BIS ने स्पष्ट किया कि यह नियम Nvidia के Blackwell और Rubin परिवारों के साथ-साथ AMD के MI350x चिप्स पर भी लागू होगा । BIS के एक प्रवक्ता ने इसे 2023 से लागू निर्यात लाइसेंस आवश्यकताओं का "स्पष्टीकरण" बताया ।
इस पूरे प्रकरण की जड़ मई 2025 में है। तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने बाइडन प्रशासन द्वारा बनाए गए 'AI डिफ्यूज़न रूल' (AI प्रसार नियम) को रद्द कर दिया था। यह नियम 15 जनवरी 2025 को जारी किया गया था और इसे 15 मई 2025 से लागू होना था । इस नियम का उद्देश्य दुनिया भर में उन्नत AI चिप्स तक पहुंच को प्रतिबंधित करना था।
ट्रंप प्रशासन ने इस नियम को लागू होने से पहले ही रद्द कर दिया। वाणिज्य विभाग के अंडर सेक्रेटरी जेफरी केसलर ने BIS के प्रवर्तन अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे इस नियम को लागू न करें, जब तक कि कोई नया नियम विकसित न हो जाए । लेकिन अगले एक साल तक कोई नया नियम नहीं आया। इस तरह लगभग एक साल का प्रवर्तन शून्य (एन्फोर्समेंट वैक्यूम) बन गया, जिसका चीनी कंपनियों ने पूरा फायदा उठाया ।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, चिप उद्योग के सूत्रों ने अनुमान लगाया था कि इस एक साल की अवधि में इस खामी के जरिए चीनी संस्थाओं को संभवतः सैकड़ों हज़ारों (हंड्रेड्स ऑफ़ थाउज़ेंड्स) एडवांस्ड चिप्स का निर्यात किया गया । इनमें Nvidia के Blackwell और Rubin प्रोसेसर और AMD के MI350x एक्सेलरेटर शामिल हैं ।
सटीक संख्या अज्ञात है और संभवतः जानना मुश्किल होगा। BIS के दिशानिर्देश में यह भी कहा गया कि कंपनियां "पहले से खरीदे गए घटकों का संचालन जारी रख सकती हैं" , जिसका मतलब है कि जो चिप्स पहले ही चीनी संस्थाओं तक पहुंच चुके हैं, वे उनके पास ही रहेंगे।
4 जून 2026 को, चीन के वाणिज्य मंत्रालय के प्रवक्ता हे योंगकियान ने इस कदम की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि "निर्यात नियंत्रणों के दुरुपयोग ने वैश्विक सेमीकंडक्टर औद्योगिक और आपूर्ति श्रृंखलाओं की स्थिरता को गंभीर रूप से कमजोर किया है" । चीन ने अमेरिका से "अपने व्यवहार को सुधारने" का आग्रह किया ।
उसी दिन, चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने OECD की एक रिपोर्ट को भी खारिज कर दिया, जिसमें दावा किया गया था कि चीनी विनिर्माण कंपनियों को OECD देशों की कंपनियों की तुलना में तीन से आठ गुना अधिक राज्य सब्सिडी मिलती है । चीन ने इस रिपोर्ट को "अवधारणात्मक परिभाषाओं में कमी, पक्षपातपूर्ण नमूना चयन और एकतरफा निष्कर्ष" वाला बताया ।
यह पूरी घटना अमेरिकी निर्यात नियंत्रण नीति की एक मूलभूत कमजोरी को उजागर करती है: एक प्रशासन द्वारा बनाए गए नियमों को अगला प्रशासन आसानी से खत्म कर सकता है, जिससे विरोधियों के लिए अवसर पैदा हो जाते हैं। 31 मई का दिशानिर्देश एक संतुलित दृष्टिकोण है - यह कोई व्यापक प्रतिबंध नहीं है, बल्कि प्रवर्तन स्पष्टीकरण है । यह देखना बाकी है कि क्या यह नया दिशानिर्देश भविष्य में होने वाली ऐसी चोरी को प्रभावी ढंग से रोक पाएगा।
