ईरान का कहना है कि उसने रूस के Su-35 लड़ाकू विमानों की खरीद की तैयारी पूरी कर ली है और उन्हें उड़ाने वाले पायलटों का प्रशिक्षण भी हो चुका है। लेकिन ईरानी सेना के प्रवक्ता मोहम्मद अकरमिनिया के मुताबिक, विमान अब युद्ध समाप्त होने के बाद ही मिलने की उम्मीद है। यानी यह फिलहाल भविष्य की सैन्य क्षमता है, युद्ध के दौरान तुरंत उपलब्ध होने वाली ताकत नहीं।
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अकरमिनिया ने क्या कहा?
31 अक्टूबर को ईरानी समाचार वेबसाइट तबनाक को दिए एक इंटरव्यू में अकरमिनिया ने कहा कि संघर्ष शुरू होने से पहले अनुबंध और पायलट प्रशिक्षण पूरा हो गए थे। विमान युद्ध शुरू होने से पहले आने की उम्मीद थी, लेकिन अब उनकी डिलीवरी लड़ाई खत्म होने के बाद होगी।
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कुछ रिपोर्टों ने इसे वर्षों से चर्चा में रहे सौदे पर ईरानी सेना की पहली सीधी सार्वजनिक टिप्पणी बताया है। यह बयान इसलिए अहम है, लेकिन इससे अपने आप अनुबंध की स्वतंत्र पुष्टि नहीं होती और न ही यह साबित होता है कि कोई विमान ईरान को सौंपा जा चुका है।
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डिलीवरी में देरी क्यों अहम है?
बताई गई समय-सीमा के मुताबिक, Su-35 को मौजूदा युद्ध में तत्काल सैन्य मदद के तौर पर नहीं गिना जा सकता: डिलीवरी लड़ाई खत्म होने पर निर्भर है। अगर उससे पहले संघर्ष फिर शुरू होता है, तो उस दौरान ईरान के पास ये विमान उपलब्ध नहीं होंगे।
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विमान सौंपे जाने के बाद भी उनके तुरंत परिचालन में आने की पुष्टि नहीं है। उपलब्ध रिपोर्टों में न तो डिलीवरी का सत्यापित कार्यक्रम दिया गया है, न यह बताया गया है कि विमानों को सेवा में शामिल करने से पहले कौन-से कदम बाकी हैं।
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क्या अब भी साफ नहीं है?
अकरमिनिया के बताए गए बयान से विमानों की संख्या, सौदे की कीमत, युद्ध से पहले तय डिलीवरी क्यों नहीं हुई या उनके पहुंचने की कोई निश्चित तारीख स्पष्ट नहीं होती। “युद्ध के बाद” एक शर्त है, पक्की तारीख वाला वादा नहीं। Clash Report ने कहा है कि डिलीवरी का विवरण प्रकाशित नहीं हुआ और उसे रूस की ओर से कोई टिप्पणी नहीं मिली; उसने खरीद के दावे को अपुष्ट भी बताया है।
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एक अलग रिपोर्ट में 48 Su-35 विमानों के ऑर्डर और जुलाई तक रूस में 20 विमानों के तैयार होने का दावा किया गया है। अकरमिनिया के बयान से इन आंकड़ों की पुष्टि नहीं होती। उपलब्ध रिपोर्टें यह भी स्थापित नहीं करतीं कि तैयार विमान ईरान को सौंपे गए थे।
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अकरमिनिया किस संस्था के प्रवक्ता हैं?
रिपोर्टों में अकरमिनिया की भूमिका को लेकर भी मतभेद है। कुछ उन्हें ईरान की नियमित सेना, यानी आर्तेश, का प्रवक्ता बताते हैं; जबकि अन्य उन्हें इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) का प्रवक्ता कहते हैं। इसलिए उपलब्ध कवरेज से यह साफ नहीं होता कि वे किस संस्था की ओर से बोल रहे थे।
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इंटरव्यू पर आधारित कुछ रिपोर्टों के अनुसार, खरीद और अनुबंध का काम सेना से बाहर की संस्थाओं ने संभाला था, जबकि पायलटों का प्रशिक्षण पूरा था। ईरान इंटरनेशनल की रिपोर्ट यह भी कहती है कि अकरमिनिया ने हवाई पूर्व-चेतावनी विमानों—जिन्हें AWACS कहा जाता है—की खरीद की योजना का जिक्र किया।
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फिलहाल सबसे ठोस निष्कर्ष यही है: एक ईरानी सैन्य प्रवक्ता ने कहा है कि Su-35 खरीद की तैयारी और पायलट प्रशिक्षण पूरा है, लेकिन डिलीवरी भविष्य में और युद्ध खत्म होने की शर्त पर निर्भर है। विमानों की संख्या, अनुबंध की शर्तें और सौंपे जाने का समय उपलब्ध रिपोर्टों से सत्यापित नहीं हैं।
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