ताइवान के उप विधानसभाध्यक्ष जॉनी चियांग ने कहा कि पोलैंड यूरोप में ताइवान के लिए “गेटवे” बन सकता है, जबकि ताइवान एशिया में पोलिश कंपनियों के लिए टेक हब की भूमिका निभा सकता है। [33] राफाल कोमारविच के नेतृत्व वाले पोलिश संसदीय प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक में दोनों देशों के बीच बढ़ते व्यापार, तकनीकी सहयोग और संसदीय संवाद...

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ताइवान और पोलैंड के बीच आर्थिक व तकनीकी सहयोग पिछले कुछ वर्षों में तेज़ी से बढ़ा है। ताइवान की संसद (लेजिस्लेटिव युआन) के उपाध्यक्ष जॉनी चियांग ने पोलैंड के संसदीय प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के दौरान कहा कि दोनों देश एक‑दूसरे के लिए रणनीतिक “गेटवे” बन सकते हैं—पोलैंड यूरोप के लिए और ताइवान एशिया के लिए।
ताइपेई में पोलैंड की संसद (सेज्म) की अर्थव्यवस्था और विकास समिति के अध्यक्ष राफाल कोमारविच के नेतृत्व में आए नौ सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल की मेजबानी करते हुए चियांग ने पोलैंड द्वारा ताइवान के प्रति लंबे समय से मिले समर्थन के लिए आभार जताया। उन्होंने कहा कि भले ही दोनों देशों के बीच भौगोलिक दूरी बहुत है, लेकिन उनके संबंध लगातार मजबूत हुए हैं।
चियांग के अनुसार, पोलैंड यूरोपीय संघ (EU) के भीतर एक महत्वपूर्ण आर्थिक केंद्र है। यूरोप के विशाल एकल बाज़ार तक पहुंच बनाने की चाह रखने वाली ताइवानी कंपनियों के लिए पोलैंड एक व्यावहारिक प्रवेशद्वार बन सकता है। दूसरी ओर, ताइवान की उन्नत तकनीकी उद्योग—खासकर सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स—और पूर्वी एशिया की विनिर्माण सप्लाई चेन में उसकी मजबूत स्थिति, पोलिश कंपनियों के लिए एशियाई बाज़ार में प्रवेश का मंच प्रदान करती है।
इसी पूरकता के कारण चियांग का मानना है कि दोनों देश मिलकर यूरोप और एशिया के बीच व्यापार व तकनीकी सहयोग को तेज़ कर सकते हैं।
यह बैठक केवल औपचारिक शिष्टाचार भर नहीं थी। ताइवान और कई यूरोपीय देशों के बीच संसदीय स्तर पर संवाद हाल के वर्षों में बढ़ा है, जो निवेश, तकनीक और औद्योगिक विकास जैसे क्षेत्रों में व्यावहारिक सहयोग को आगे बढ़ाने का माध्यम बन रहा है।
चियांग का कहना है कि सांसदों के बीच नियमित संवाद से सरकारें ऐसा माहौल बना सकती हैं जिसमें कंपनियां, शोध संस्थान और स्टार्टअप आपसी साझेदारी को आगे बढ़ा सकें। इससे लोकतांत्रिक देशों के बीच राजनीतिक तालमेल भी मजबूत होता है।
हाल की यात्राएं दिखाती हैं कि ताइवान‑पोलैंड संबंध केवल राजनीतिक समर्थन तक सीमित नहीं हैं बल्कि वास्तविक आर्थिक गतिविधियों में भी बदल रहे हैं।
30 जून से 4 जुलाई 2025 के बीच पोलैंड ने अपने इतिहास का सबसे बड़ा आर्थिक मिशन ताइवान भेजा। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व आर्थिक विकास और प्रौद्योगिकी के उपमंत्री मिखाल यारोस ने किया और इसमें उद्योग, विज्ञान, स्थानीय प्रशासन और सरकारी संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल थे। इस यात्रा के दौरान निवेश बैठकों के साथ कई सहयोग समझौते भी हुए।
दोनों देशों के बीच सबसे तेज़ी से बढ़ते क्षेत्रों में से एक ड्रोन और उन्नत तकनीक है।
जुलाई 2025 में ताइवान के एशिया UAV AI इनोवेशन एप्लिकेशन आरएंडडी सेंटर, ताइवान‑पोलैंड चैंबर ऑफ कॉमर्स, जेमें टेक्नोलॉजी और पोलैंड की FC Auto System ने साइबरसिक्योरिटी मॉड्यूल, ऑटोमोटिव इलेक्ट्रॉनिक्स और ड्रोन एप्लिकेशन में सहयोग बढ़ाने के लिए एक समझौता ज्ञापन (MOU) पर हस्ताक्षर किए।
इसके अलावा ताइवानी और पोलिश ड्रोन उद्योग संगठनों के बीच भी समझौते हुए हैं जिनका उद्देश्य संयुक्त तकनीकी विकास और ऐसी सप्लाई चेन बनाना है जो चीन‑आधारित नेटवर्क पर निर्भर न हों। इन साझेदारियों में सिस्टम इंटीग्रेशन, औद्योगिक उपयोग और नई तकनीकों के विकास पर जोर दिया गया है।
ताइवान और पोलैंड दोनों अक्सर अपने संबंधों की बुनियाद के रूप में लोकतंत्र, मानवाधिकार और कानून के शासन जैसे साझा मूल्यों का उल्लेख करते हैं।
चियांग के अनुसार, यही समान दृष्टिकोण इस रिश्ते को सिर्फ व्यापारिक लेन‑देन से आगे ले जाता है। यह उन लोकतांत्रिक समाजों के बीच रणनीतिक सहयोग है जो सुरक्षित सप्लाई चेन, तकनीकी नवाचार और यूरोप‑एशिया के बीच गहरे आर्थिक संबंध चाहते हैं।
संसदीय आदान‑प्रदान, व्यापारिक मिशनों और ड्रोन जैसी उन्नत तकनीक में बढ़ते समझौतों के साथ, ताइवान और पोलैंड की साझेदारी धीरे‑धीरे दीर्घकालिक रणनीतिक सहयोग का रूप लेती दिखाई दे रही है।
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ताइवान के उप विधानसभाध्यक्ष जॉनी चियांग ने कहा कि पोलैंड यूरोप में ताइवान के लिए “गेटवे” बन सकता है, जबकि ताइवान एशिया में पोलिश कंपनियों के लिए टेक हब की भूमिका निभा सकता है। [33]
ताइवान के उप विधानसभाध्यक्ष जॉनी चियांग ने कहा कि पोलैंड यूरोप में ताइवान के लिए “गेटवे” बन सकता है, जबकि ताइवान एशिया में पोलिश कंपनियों के लिए टेक हब की भूमिका निभा सकता है। [33] राफाल कोमारविच के नेतृत्व वाले पोलिश संसदीय प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक में दोनों देशों के बीच बढ़ते व्यापार, तकनीकी सहयोग और संसदीय संवाद पर जोर दिया गया। [33]
हाल के आर्थिक मिशनों और ड्रोन‑टेक समझौतों से संकेत मिलता है कि ताइवान‑पोलैंड साझेदारी अब उन्नत उद्योगों और भरोसेमंद सप्लाई चेन तक फैल रही है। [3][4][7]