BIS ने स्पष्ट किया कि यह नियम Nvidia के Blackwell और Rubin परिवारों के साथ-साथ AMD के MI350x चिप्स पर भी लागू होगा । BIS के एक प्रवक्ता ने इसे 2023 से लागू निर्यात लाइसेंस आवश्यकताओं का "स्पष्टीकरण" बताया ।
इस पूरे प्रकरण की जड़ मई 2025 में है। तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने बाइडन प्रशासन द्वारा बनाए गए 'AI डिफ्यूज़न रूल' (AI प्रसार नियम) को रद्द कर दिया था। यह नियम 15 जनवरी 2025 को जारी किया गया था और इसे 15 मई 2025 से लागू होना था । इस नियम का उद्देश्य दुनिया भर में उन्नत AI चिप्स तक पहुंच को प्रतिबंधित करना था।
ट्रंप प्रशासन ने इस नियम को लागू होने से पहले ही रद्द कर दिया। वाणिज्य विभाग के अंडर सेक्रेटरी जेफरी केसलर ने BIS के प्रवर्तन अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे इस नियम को लागू न करें, जब तक कि कोई नया नियम विकसित न हो जाए । लेकिन अगले एक साल तक कोई नया नियम नहीं आया। इस तरह लगभग एक साल का प्रवर्तन शून्य (एन्फोर्समेंट वैक्यूम) बन गया, जिसका चीनी कंपनियों ने पूरा फायदा उठाया ।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, चिप उद्योग के सूत्रों ने अनुमान लगाया था कि इस एक साल की अवधि में इस खामी के जरिए चीनी संस्थाओं को संभवतः सैकड़ों हज़ारों (हंड्रेड्स ऑफ़ थाउज़ेंड्स) एडवांस्ड चिप्स का निर्यात किया गया । इनमें Nvidia के Blackwell और Rubin प्रोसेसर और AMD के MI350x एक्सेलरेटर शामिल हैं ।
सटीक संख्या अज्ञात है और संभवतः जानना मुश्किल होगा। BIS के दिशानिर्देश में यह भी कहा गया कि कंपनियां "पहले से खरीदे गए घटकों का संचालन जारी रख सकती हैं" , जिसका मतलब है कि जो चिप्स पहले ही चीनी संस्थाओं तक पहुंच चुके हैं, वे उनके पास ही रहेंगे।
4 जून 2026 को, चीन के वाणिज्य मंत्रालय के प्रवक्ता हे योंगकियान ने इस कदम की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि "निर्यात नियंत्रणों के दुरुपयोग ने वैश्विक सेमीकंडक्टर औद्योगिक और आपूर्ति श्रृंखलाओं की स्थिरता को गंभीर रूप से कमजोर किया है" । चीन ने अमेरिका से "अपने व्यवहार को सुधारने" का आग्रह किया ।
उसी दिन, चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने OECD की एक रिपोर्ट को भी खारिज कर दिया, जिसमें दावा किया गया था कि चीनी विनिर्माण कंपनियों को OECD देशों की कंपनियों की तुलना में तीन से आठ गुना अधिक राज्य सब्सिडी मिलती है । चीन ने इस रिपोर्ट को "अवधारणात्मक परिभाषाओं में कमी, पक्षपातपूर्ण नमूना चयन और एकतरफा निष्कर्ष" वाला बताया ।
यह पूरी घटना अमेरिकी निर्यात नियंत्रण नीति की एक मूलभूत कमजोरी को उजागर करती है: एक प्रशासन द्वारा बनाए गए नियमों को अगला प्रशासन आसानी से खत्म कर सकता है, जिससे विरोधियों के लिए अवसर पैदा हो जाते हैं। 31 मई का दिशानिर्देश एक संतुलित दृष्टिकोण है - यह कोई व्यापक प्रतिबंध नहीं है, बल्कि प्रवर्तन स्पष्टीकरण है । यह देखना बाकी है कि क्या यह नया दिशानिर्देश भविष्य में होने वाली ऐसी चोरी को प्रभावी ढंग से रोक पाएगा।