तेजी से खरीदारी शुरू कर दें, तो रक्षा उद्योग नागरिक निवेश और उपभोग के साथ श्रमिकों, कच्चे माल, ऊर्जा और उत्पादन क्षमता के लिए प्रतिस्पर्धा करने लगेगा। जब आपूर्ति मांग की रफ्तार से नहीं बढ़ती, तो सरकारी खर्च से मिलने वाला अतिरिक्त उत्पादन कम और कीमतों व मजदूरी पर दबाव अधिक हो सकता है।
इसीलिए ECB महंगाई के असर को तय परिणाम नहीं, बल्कि निगरानी योग्य जोखिम मानता है।
ECB के कई मॉडलों के संयुक्त आकलन में सरकारी खर्च का औसत आउटपुट मल्टीप्लायर दो वर्षों की अवधि में 0.93 है। सरल शब्दों में, अनुमान लगभग एक-के-बदले-एक प्रभाव के करीब है, लेकिन यह हर मॉडल में समान नहीं है और इसे स्थायी आर्थिक समृद्धि की गारंटी नहीं समझना चाहिए।
मल्टीप्लायर किसी तय अवधि में उत्पादन की अनुमानित प्रतिक्रिया बताता है। इसका अर्थ यह नहीं कि सरकार द्वारा खर्च किया गया हर यूरो देश की संपत्ति में स्थायी रूप से एक यूरो जोड़ देगा। वास्तविक नतीजा खर्च की रफ्तार, अर्थव्यवस्था की स्थिति, खरीदे जाने वाले उपकरणों के प्रकार और उत्पादन यूरोप के भीतर या बाहर होने पर निर्भर करेगा।
हालिया यूरोसिस्टम अनुमानों में रक्षा और बुनियादी ढांचे से जुड़े राजकोषीय प्रोत्साहन को यूरो क्षेत्र की वृद्धि के लिए सहारा माना गया है। इसका असर अनुमान अवधि के दौरान धीरे-धीरे बढ़ने की उम्मीद है। ECB के पहले के विश्लेषण में भी 2026-27 के दौरान नए रक्षा उपायों से वृद्धि को समर्थन मिलने का अनुमान लगाया गया था, जबकि आधारभूत परिदृश्य में महंगाई पर असर सीमित रहने की बात कही गई थी।
ECB के सामने असली सवाल यह नहीं है कि सरकारों ने कितनी रकम की घोषणा की है, बल्कि यह है कि खर्च मांग, आपूर्ति और महंगाई को किस तरह प्रभावित करता है।
रक्षा खर्च में धीरे-धीरे बढ़ोतरी होने पर कंपनियां उत्पादन बढ़ा सकें और श्रमिक नए ऑर्डर पाने वाले क्षेत्रों में जा सकें, तो कीमतों पर असर अपेक्षाकृत सीमित रह सकता है। इसके उलट, अचानक खरीदारी बढ़ने से कुशल श्रम, इंजीनियरिंग, विशेषीकृत सामग्री और औद्योगिक इनपुट की कमी सामने आ सकती है।
इसका मौद्रिक नीति पर दो तरह से असर हो सकता है:
ECB के मॉडल सकारात्मक उत्पादन प्रभाव और औसतन सीमित महंगाई प्रभाव की ओर संकेत करते हैं, लेकिन अनुमानों में काफी अनिश्चितता भी है। इसलिए केंद्रीय बैंक रक्षा खर्च की घोषणा पर यांत्रिक प्रतिक्रिया नहीं दे सकता। उसे वास्तविक भुगतान, उत्पादन क्षमता की सीमाओं और महंगाई की स्थायित्व अवधि पर नजर रखनी होगी।
एक ही रक्षा कार्यक्रम अलग-अलग देशों पर अलग वित्तीय असर डाल सकता है। मजबूत बजट वाले देश बिना तत्काल दूसरी प्राथमिकताओं में कटौती किए खर्च बढ़ाने की बेहतर स्थिति में हो सकते हैं। इसके विपरीत, अधिक कर्ज वाले या सीमित राजकोषीय गुंजाइश वाले देशों को रक्षा, नागरिक निवेश, सार्वजनिक सेवाओं और कर्ज की टिकाऊ स्थिति के बीच कठिन चुनाव करना पड़ सकता है।
ECB के एक परिदृश्य में रक्षा खर्च 2025 के लगभग 2% GDP से बढ़कर 2029 तक 3.5% GDP माना गया है। इसके अनुरूप 2029 तक लगभग 1.8% GDP की राजकोषीय ढील का अनुमान है। यह पूरे यूरो क्षेत्र के लिए एक मान्यता है, न कि हर सदस्य देश के लिए समान पूर्वानुमान।
