हमास ने पुष्टि की कि अल‑क़स्साम ब्रिगेड्स के कमांडर‑इन‑चीफ इज़्ज़ अल‑दीन अल‑हद्दाद इज़राइली एयरस्ट्राइक में मारे गए।
गाज़ा से आई रिपोर्टों के मुताबिक कई मस्जिदों में उनकी मौत की घोषणा की गई और बाद में उनके अंतिम संस्कार में सैकड़ों लोग शामिल हुए।
इससे पहले इज़राइल द्वारा संगठन के अन्य वरिष्ठ कमांडरों को निशाना बनाए जाने के बाद अल‑हद्दाद हमास के सबसे वरिष्ठ सैन्य नेताओं में गिने जाने लगे थे।
जहाँ इज़राइल ने इस ऑपरेशन को एक लक्षित हमले के रूप में पेश किया, वहीं गाज़ा के स्थानीय चिकित्सा स्रोतों ने अतिरिक्त हताहतों की जानकारी दी।
फिलिस्तीनी चिकित्सा अधिकारियों और आपातकर्मियों के अनुसार:
हालाँकि शुरुआती रिपोर्टों में हताहतों की संख्या अलग‑अलग बताई गई और शुरुआत में यह स्पष्ट नहीं था कि अल‑हद्दाद मारे गए थे या घायल हुए थे।
अल‑हद्दाद की मौत को हमास नेतृत्व के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, खासकर तब जब 2025 के अंत में एक युद्धविराम ढांचा लागू किया गया था।
नेतन्याहू ने हाल ही में कहा कि इज़राइली सेना अब गाज़ा पट्टी के लगभग 60% हिस्से पर नियंत्रण रखती है, जो युद्ध के शुरुआती चरणों में लगभग आधा था।
उनके अनुसार यह रणनीति हमास पर सैन्य दबाव बढ़ाने और उसके बुनियादी ढांचे को खत्म करने के लिए अपनाई गई है।
इज़राइली नेतृत्व का कहना है कि क्षेत्रीय नियंत्रण बढ़ाना और हमास नेतृत्व को निशाना बनाना उन प्रयासों का हिस्सा है जिनका उद्देश्य गाज़ा में बचे इज़राइली बंधकों की रिहाई सुनिश्चित करना है।
इस तरह किसी वरिष्ठ कमांडर की मौत युद्ध के मैदान की स्थिति के साथ‑साथ युद्धविराम और बंधक वार्ताओं पर भी असर डाल सकती है।
7 अक्टूबर 2023 के हमलों के बाद से इज़राइल की सैन्य रणनीति में हमास के वरिष्ठ नेताओं को लक्षित करना एक प्रमुख तत्व रहा है। इज़राइली अधिकारियों का कहना है कि इससे संगठन की सैन्य समन्वय क्षमता कमजोर होती है और हमले के जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाता है।
लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि केवल नेतृत्व को निशाना बनाने से विद्रोही या सशस्त्र संगठनों का अंत तुरंत नहीं होता। इसलिए अल‑हद्दाद की मौत एक महत्वपूर्ण घटना जरूर है, मगर गाज़ा संघर्ष की दीर्घकालिक दिशा अभी भी अनिश्चित बनी हुई है।
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