यह क्षेत्र इसलिए भी खास है क्योंकि तकनीकी और भू‑राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के बावजूद AI सुरक्षा ऐसा विषय हो सकता है जहाँ अमेरिका और चीन सीमित स्तर पर सहयोग की जमीन तलाश सकें।
चीन का लंबे समय से यह रुख रहा है कि AI का विकास वैश्विक स्तर पर खुला और सहयोगात्मक होना चाहिए। साथ ही वह उन निर्यात प्रतिबंधों की आलोचना करता है जिन्हें वह अपनी तकनीकी प्रगति को रोकने की कोशिश मानता है।
ट्रंप के दौरे के दौरान दूसरा बड़ा मुद्दा Nvidia की H200 AI चिप्स का था। ये चिप्स बड़े AI मॉडलों को ट्रेन करने और चलाने के लिए इस्तेमाल होने वाले सबसे उन्नत प्रोसेसरों में गिने जाते हैं।
हालाँकि इस यात्रा से पहले उम्मीदें थीं कि शायद इस विषय पर कोई बड़ा फैसला हो सकता है, लेकिन रिपोर्टों के मुताबिक H200 चिप्स की चीन को संभावित आपूर्ति अभी भी “अनिश्चित स्थिति” में है।
अमेरिकी पक्ष का कहना है कि यदि निर्यात लाइसेंस की अनुमति भी मिलती है, तो अंतिम निर्णय चीन का “संप्रभु फैसला” होगा—यानी चीनी कंपनियाँ और सरकार खुद तय करेंगी कि वे इन चिप्स को खरीदना चाहती हैं या नहीं।
दिलचस्प बात यह है कि अमेरिकी अधिकारियों ने संकेत दिया कि सेमीकंडक्टर निर्यात नियंत्रण खुद बैठक का मुख्य विषय नहीं था।
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीयर ने कहा कि बीजिंग में द्विपक्षीय वार्ता के दौरान चिप निर्यात नियंत्रण “मुख्य चर्चा का विषय” नहीं थे। इससे संकेत मिलता है कि बातचीत अधिक व्यापक व्यापार और कूटनीतिक मुद्दों पर केंद्रित थी, न कि विशेष लाइसेंस या बिक्री समझौतों पर।
इसी बीच, अमेरिकी तकनीक तक अनिश्चित पहुंच ने चीन को अपने घरेलू AI‑चिप उद्योग को तेज़ी से विकसित करने के लिए प्रेरित किया है।
कुछ रिपोर्टों के अनुसार लगभग दस चीनी कंपनियों को H200 चिप्स खरीदने की अनुमति मिली थी, लेकिन अब तक एक भी चिप की डिलीवरी नहीं हुई है। बीजिंग ने कथित तौर पर घरेलू टेक कंपनियों को अपनी खरीद धीमी करने और स्थानीय विकल्पों के विकास पर ध्यान देने के लिए भी कहा है।
यह रणनीति चीन की उस व्यापक नीति का हिस्सा है जिसका लक्ष्य उन्नत तकनीकों में आत्मनिर्भरता बढ़ाना है।
बीजिंग की वार्ता से साफ होता है कि AI के क्षेत्र में अमेरिका और चीन का रिश्ता जटिल है। एक ओर दोनों देश AI सुरक्षा के नियमों पर सहयोग की संभावना तलाश रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अत्याधुनिक चिप्स और कंप्यूटिंग क्षमता को लेकर कड़ी प्रतिस्पर्धा जारी है।
अभी के लिए यह बैठक संवाद का रास्ता खोलती है, लेकिन कोई निर्णायक नीति परिवर्तन सामने नहीं आया। AI सुरक्षा पर संभावित सहयोग भविष्य में आकार ले सकता है, जबकि Nvidia H200 चिप्स के निर्यात का सवाल—और व्यापक सेमीकंडक्टर प्रतिस्पर्धा—अब भी खुला हुआ है।