धन जुटाने का तरीका भी असर बदल देता है:
हालांकि, इनमें से कोई भी परिणाम अपने-आप तय नहीं होता। भुगतान का समय, राजकोषीय योजनाओं की विश्वसनीयता और वित्तीय बाजारों की प्रतिक्रिया भी महत्वपूर्ण होगी।
रक्षा उपकरण और सेवाएं यूरोपीय कंपनियों से खरीदी जाएं तो स्थानीय अर्थव्यवस्था पर असर अधिक हो सकता है। ECB की Financial Stability Review के अनुसार, EU के भीतर से रक्षा उपकरण खरीदने पर राजकोषीय मल्टीप्लायर अधिक होने की संभावना है।
इसके विपरीत, यूरोप के बाहर के आपूर्तिकर्ताओं से खरीदारी करने पर मांग का एक हिस्सा विदेश चला जाएगा। इससे सैन्य क्षमता को लाभ मिल सकता है, लेकिन यूरोपीय उत्पादन और स्थानीय औद्योगिक क्षमता को मिलने वाला तत्काल आर्थिक फायदा कम हो जाएगा।
साझा खरीद, एक-दूसरे के साथ काम करने वाली प्रणालियां और यूरोप में उत्पादन क्षमता बढ़ाने से रणनीतिक और आर्थिक दोनों लाभ बेहतर हो सकते हैं। फिर भी यह लाभ स्वतः नहीं मिलेगा। इसके लिए देशों को दोहराव वाली परियोजनाओं से बचना, प्रभावी निवेश करना और मांग के अनुरूप तेजी से क्षमता तैयार करना होगा।
रक्षा अनुसंधान और विकास से व्यापक उत्पादकता लाभ मिल सकते हैं, यदि विकसित तकनीकें बाद में नागरिक क्षेत्रों में भी उपयोग हों। ECB ने रक्षा के साथ-साथ यूरोप के हरित और डिजिटल बदलावों के लिए आवश्यक सार्वजनिक वित्तपोषण के बड़े पैमाने को भी रेखांकित किया है।
लेकिन इन संभावित लाभों को सैन्य खर्च पर निश्चित रिटर्न नहीं माना जा सकता। परिणाम खरीद प्रक्रिया की गुणवत्ता, शोध के नागरिक उपयोगों तक पहुंचने, निजी क्षेत्र द्वारा उसे अपनाने और इस बात पर निर्भर करेंगे कि रक्षा निवेश उपयोगी नागरिक परियोजनाओं को पीछे धकेलता है या उनका पूरक बनता है।
ECB का संदेश यह नहीं है कि बढ़ता रक्षा खर्च अनिवार्य रूप से नुकसानदेह होगा। यूरोप का रक्षा विस्तार यूरो क्षेत्र के उत्पादन को सहारा दे सकता है और मॉडल अनुमानों में दो वर्षों का औसत सरकारी खर्च मल्टीप्लायर 0.93 है।
लेकिन नतीजे कम अनुकूल हो सकते हैं, यदि खर्च आपूर्ति की क्षमता से बहुत तेज बढ़े, यदि बड़ी मात्रा में खरीद यूरोप के बाहर से की जाए या यदि राष्ट्रीय कर्ज का दबाव अन्य निवेशों को सीमित कर दे।
मौद्रिक नीति के लिए खर्च की रफ्तार, उसकी संरचना और कीमतों पर उसका असर सबसे महत्वपूर्ण होंगे। सरकारों के सामने चुनौती यह है कि वे सुरक्षा क्षमता मजबूत करें, लेकिन इस जरूरी प्रतिक्रिया को अनियंत्रित मांग झटके या यूरोपीय देशों के बीच और गहरे राजकोषीय अंतर का कारण न बनने दें।
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यूरोपीय संघ का रक्षा खर्च 2021 के लगभग €218 अरब से बढ़कर 2025 में €418 अरब, यानी GDP के 2.2% तक पहुंच गया। [17]
यूरोपीय संघ का रक्षा खर्च 2021 के लगभग €218 अरब से बढ़कर 2025 में €418 अरब, यानी GDP के 2.2% तक पहुंच गया। [17] ECB के मॉडल के अनुसार दो वर्षों में सरकारी खर्च का औसत आउटपुट मल्टीप्लायर 0.93 है—यह स्थायी समृद्धि की गारंटी नहीं है। [2][4][7]
रक्षा खर्च का असर इस बात पर निर्भर करेगा कि धन कैसे जुटाया जाता है और सामान कहां से खरीदा जाता है; यूरोपीय आपूर्ति और साझा खरीद से स्थानीय लाभ बढ़ सकता है। [8]