एक इंटरव्यू में पावेल ने कहा कि NATO को रूस की हरकतों के जवाब में “निर्णायक और संभवतः असममित (asymmetric)” कदमों पर विचार करना चाहिए।
उन्होंने जिन संभावित कदमों का उल्लेख किया, उनमें शामिल हैं:
कुछ रिपोर्टों में रूसी सैटेलाइट प्रणालियों को बाधित करने की बात भी कही गई है, लेकिन यह जानकारी सभी स्रोतों में समान रूप से नहीं मिलती, इसलिए इसे सावधानी से देखा जाता है।
पावेल का तर्क है कि अगर NATO बार‑बार होने वाली घटनाओं पर केवल चेतावनी या इंटरसेप्शन तक सीमित रहता है, तो रूस इसे गठबंधन की कमजोरी के रूप में देख सकता है।
पावेल की टिप्पणी ऐसे समय आई है जब NATO के पूर्वी मोर्चे (Eastern Flank) पर कई घटनाओं ने सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है।
हाल के महीनों में बाल्टिक क्षेत्र के NATO सदस्य देशों ने कई बार ड्रोन के अपने हवाई क्षेत्र में घुसने की घटनाएँ दर्ज की हैं।
उदाहरण के तौर पर लातविया ने अपने हवाई क्षेत्र में एक ड्रोन देखे जाने की पुष्टि की, जिसके बाद खतरे का सामना करने के लिए NATO के लड़ाकू विमानों को सक्रिय किया गया।
यूक्रेन द्वारा रूस के अंदर लक्ष्यों पर किए जा रहे लंबी दूरी के ड्रोन हमलों के दौरान कुछ ड्रोन रास्ता भटककर NATO देशों के हवाई क्षेत्र में पहुँच गए, जिससे सुरक्षा अलर्ट बढ़ गया।
इसी दौरान रूस और बेलारूस ने संयुक्त परमाणु सैन्य अभ्यास भी किए, जिनमें परमाणु हथियारों की तैनाती और इस्तेमाल की तैयारी से जुड़े अभ्यास शामिल थे।
इन अभ्यासों में हजारों सैनिक और परमाणु‑सक्षम सैन्य प्रणालियाँ शामिल थीं, जिन्हें कई विश्लेषकों ने NATO और यूरोप को शक्ति‑प्रदर्शन का संदेश माना।
रूसी अधिकारियों ने भी स्वीकार किया कि ऐसे अभ्यास पश्चिमी देशों के लिए संकेत होते हैं कि मॉस्को अपनी सैन्य तैयारियों को दिखाना चाहता है।
यूरोप के कई नेताओं का मानना है कि रूस अक्सर ऐसी गतिविधियाँ करता है जो NATO की सामूहिक रक्षा धारा—आर्टिकल 5—की सीमा तक पहुँचती हैं, लेकिन उसे पार नहीं करतीं।
ऐसी गतिविधियों के उदाहरण अक्सर बताए जाते हैं:
क्योंकि ये घटनाएँ खुले सैन्य हमले की श्रेणी में नहीं आतीं, इसलिए NATO आमतौर पर इंटरसेप्शन, चेतावनी या कूटनीतिक विरोध जैसे सीमित जवाब देता है।
पावेल का मानना है कि यह स्थिति धीरे‑धीरे कम‑स्तरीय दबाव को सामान्य बना सकती है।
पावेल के सुझाव NATO की आधिकारिक नीति नहीं हैं। वे एक राष्ट्रीय नेता के रूप में अपनी राय दे रहे हैं कि गठबंधन की प्रतिरोध (deterrence) रणनीति कैसे विकसित होनी चाहिए।
यूरोप के भीतर इस मुद्दे पर मतभेद हैं:
पेट्र पावेल की टिप्पणी उस बड़े सवाल को सामने लाती है जिसका सामना आज NATO कर रहा है: बार‑बार होने वाले उकसावों को कैसे रोका जाए, बिना किसी बड़े युद्ध को भड़काए।
ड्रोन घटनाओं से लेकर बड़े सैन्य अभ्यासों तक—NATO के पूर्वी मोर्चे पर जारी तनाव यह संकेत देता है कि आने वाले समय में यूरोप के भीतर इस मुद्दे पर बहस और तेज हो सकती है।